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भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे लिपिक की सेवाएं समाप्त
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भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे लिपिक की सेवाएं समाप्त
पिलखुवा। पालिका चेयरमैन गीता गोयल ने भ्रष्टाचार के आरोप में आठ दिन पहले निलंबित किए गए निर्माण विभाग के लिपिक जितेन्द्र कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
पालिकाध्यक्ष ने बताया कि भ्रष्टाचार के आरोपों में मिलीभगत मिलने पर पालिका निर्माण विभाग के लिपिक जितेंद्र कुमार को दो दिसंबर को निलंबित कर दिया गया था। इस संबंध में नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा गया था लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। निलंबित लिपिक पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप है, जो क्षमा करने योग्य नहीं हैं। इसी के चलते निलंबित लिपिक को बर्खास्त किया गया हैं। आरोप है कि लिपिक द्वारा दो मई को विभिन्न विभागों से प्राप्त धनराशि को पालिका कोष में जमा नहीं कराया गया। मामला संज्ञान में आने पर पांच माह बाद धनराशि जमा कराई गई। इसके अलावा लिपिक द्वारा निर्माण विभाग में टेंडर फीस के रूप में प्राप्त ड्राफ्टों को पालिका के खाते में जमा नहीं करने, मामलों को छिपाते हुए टेंडर स्वीकृत हेतु आख्या प्रेषित कर टेंडरों को अधिकारी से स्वीकृत कराने। टेंडर फीस जमा के संबंध में लिपिक द्वारा कोई आख्या अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाने समेत तमाम आरोपों की जांच रिपोर्ट अधिशासी अधिकारी ने पालिकाध्यक्ष को सौंपी थी।
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पिलखुवा। पालिका चेयरमैन गीता गोयल ने भ्रष्टाचार के आरोप में आठ दिन पहले निलंबित किए गए निर्माण विभाग के लिपिक जितेन्द्र कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी हैं।
पालिकाध्यक्ष ने बताया कि भ्रष्टाचार के आरोपों में मिलीभगत मिलने पर पालिका निर्माण विभाग के लिपिक जितेंद्र कुमार को दो दिसंबर को निलंबित कर दिया गया था। इस संबंध में नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा गया था लेकिन उनके द्वारा कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। निलंबित लिपिक पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप है, जो क्षमा करने योग्य नहीं हैं। इसी के चलते निलंबित लिपिक को बर्खास्त किया गया हैं। आरोप है कि लिपिक द्वारा दो मई को विभिन्न विभागों से प्राप्त धनराशि को पालिका कोष में जमा नहीं कराया गया। मामला संज्ञान में आने पर पांच माह बाद धनराशि जमा कराई गई। इसके अलावा लिपिक द्वारा निर्माण विभाग में टेंडर फीस के रूप में प्राप्त ड्राफ्टों को पालिका के खाते में जमा नहीं करने, मामलों को छिपाते हुए टेंडर स्वीकृत हेतु आख्या प्रेषित कर टेंडरों को अधिकारी से स्वीकृत कराने। टेंडर फीस जमा के संबंध में लिपिक द्वारा कोई आख्या अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाने समेत तमाम आरोपों की जांच रिपोर्ट अधिशासी अधिकारी ने पालिकाध्यक्ष को सौंपी थी।
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