{"_id":"66006f4f03b9cf97f70daf4d","slug":"holi-worship-took-place-amidst-auspicious-songs-hapur-news-c-306-1-gha1001-105724-2024-03-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hapur News: मंगल गीतों के बीच हुआ होली पूजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hapur News: मंगल गीतों के बीच हुआ होली पूजन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गढ़मुक्तेश्वर। होली पर महिलाओं ने उपवास रखा और परंपरागत मंगल गीतों के बीच होलिका का पूजन किया। बच्चों ने घरों में गोबर से बने बुरकले फेंककर भक्त प्रह्लाद की कथा सुनी।
होली के पावन अवसर पर रविवार को महिलाओं ने अपने घरों में विभिन्न प्रकार व्यंजन बनाए और उपवास रखा। अधिकांश महिलाओं ने गंगा स्नान करने के बाद समूह के रूप में वैदिक रीति रिवाज से होली का पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने भक्त प्रह्लाद और होलिका मैया से जुड़े परंपरागत मंगल गीत भी गाए। महिलाओं ने पंडित और अपने मानों को नए वस्त्रों की भेंट भी दी। बच्चों ने घर-घर जाकर गौ माता के गोबर से बने बुरकले फेंके, जिन्हें होली के अवसर पर बेहद शुभ माना जाता है। बच्चों ने भक्त प्रह्लाद की कथा भी सुनाई।
सुबह से लेकर सूर्यास्त होने तक महिलाओं द्वारा होली का पूजन किए जाने का सिलसिला निरंतर चलता रहा। जबकि देर रात भद्रा खत्म होने के बाद कस्बा बक्सर, सिंभावली मिल,हरोड़ा रोड, बहादुरगढ़, डेहरा कूटी,गढ़ नगर,पुराना बाजार, मंडी समेत अन्य स्थानों पर लगी होली को रीति रिवाज के साथ होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन के दौरान जौं की बाली को गन्ने पर बांधकर आग में भूने जाने का विशिष्ट धार्मिक महत्व है। जिसके चलते रविवार सुबह से नगर के बाजारों में जौ की बाली और गन्ने की जमकर खरीदारी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन
गढ़मुक्तेश्वर। होली पर महिलाओं ने उपवास रखा और परंपरागत मंगल गीतों के बीच होलिका का पूजन किया। बच्चों ने घरों में गोबर से बने बुरकले फेंककर भक्त प्रह्लाद की कथा सुनी।
होली के पावन अवसर पर रविवार को महिलाओं ने अपने घरों में विभिन्न प्रकार व्यंजन बनाए और उपवास रखा। अधिकांश महिलाओं ने गंगा स्नान करने के बाद समूह के रूप में वैदिक रीति रिवाज से होली का पूजन किया। इस दौरान महिलाओं ने भक्त प्रह्लाद और होलिका मैया से जुड़े परंपरागत मंगल गीत भी गाए। महिलाओं ने पंडित और अपने मानों को नए वस्त्रों की भेंट भी दी। बच्चों ने घर-घर जाकर गौ माता के गोबर से बने बुरकले फेंके, जिन्हें होली के अवसर पर बेहद शुभ माना जाता है। बच्चों ने भक्त प्रह्लाद की कथा भी सुनाई।
विज्ञापन
सुबह से लेकर सूर्यास्त होने तक महिलाओं द्वारा होली का पूजन किए जाने का सिलसिला निरंतर चलता रहा। जबकि देर रात भद्रा खत्म होने के बाद कस्बा बक्सर, सिंभावली मिल,हरोड़ा रोड, बहादुरगढ़, डेहरा कूटी,गढ़ नगर,पुराना बाजार, मंडी समेत अन्य स्थानों पर लगी होली को रीति रिवाज के साथ होलिका दहन किया गया। वहीं होलिका दहन के दौरान जौं की बाली को गन्ने पर बांधकर आग में भूने जाने का विशिष्ट धार्मिक महत्व है। जिसके चलते रविवार सुबह से नगर के बाजारों में जौ की बाली और गन्ने की जमकर खरीदारी हुई।
विज्ञापन