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Hapur News: समय बीता, हैंडओवर नहीं हो सके छह मॉड्यूलर ओटी
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हापुड़। जिला अस्पताल और चार सीएचसी में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर समय सीमा बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के हैंडओवर नहीं हो सके हैं। सीएमओ के पत्राचार पर कार्यदायी संस्था गंभीर नहीं है। डीएम कविता मीना ने कार्यदायी संस्था को फटकार लगाते हुए जल्द बचा कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
सरकारी अस्पतालों में बेहतर सर्जरी के लिए संसाधनों को बढ़ाया जा रहा है। जिला अस्पताल में दो, हापुड़, धौलाना, गढ़ सीएचसी में एक एक और ट्रामा सेंटर में एक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाने के निर्देश शासन से मिले थे। जिले में यह काम यूपी सीडको को मिला था।
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह कार्य 31 मार्च तक पूरा किया जाना था लेकिन अभी भी कार्य अधूरा है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
जिले में सिर्फ एक सर्जन, भटकते हैं मरीज : स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में सर्जनों की कमी है। पूरे जिले में महज एक ही सर्जन हैं। स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ भी एक ही हैं।
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ट्रामा सेंटर में भी सर्जनों के अधिकांश पद खाली पड़े हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर यदि चालू भी हो गए तो लोगों को इनका कितना लाभ मिल सकेगा।
सिजेरियन प्रसव न होना बड़ी समस्या : जिले के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव कराना गर्भवतियों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। एक ही महिला रोग विशेषज्ञ होने के कारण अधिकांश सीएचसी में सिजेरियन प्रसव नहीं हो पाते। निजी चिकित्सक भी बाहर से बुलाने पड़ते हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण ही सरकारी अस्पतालों में प्रसव का ग्राफ गिर रहा है।
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सरकारी अस्पतालों में बेहतर सर्जरी के लिए संसाधनों को बढ़ाया जा रहा है। जिला अस्पताल में दो, हापुड़, धौलाना, गढ़ सीएचसी में एक एक और ट्रामा सेंटर में एक मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाने के निर्देश शासन से मिले थे। जिले में यह काम यूपी सीडको को मिला था।
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स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार यह कार्य 31 मार्च तक पूरा किया जाना था लेकिन अभी भी कार्य अधूरा है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
जिले में सिर्फ एक सर्जन, भटकते हैं मरीज : स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में सर्जनों की कमी है। पूरे जिले में महज एक ही सर्जन हैं। स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ भी एक ही हैं।
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ट्रामा सेंटर में भी सर्जनों के अधिकांश पद खाली पड़े हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर यदि चालू भी हो गए तो लोगों को इनका कितना लाभ मिल सकेगा।
सिजेरियन प्रसव न होना बड़ी समस्या : जिले के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव कराना गर्भवतियों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। एक ही महिला रोग विशेषज्ञ होने के कारण अधिकांश सीएचसी में सिजेरियन प्रसव नहीं हो पाते। निजी चिकित्सक भी बाहर से बुलाने पड़ते हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण ही सरकारी अस्पतालों में प्रसव का ग्राफ गिर रहा है।