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Hapur News: निपुण विद्यालयों का साल में दो बार होगा मूल्यांकन
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गढ़मुक्तेश्वर। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा दो तक छात्रों को निपुण बनाने में इस बार ज्यादा जोर दिया जा रहा है। अब निपुण विद्यालयों का साल में दो बार मूल्यांकन करने की योजना है। यह मूल्यांकन डायट से प्रशिक्षण प्राप्त डीएलएड प्रशिक्षुओं से कराया जाएगा।
खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह मूल्यांकन कार्य दिसंबर और फरवरी माह में कराया जाए। विद्यालयों में पाठ्य पुस्तक के साथ काॅपी, गणित चार्ट और भाषा किट का उपयोग करते हुए छात्रों में तर्क व अनुमान की क्षमता को विकसित किया जाएगा। इसके लिए सभी परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को निपुण विद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए वार्षिक लक्ष्य तय कर दिए गए हैं।
प्रत्येक स्कूल में छात्रों की न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। कक्षा व विषयवार पाठ्यक्रम को हर महीने पूरा करना होगा। बताया कि आदेश के अनुसार सभी खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के एक स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करेंगे।
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सर्वेश कुमार ने बताया कि एआरपी को अपने विकास खंड के 10 स्कूल में मिशन के उद्देश्यों को लागू करना होगा। जबकि एसआरजी, शिक्षक संकुल व पूर्व में एआरपी पद पर कार्यरत शिक्षक अपने मूल विद्यालय में उद्देश्यों को लागू करेंगे।
शिक्षकों को प्रशिक्षण के अनुसार शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में अपनाने, छात्रों की प्रगति का सतत आकलन करने व सुधारात्मक कक्षाएं चलाने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि शासन के निर्देशों को पूरा किया जा सके।
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खंड शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार ने बताया कि विभाग के उच्चाधिकारियों की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह मूल्यांकन कार्य दिसंबर और फरवरी माह में कराया जाए। विद्यालयों में पाठ्य पुस्तक के साथ काॅपी, गणित चार्ट और भाषा किट का उपयोग करते हुए छात्रों में तर्क व अनुमान की क्षमता को विकसित किया जाएगा। इसके लिए सभी परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को निपुण विद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए वार्षिक लक्ष्य तय कर दिए गए हैं।
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प्रत्येक स्कूल में छात्रों की न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। कक्षा व विषयवार पाठ्यक्रम को हर महीने पूरा करना होगा। बताया कि आदेश के अनुसार सभी खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के एक स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करेंगे।
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सर्वेश कुमार ने बताया कि एआरपी को अपने विकास खंड के 10 स्कूल में मिशन के उद्देश्यों को लागू करना होगा। जबकि एसआरजी, शिक्षक संकुल व पूर्व में एआरपी पद पर कार्यरत शिक्षक अपने मूल विद्यालय में उद्देश्यों को लागू करेंगे।
शिक्षकों को प्रशिक्षण के अनुसार शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में अपनाने, छात्रों की प्रगति का सतत आकलन करने व सुधारात्मक कक्षाएं चलाने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि शासन के निर्देशों को पूरा किया जा सके।