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Hapur News: खून का गाढ़ापन बढ़ा रहा दिल का रोग
Sat, 27 Jan 2024 11:32 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Sat, 27 Jan 2024 11:32 PM IST
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हापुड़। कड़ाके की सर्दी में खून का गाढ़ापन दिल के रोग को बढ़ रहा है। सीएचसी की ओपीडी में आने वाले पांच फीसदी मरीजों की जांच में हीमोग्लोबिन 18 से 20 तक मिल रहा है। अस्पतालों में खून पतला करने की दवाओं की मांग काफी बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने दवाओं के साथ साथ इंजेक्शन भी मंगवा लिए हैं।
फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि सर्दियों के मौसम में शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इस स्थिति में हीमोग्लोबिन बढ़ने का खतरा अधिक होता है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों के एचबी की जांच में यह सामान्य से छह से आठ प्वाइंट तक ऊपर ही मिल रहा है। इस स्थिति में नशों के अंदर खून के थक्के जमने की आशंका होती है, हृदय घात, नस ब्लॉक होने का यह बड़ा कारण बनता है।
डॉ.अशरफ अली ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि खून पतला करने के लिए एसप्रिन टैबलेट्स की मांग काफी बढ़ गई है। जिन मरीजों में हीमोग्लोबिन 20 तक पहुंच रहा है, ऐसे मरीजों पर नॉक्सपारिन इंजेक्शन का असर प्रभावी रूप से हो रहा है। इन दिनों मरीजों की खांसी ठीक नहीं हो पा रही है, ऐसे मरीजों के लिए अब सरकारी अस्पतालों में लीवोसॉल्विटामॉल व एक्रोक्सोल सीरप उपलब्ध कराए गए हैं। एंटीबॉयोटिक और चर्म रोग में दी जाने वाली दवाओं की भी व्यवस्था करा दी गई है।
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इन दवाओं की बढ़ी मांग
दवा मर्ज उपलब्धता
एसप्रिन टैबलेट खून पतला 3000 टैबलेट
नोक्साप्रिन इंजेक्शन खून पतला 900 वॉयल
लीवोसॉल्विटामॉल खांसी 2500 सीरप
एक्रोक्सोल खांसी 1200 सीरप
डाईक्लोमाइन टैब पेट दर्द 4500 टैबलेट
एजीथ्रोमाइसिन एंटी एलर्जी 1800 टैबलेट
कोट -सर्दी बढ़ने से खून पतला करने की दवाओं की मांग काफी बढ़ गई है, पर्याप्त मात्रा में दवाएं सीएचसी में उपलब्ध कराई गई हैं। एलर्जिक और पेट संक्रमण संबंधी दवाओं की भी कोई कमी नहीं है।-- डॉ.दिनेश खत्री, सीएचसी अधीक्षक।
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फिजिशियन डॉ. प्रदीप मित्तल ने बताया कि सर्दियों के मौसम में शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इस स्थिति में हीमोग्लोबिन बढ़ने का खतरा अधिक होता है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों के एचबी की जांच में यह सामान्य से छह से आठ प्वाइंट तक ऊपर ही मिल रहा है। इस स्थिति में नशों के अंदर खून के थक्के जमने की आशंका होती है, हृदय घात, नस ब्लॉक होने का यह बड़ा कारण बनता है।
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डॉ.अशरफ अली ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि खून पतला करने के लिए एसप्रिन टैबलेट्स की मांग काफी बढ़ गई है। जिन मरीजों में हीमोग्लोबिन 20 तक पहुंच रहा है, ऐसे मरीजों पर नॉक्सपारिन इंजेक्शन का असर प्रभावी रूप से हो रहा है। इन दिनों मरीजों की खांसी ठीक नहीं हो पा रही है, ऐसे मरीजों के लिए अब सरकारी अस्पतालों में लीवोसॉल्विटामॉल व एक्रोक्सोल सीरप उपलब्ध कराए गए हैं। एंटीबॉयोटिक और चर्म रोग में दी जाने वाली दवाओं की भी व्यवस्था करा दी गई है।
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इन दवाओं की बढ़ी मांग
दवा मर्ज उपलब्धता
एसप्रिन टैबलेट खून पतला 3000 टैबलेट
नोक्साप्रिन इंजेक्शन खून पतला 900 वॉयल
लीवोसॉल्विटामॉल खांसी 2500 सीरप
एक्रोक्सोल खांसी 1200 सीरप
डाईक्लोमाइन टैब पेट दर्द 4500 टैबलेट
एजीथ्रोमाइसिन एंटी एलर्जी 1800 टैबलेट
कोट -सर्दी बढ़ने से खून पतला करने की दवाओं की मांग काफी बढ़ गई है, पर्याप्त मात्रा में दवाएं सीएचसी में उपलब्ध कराई गई हैं। एलर्जिक और पेट संक्रमण संबंधी दवाओं की भी कोई कमी नहीं है।