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चौकीदार को कभी एसपीजी सुरक्षा घेरे में नहीं देखा
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हरदोई। टिकट कटने के बाद अब तक शांत रहे सदर से भाजपा सांसद अंशुल वर्मा रविवार को सोशल मीडिया पर मुखर हो गए। सोशल मीडिया पर शेयर हुई सुब्रमण्यम स्वामी से जुड़ी एक खबर पर टिप्पणी करते हुए सदर सांसद ने लिखा है कि अपने पूरे जीवन में उन्होंने कभी चौकीदार को एसपीजी के सुरक्षा घेरे में नहीं देखा। इतना ही नहीं अंत में उन्होंने शायद चौकीदार कमजोर है, भी लिखा है।
सोशल मीडिया पर रविवार शाम एक खबर वायरल हुई, जिसके शीर्षक में लिखा था कि बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी बोले- मैं ब्राह्मण हूं, नाम में नहीं लगा सकता चौकीदार। इस खबर को शहर निवासी शैलेंद्र राजपूत ने शेयर किया। इस पर ही सांसद अंशुल वर्मा ने अंग्रेजी में लंबी टिप्पणी की। इसमें अंशुल वर्मा ने इस बयान को महान और वीरता भरा बताया। लिखा कि 2014 में चुनाव जीतने के बाद सांसदों को समझाया गया कि प्रधान सेवक के बाद सांसद भी जनता के सेवक हैं। 2019 में पढ़ाया जा रहा है कि हम चौकीदार हैं। सांसद ने लिखा है कि वह असमंजस में हैं क्योंकि अपनी पूरी जिंदगी में कभी चौकीदारों को एसपीजी सुरक्षा के घेरे में नहीं देखा। उन्होंने यह भी लिखा है कि चौकीदारों की तैनाती उनके मालिक करते हैं न कि चुने हुए लोग। ऐसे में चौकीदार जनता के बीच सिर्फ एक नारा बनकर रह गया है। अगर चौकीदार वास्तव में इतनी सुरक्षा के बीच रहे तो माना जाएगा कि चौकीदार कमजोर है। सांसद अंशुल वर्मा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मर्यादा में रहकर मन की बात कही है।
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सोशल मीडिया पर रविवार शाम एक खबर वायरल हुई, जिसके शीर्षक में लिखा था कि बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी बोले- मैं ब्राह्मण हूं, नाम में नहीं लगा सकता चौकीदार। इस खबर को शहर निवासी शैलेंद्र राजपूत ने शेयर किया। इस पर ही सांसद अंशुल वर्मा ने अंग्रेजी में लंबी टिप्पणी की। इसमें अंशुल वर्मा ने इस बयान को महान और वीरता भरा बताया। लिखा कि 2014 में चुनाव जीतने के बाद सांसदों को समझाया गया कि प्रधान सेवक के बाद सांसद भी जनता के सेवक हैं। 2019 में पढ़ाया जा रहा है कि हम चौकीदार हैं। सांसद ने लिखा है कि वह असमंजस में हैं क्योंकि अपनी पूरी जिंदगी में कभी चौकीदारों को एसपीजी सुरक्षा के घेरे में नहीं देखा। उन्होंने यह भी लिखा है कि चौकीदारों की तैनाती उनके मालिक करते हैं न कि चुने हुए लोग। ऐसे में चौकीदार जनता के बीच सिर्फ एक नारा बनकर रह गया है। अगर चौकीदार वास्तव में इतनी सुरक्षा के बीच रहे तो माना जाएगा कि चौकीदार कमजोर है। सांसद अंशुल वर्मा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मर्यादा में रहकर मन की बात कही है।
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