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Hapur News: दो राज्य, दो परिवार, कहानी एक बस लापता होने का बदला साल
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साहिबाबाद। राजू ने कथित तौर पर माता-पिता बताकर पांच महीने में दो परिवारों को अपनाया। दोनों परिवार अलग-अलग राज्य के हैं, लेकिन दोनों ही जगहों पर राजू ने अपने लापता होने और प्रताड़ना की कहानी एक ही बयां की। कहानी भी ऐसी कि जो सुने वह ममता में डूबकर आंख मूंदकर भरोसा कर सकता है। हालांकि दोनों परिवारों के लापता हुए बेटों के मुताबिक राजू ने अपने लापता होने के साल को भी बदल दिया। देहरादून में उसने 16 साल पहले साल 2008 में और गाजियाबाद में 31 साल पहले साल 1993 में अपहरण होने की बात कही। इधर राजू के वर्तमान तथाकथित परिवार की बहनों ने राजू की कई बातों पर जब गौर किया तो उन्हें भी शक हुआ। इसमें राजू के लिखने और खाने की आदतें सबसे अहम हैं। इधर परिवार ने जब तक राजू का डीएनए टेस्ट नहीं हो जाता तब तक उसे घर में न रखने की बात कही है।
धामपुर सब्जी मंडी से मोबाइल लाया, फिर किया इस्तेमाल
शहीद नगर में तथाकथित परिवार में आने के बाद राजू ने कहा था कि वह मोबाइल चलाना भी नहीं जनता और न ही उसने कभी देखा था। वहीं जब देहरादून निवासी कपिल देव शर्मा ने बताया कि उनके घर आने के बाद राजू ने धामपुर सब्जी मंडी में काम किया था। एक दिन सब्जी मंडी से लौटने के बाद वह मोबाइल लेकर घर लौटा। इसके बाद उसने सिम लेने की जिद की तो उन्होंने अपनी पत्नी आशा देवी की आईडी पर सिम खरीदकर उसे दी। इसके कुछ दिन बाद ही वह दिल्ली में कपड़ों की बिक्री करने की बात कहकर चला गया और फोन भी स्विच ऑफ कर लिया था।
सीधे की जगह बाएं हाथ से करने लगा काम
राजू ने पढ़े-लिखे होने की बात से इन्कार कर दिया था। उसे लिखना भी नहीं आता था। शनिवार को जब राजू की बड़ी बहन ने उसे बेटी की कॉपी पर अंग्रेजी के शब्द लिखने को दिए तो राजू ने उल्टे हाथ से फटाफट लिख दिया। इसके बाद जब घर में छोटी बहन ने अंग्रेजी में भांजी से कुछ कहा तो राजू ने तुरंत हिंदी में उसका जवाब दे डाला। यहां तक कि राजू की मां ने बताया कि उनका बेटा भीम सिंह उर्फ पन्नू सीधे हाथ से खाना खाता था, लेकिन राजू उल्टे हाथ से सारे काम करता है।
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बुढ़ापे में आकर टूटी उम्मीद, अब भरोसा भी नहीं
बुजुर्ग तुलाराम ने बताया कि उन्हें शुरुआत से ही शक था, लेकिन परिवार की खुशियों के आगे वे चुप रहे। उन्होंने बताया कि हैरानी तब और बढ़ गई जब शनिवार रात राजू घर में टीवी देख रहा था और अचानक पुलिस पहुंची। पुलिस ने राजू से पूछताछ करने की बात कही और उसे साथ ले गए। पीछे-पीछे तुलाराम भी थाने पहुंच गए। तुलाराम ने घर जाने को कहा तो उन्हें सुबह तक रोककर रखा गया और सोने के लिए कंबल आदि भी दिए। सुबह बड़े अधिकारी राजू से बात करेंगे कहकर तुलाराम को भेज दिया। राजू की असलियत सामने आने के बाद से राजू की बहनें और मां भी सदमे में हैं। राजू की तथाकथित मां लीलावती ने बताया कि अब उन्हें भरोसा नहीं रहा। बताया कि वह कहता था कि उसने कभी मोबाइल नहीं देखा और खूब अच्छी तरह से मोबाइल चला रहा था। बहन के बच्चों पर भी राजू बहुत गुस्सा करता है और उन्हें घर से निकालने की बात कहता है।
आज भी पूछती हैं आशा देवी
देहरादून निवासी कपिल देव शर्मा ने बताया कि पुलिस थाने में राजू ने उनकी पत्नी आशा देवी को देखते ही गले लगा लिया था। उनकी पत्नी को बुढ़ापे में बेटे के मिलने की खुशी थी। घर आने के बाद उसका व्यवहार चिड़चिड़ा हो गया था। हल्की सी रोक टोक पर भी उनसे लड़ता था और घर के बाहर निकल जाता था। 21 नवंबर को दिल्ली जाने के बाद से राजू ने अपना नंबर तो बंद किया ही। इसके अलावा अपनी तरफ से संपर्क भी नहीं किया। बताया कि आज भी कई बार उनकी पत्नी अचानक से राजू के बारे में पूछ बैठती हैं और रोने लगती हैं।
यह उठ रहे सवाल
- देहरादून में आखिर राजू के पास मोबाइल कहां से आया
- दिल्ली पहुंचने के बाद उसने मोबाइल बंद क्यों किया
- क्या दिल्ली पहुंचने से पहले उसकी किसी से बातचीत हुई
- आखिर कब से वह यह सब कर रहा है और क्यों
- कहीं राजू के पीछे कोई बड़ा राज तो नहीं
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धामपुर सब्जी मंडी से मोबाइल लाया, फिर किया इस्तेमाल
शहीद नगर में तथाकथित परिवार में आने के बाद राजू ने कहा था कि वह मोबाइल चलाना भी नहीं जनता और न ही उसने कभी देखा था। वहीं जब देहरादून निवासी कपिल देव शर्मा ने बताया कि उनके घर आने के बाद राजू ने धामपुर सब्जी मंडी में काम किया था। एक दिन सब्जी मंडी से लौटने के बाद वह मोबाइल लेकर घर लौटा। इसके बाद उसने सिम लेने की जिद की तो उन्होंने अपनी पत्नी आशा देवी की आईडी पर सिम खरीदकर उसे दी। इसके कुछ दिन बाद ही वह दिल्ली में कपड़ों की बिक्री करने की बात कहकर चला गया और फोन भी स्विच ऑफ कर लिया था।
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सीधे की जगह बाएं हाथ से करने लगा काम
राजू ने पढ़े-लिखे होने की बात से इन्कार कर दिया था। उसे लिखना भी नहीं आता था। शनिवार को जब राजू की बड़ी बहन ने उसे बेटी की कॉपी पर अंग्रेजी के शब्द लिखने को दिए तो राजू ने उल्टे हाथ से फटाफट लिख दिया। इसके बाद जब घर में छोटी बहन ने अंग्रेजी में भांजी से कुछ कहा तो राजू ने तुरंत हिंदी में उसका जवाब दे डाला। यहां तक कि राजू की मां ने बताया कि उनका बेटा भीम सिंह उर्फ पन्नू सीधे हाथ से खाना खाता था, लेकिन राजू उल्टे हाथ से सारे काम करता है।
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बुढ़ापे में आकर टूटी उम्मीद, अब भरोसा भी नहीं
बुजुर्ग तुलाराम ने बताया कि उन्हें शुरुआत से ही शक था, लेकिन परिवार की खुशियों के आगे वे चुप रहे। उन्होंने बताया कि हैरानी तब और बढ़ गई जब शनिवार रात राजू घर में टीवी देख रहा था और अचानक पुलिस पहुंची। पुलिस ने राजू से पूछताछ करने की बात कही और उसे साथ ले गए। पीछे-पीछे तुलाराम भी थाने पहुंच गए। तुलाराम ने घर जाने को कहा तो उन्हें सुबह तक रोककर रखा गया और सोने के लिए कंबल आदि भी दिए। सुबह बड़े अधिकारी राजू से बात करेंगे कहकर तुलाराम को भेज दिया। राजू की असलियत सामने आने के बाद से राजू की बहनें और मां भी सदमे में हैं। राजू की तथाकथित मां लीलावती ने बताया कि अब उन्हें भरोसा नहीं रहा। बताया कि वह कहता था कि उसने कभी मोबाइल नहीं देखा और खूब अच्छी तरह से मोबाइल चला रहा था। बहन के बच्चों पर भी राजू बहुत गुस्सा करता है और उन्हें घर से निकालने की बात कहता है।
आज भी पूछती हैं आशा देवी
देहरादून निवासी कपिल देव शर्मा ने बताया कि पुलिस थाने में राजू ने उनकी पत्नी आशा देवी को देखते ही गले लगा लिया था। उनकी पत्नी को बुढ़ापे में बेटे के मिलने की खुशी थी। घर आने के बाद उसका व्यवहार चिड़चिड़ा हो गया था। हल्की सी रोक टोक पर भी उनसे लड़ता था और घर के बाहर निकल जाता था। 21 नवंबर को दिल्ली जाने के बाद से राजू ने अपना नंबर तो बंद किया ही। इसके अलावा अपनी तरफ से संपर्क भी नहीं किया। बताया कि आज भी कई बार उनकी पत्नी अचानक से राजू के बारे में पूछ बैठती हैं और रोने लगती हैं।
यह उठ रहे सवाल
- देहरादून में आखिर राजू के पास मोबाइल कहां से आया
- दिल्ली पहुंचने के बाद उसने मोबाइल बंद क्यों किया
- क्या दिल्ली पहुंचने से पहले उसकी किसी से बातचीत हुई
- आखिर कब से वह यह सब कर रहा है और क्यों
- कहीं राजू के पीछे कोई बड़ा राज तो नहीं