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Hapur News: रघुनाथपुर चंदपुरा में विकास कार्यों पर बैठी जांच
Tue, 04 Feb 2025 10:27 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Tue, 04 Feb 2025 10:27 PM IST
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हापुड़। ग्राम पंचायत रघुनाथपुर चंदपुरा में पूर्व प्रधान जयवीर सिंह के वर्ष 2010 से 2015 तक के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों में धांधली को लेकर शिकायत की गई थी। मामले में डीएम ने जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया है।
शिकायतकर्ता प्रदीप तोमर और कुशलपाल ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी, जिसमें शपथ-पत्रों के साथ शिकायती-पत्र और दस्तावेज भी सौंपे थे। आरोप है कि पूर्व प्रधान के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों के दौरान फर्जी भुगतान हुए हैं। साथ ही कार्यों की खराब गुणवत्ता की जांच की मांग भी हुई थी।
मामले में डीपीआरओ शिव बिहारी शुक्ला का कहना है कि जिलाधिकारी ने जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया है। जो शिकायतों के आधार पर मौके पर जाकर और बिल भुगतान की जांच करेंगे। साथ ही दोनों पक्षों को सुनकर अपनी रिपोर्ट भी देंगे। यदि जांच के दौरान शांति भंग होने की आशंका लगती है तो फिर संबंधित थानाध्यक्ष से संपर्क कर पुलिस बल भी प्राप्त कर सकते हैं।
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कई अन्य मामलें में भी चल रही जांच--
इसी प्रकार की कई अन्य शिकायतों पर भी अलग-अलग पंचायतों में जांच चल रही है, लेकिन नतीजा निकलकर सामने नहीं आ रहा है। यही कारण है कि ग्राम पंचायतों में फर्जी तरीके से बिलों का भुगतान आदि हो रहा है। वर्ष 2017-18 में नौ ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यों तक के बिना दस्तावेज जमा किए सचिवों ने भुगतान तक कर दिए। ऑडिट में मामला पकड़ में आया है। जिसके बाद सचिवों को नोटिस जारी हुए हैं।
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शिकायतकर्ता प्रदीप तोमर और कुशलपाल ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी, जिसमें शपथ-पत्रों के साथ शिकायती-पत्र और दस्तावेज भी सौंपे थे। आरोप है कि पूर्व प्रधान के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों के दौरान फर्जी भुगतान हुए हैं। साथ ही कार्यों की खराब गुणवत्ता की जांच की मांग भी हुई थी।
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मामले में डीपीआरओ शिव बिहारी शुक्ला का कहना है कि जिलाधिकारी ने जिला लेखा परीक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया है। जो शिकायतों के आधार पर मौके पर जाकर और बिल भुगतान की जांच करेंगे। साथ ही दोनों पक्षों को सुनकर अपनी रिपोर्ट भी देंगे। यदि जांच के दौरान शांति भंग होने की आशंका लगती है तो फिर संबंधित थानाध्यक्ष से संपर्क कर पुलिस बल भी प्राप्त कर सकते हैं।
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कई अन्य मामलें में भी चल रही जांच
इसी प्रकार की कई अन्य शिकायतों पर भी अलग-अलग पंचायतों में जांच चल रही है, लेकिन नतीजा निकलकर सामने नहीं आ रहा है। यही कारण है कि ग्राम पंचायतों में फर्जी तरीके से बिलों का भुगतान आदि हो रहा है। वर्ष 2017-18 में नौ ग्राम पंचायतों में हुए विकास कार्यों तक के बिना दस्तावेज जमा किए सचिवों ने भुगतान तक कर दिए। ऑडिट में मामला पकड़ में आया है। जिसके बाद सचिवों को नोटिस जारी हुए हैं।