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Hapur News: पैरों पर चलकर आया टीबी का मरीज, खून का नमूना देते ही मौत
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हापुड़। 15 दिन तक अस्पतालों में धक्का खाने के बाद बृहस्पतिवार को बहन के साथ हापुड़ सीएचसी पहुंचे टीबी के मरीज की खून का नमूना देते समय मौत हो गई। बहन मदद के लिए चिल्लायी, लेकिन कोई आपात सुविधा नहीं मिल सकी। खुद ही मृतक की बहन व्हीलचेयर लेकर आयी और भाई को इमरजेंसी तक पहुंचाया।
मूल रूप से बुलंदशहर के शिकारपुर क्षेत्र में खरवाय गांव निवासी जीतू (30) नोएडा में ट्रैक्टर चलाकर मजदूरी करता था। हालत बिगड़ने पर 15 दिन पहले वह अपनी बहन सपना के घर बाबूगढ़ आ गया। सपना ने बताया कि उसी दिन से भाई को लेकर कभी हापुड़ सीएचसी कभी जिला अस्पताल के चक्कर लगा रही थी। दोनों अस्पतालों के बीच करीब चार किलोमीटर की दूरी है, इसे कभी पैदल तय करते तो कभी रिक्शा से, आरोप है कि कागज बनाने में ही 13 दिन का समय निकाल दिया।
दो दिन पहले सीएचसी से दवा शुरू हुई, लेकिन दवा खाने से भाई की हालत बिगड़ने लगी। इस पर बृहस्पतिवार को सपना अपने भाई जीतू को लेकर सीएचसी आयी। वहां, चिकित्सकों ने खून की जांच कराने की बात कही। वैसे तो मरीज की हालत पहले ही खराब थी, लेकिन फिर भी इमरजेंसी में उसे उपचार नहीं दिया गया। रक्त का नमूना देने के लिए अलग भेजा गया, जहां इंतजार के बाद उसका नंबर लग सका। जैसे ही खून का नमूना लिया जीतू की आंखें फट गई और नीचे गिर गया। मौके पर ही जीतू की मौत हो गई।
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बहन सपना ने आरोप लगाया कि भाई को मदद दिलाने के लिए वह चिल्लाती रही। लेकिन किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया, वह खुद ही व्हील चेयर लेकर आयी। चिकित्सकों ने जीतू को मृत घोषित कर दिया। इस पर जीतू की मां राजवती भी वहां पहुंच गई। परिजनों ने अस्पताल में ही विलाप शुरू कर दिया। हालांकि पोस्टमार्टम के लिए परिजनों ने मना किया।
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एमडीआर श्रेणी में मरीज के होने की चर्चा
इलाज कर रहे चिकित्सकों का कहना था कि मृतक जीतू टीबी की एमडीआर श्रेणी में था। इस श्रेणी में ऐसे मरीज आते हैं जो बीच में ही दवा छोड़ देते हैं। जीतू के परिजनों ने भी बताया कि पहले भी टीबी की दवा खाई थी, लेकिन बीच में ही छोड़ दी।
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-खून का नमूना देते ही बेहोश हुई तीन महीने की गर्भवती-
गढ़ रोड सीएचसी में खून का नमूना देते समय रघुनाथपुर निवासी किशनवती बेहोश हो गई। उसके साथ आयी आशा और दूसरे मरीजों ने किशनवती के मुंह में पानी डालकर किसी तरह उसे होश में लाया। हीमोग्लोबिन की जांच के लिए उसका सैंपल लिया गया था।
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-खड़े मरीजों का ही लिया जाता है सैंपल-
सीएचसी में कई बार मरीजों के खून का नमूना खड़े खड़े ही ले लिया जाता है। जिन मरीजों में पहले से ही खून कम होता है, उनके चक्कर तक आ जाते हैं। बड़ी संख्या में यहां गर्भवती महिलाएं भी आती हैं।
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-2019 मरीजों का चल रहा इलाज, 104 की हुई है मौत-
जिला टीबी रोग अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिले में वर्तमान में 2019 मरीजों का इलाज चल रहा है जो टीबी से पीडि़त हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड की मानें तो 104 मरीज ऐसे चिंहित हुए हैं जिन्हें टीबी के साथ और कई बीमारियां थी और उनकी मौत हो गई है। दवा खाने में लापरवाही पर अब 63 मरीज एमडीआर और एक्सडीआर की श्रेणी में पहुंचे हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
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-मरीज का शुरू किया गया था उपचार-
मृतक जीतू का उपचार अस्पताल में हाल ही में शुरू हुआ था, उसे टीबी थी। पहले भी कई बार वह दवा छोड़ चुका था। खून की जांच आवश्यक थी, इसलिए करायी जा रही थी। परिजनों ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया है।-- डॉ.दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक।
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मूल रूप से बुलंदशहर के शिकारपुर क्षेत्र में खरवाय गांव निवासी जीतू (30) नोएडा में ट्रैक्टर चलाकर मजदूरी करता था। हालत बिगड़ने पर 15 दिन पहले वह अपनी बहन सपना के घर बाबूगढ़ आ गया। सपना ने बताया कि उसी दिन से भाई को लेकर कभी हापुड़ सीएचसी कभी जिला अस्पताल के चक्कर लगा रही थी। दोनों अस्पतालों के बीच करीब चार किलोमीटर की दूरी है, इसे कभी पैदल तय करते तो कभी रिक्शा से, आरोप है कि कागज बनाने में ही 13 दिन का समय निकाल दिया।
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दो दिन पहले सीएचसी से दवा शुरू हुई, लेकिन दवा खाने से भाई की हालत बिगड़ने लगी। इस पर बृहस्पतिवार को सपना अपने भाई जीतू को लेकर सीएचसी आयी। वहां, चिकित्सकों ने खून की जांच कराने की बात कही। वैसे तो मरीज की हालत पहले ही खराब थी, लेकिन फिर भी इमरजेंसी में उसे उपचार नहीं दिया गया। रक्त का नमूना देने के लिए अलग भेजा गया, जहां इंतजार के बाद उसका नंबर लग सका। जैसे ही खून का नमूना लिया जीतू की आंखें फट गई और नीचे गिर गया। मौके पर ही जीतू की मौत हो गई।
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बहन सपना ने आरोप लगाया कि भाई को मदद दिलाने के लिए वह चिल्लाती रही। लेकिन किसी ने हाथ नहीं बढ़ाया, वह खुद ही व्हील चेयर लेकर आयी। चिकित्सकों ने जीतू को मृत घोषित कर दिया। इस पर जीतू की मां राजवती भी वहां पहुंच गई। परिजनों ने अस्पताल में ही विलाप शुरू कर दिया। हालांकि पोस्टमार्टम के लिए परिजनों ने मना किया।
एमडीआर श्रेणी में मरीज के होने की चर्चा
इलाज कर रहे चिकित्सकों का कहना था कि मृतक जीतू टीबी की एमडीआर श्रेणी में था। इस श्रेणी में ऐसे मरीज आते हैं जो बीच में ही दवा छोड़ देते हैं। जीतू के परिजनों ने भी बताया कि पहले भी टीबी की दवा खाई थी, लेकिन बीच में ही छोड़ दी।
-खून का नमूना देते ही बेहोश हुई तीन महीने की गर्भवती-
गढ़ रोड सीएचसी में खून का नमूना देते समय रघुनाथपुर निवासी किशनवती बेहोश हो गई। उसके साथ आयी आशा और दूसरे मरीजों ने किशनवती के मुंह में पानी डालकर किसी तरह उसे होश में लाया। हीमोग्लोबिन की जांच के लिए उसका सैंपल लिया गया था।
-खड़े मरीजों का ही लिया जाता है सैंपल-
सीएचसी में कई बार मरीजों के खून का नमूना खड़े खड़े ही ले लिया जाता है। जिन मरीजों में पहले से ही खून कम होता है, उनके चक्कर तक आ जाते हैं। बड़ी संख्या में यहां गर्भवती महिलाएं भी आती हैं।
-2019 मरीजों का चल रहा इलाज, 104 की हुई है मौत-
जिला टीबी रोग अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिले में वर्तमान में 2019 मरीजों का इलाज चल रहा है जो टीबी से पीडि़त हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड की मानें तो 104 मरीज ऐसे चिंहित हुए हैं जिन्हें टीबी के साथ और कई बीमारियां थी और उनकी मौत हो गई है। दवा खाने में लापरवाही पर अब 63 मरीज एमडीआर और एक्सडीआर की श्रेणी में पहुंचे हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
-मरीज का शुरू किया गया था उपचार-
मृतक जीतू का उपचार अस्पताल में हाल ही में शुरू हुआ था, उसे टीबी थी। पहले भी कई बार वह दवा छोड़ चुका था। खून की जांच आवश्यक थी, इसलिए करायी जा रही थी। परिजनों ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार किया है।