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Hardoi News: 19.58 लाख रुपये खर्च, फिर भी संरक्षित नहीं हुआ नागर तालाब
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पिहानी। 19.58 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी कस्बा के नागर तालाब की सूरत में कोई बदलाव नहीं हो सका है। नगरीय तालाब और पोखर संरक्षण योजना में शामिल नागर तालाब के सुंदरीकरण का काम तीन साल बीतने के बाद भी अधूरा है। एक फर्म बदलने के बाद दूसरी फर्म को काम दिए जाने के बाद भी तीन साल में काम नहीं हो पाया है।
नगरीय तालाब और पोखर संरक्षण योजना में निकाय के नागर तालाब, पक्का तालाब, लोहानी और सरकस पुरवा के तालाब को शामिल किया गया है। इन तालाबों के सुंदरीकरण और प्रस्तावित कार्यों के लिए शासन ने साल 2019 में 30-30 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। नगरीय निकाय ने नागर तालाब पर काम की प्रक्रिया शुरु की। 30,00,000 रुपये का टेंडर कमल वर्मा नाम की फर्म को मिला। फर्म के काम की शिकायत हुई। फर्म ने भी तालाब में दो तरफ सीढि़यां बनाने के अलावा कोई काम नहीं किया। सीढ़ी व सफाई के नाम पर 19,58,621 रुपये का भुगतान निकाला गया। बचे काम के लिए 10,31,379 रुपये को कम बताकर और बजट की आवश्यकता जताई गई।
संशोधित प्रस्ताव भेजकर 50,00,000 रुपये की मांग शासन से की गई। ठेकेदार ने तालाब पर कब्जे का बहाना बनाकर काम से इनकार कर दिया। 20 मार्च 2021 को शासन 50,00,000 रुपये की स्वीकृति देते हुए पहली किस्त भी जारी दी। दोबारा निविदा प्रक्रिया में सिंह ब्रदर्स नाम की फर्म को काम मिला। इस फर्म ने भी काम की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया है। खाता में करीब 35,00,000 रुपये डंप हैं।
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नगरीय तालाब और पोखर संरक्षण योजना में निकाय के नागर तालाब, पक्का तालाब, लोहानी और सरकस पुरवा के तालाब को शामिल किया गया है। इन तालाबों के सुंदरीकरण और प्रस्तावित कार्यों के लिए शासन ने साल 2019 में 30-30 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। नगरीय निकाय ने नागर तालाब पर काम की प्रक्रिया शुरु की। 30,00,000 रुपये का टेंडर कमल वर्मा नाम की फर्म को मिला। फर्म के काम की शिकायत हुई। फर्म ने भी तालाब में दो तरफ सीढि़यां बनाने के अलावा कोई काम नहीं किया। सीढ़ी व सफाई के नाम पर 19,58,621 रुपये का भुगतान निकाला गया। बचे काम के लिए 10,31,379 रुपये को कम बताकर और बजट की आवश्यकता जताई गई।
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संशोधित प्रस्ताव भेजकर 50,00,000 रुपये की मांग शासन से की गई। ठेकेदार ने तालाब पर कब्जे का बहाना बनाकर काम से इनकार कर दिया। 20 मार्च 2021 को शासन 50,00,000 रुपये की स्वीकृति देते हुए पहली किस्त भी जारी दी। दोबारा निविदा प्रक्रिया में सिंह ब्रदर्स नाम की फर्म को काम मिला। इस फर्म ने भी काम की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया है। खाता में करीब 35,00,000 रुपये डंप हैं।
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