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4.58 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी पेट के कीड़े मारने की दवा
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4.58 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी पेट के कीड़े मारने की दवा
हापुड़। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर जिले के 4.58 लाख बच्चों के पेट के कीड़े मारने के लिए एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम जिले के सभी सरकारी, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाएगी और एक से 19 साल तक के बच्चों और किशोरों को दवाई खिलाई जाएगी।
जिले में कुल 903 सरकारी, निजी स्कूल और 887 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 28 जुलाई को अभियान चलाकर बच्चों और किशोरों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। एक से तीन अगस्त को मॉपअप राउंड चलाया जाएगा। इस राउंड में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में दवाई खाने से वंचित रहने वाले बच्चों को घर-घर जाकर दवाई खिलाई जाएगी। दवा घरवालों के हाथ में नहीं दी जाएगी।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि यदि बच्चे के पेट में पहले से कीड़े हैं तो एल्बेंडाजोल का सेवन करने से थोड़ी परेशानी हो सकती है। आशा कार्यकर्ता भी लाभार्थी बच्चों के परिवार के लोगों को इन सामान्य प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बताएंगी। लोगों को बताया जाएगा कि दवा खाने के बाद यदि समस्या होती है तो घबराएं नहीं, तत्काल स्थानीय आशा कार्यकर्ता, एएनएम, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें।
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उन्होंने बताया कि सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने में परेशानी होने या बच्चे को किसी रोग की दवा खा रहा हो अथवा कोविड पॉजिटिव हो तो कीड़े की दवा नहीं खिलाई जाएगी। एक वर्ष से दो वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली और तीन से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली खिलाई जाएगी।
दिमाग तक कीड़े पहुंचने का होता है खतरा
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि जो बच्चे मिट्टी में खेलते हैं उनके पेट में कीड़े हो जाने की आशंका हो जाने की आशंका ज्यादा होती है। इससे सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि बच्चों में खून की कमी हो जाती है। अपच व पेट में ऐंठन रहता है। कीड़े की संख्या अधिक होने पर वह लीवर, फेंफड़े व कभी-कभी दिमाग तक पहुंच जाते हैं। जिससे गंभीर समस्या होती है। हर छह माह पर कीड़े की दवाई खिलाने से बच्चे सुरक्षित रहेंगे।
समस्या होने पर यह करें उपाय
बच्चे को खुली और छायादार जगह में लिटा दें।
पीने के लिए साफ पानी दें।
बच्चे पर परिजन स्वयं निगरानी रखें।
आशा स्थानीय चिकित्सक को फोन पर सूचना दें।
108 नंबर पर कॉल कर बच्चे को अस्पताल पहुंचाएं।
दवाई खाने से यह हो सकती है परेशानी
जी मिचलाना की परेशानी होना
उल्टी-दस्त की परेशानी होना
पेट में हल्का दर्द होना
थकान का अनुभव होना
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हापुड़। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर जिले के 4.58 लाख बच्चों के पेट के कीड़े मारने के लिए एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम जिले के सभी सरकारी, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाएगी और एक से 19 साल तक के बच्चों और किशोरों को दवाई खिलाई जाएगी।
जिले में कुल 903 सरकारी, निजी स्कूल और 887 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 28 जुलाई को अभियान चलाकर बच्चों और किशोरों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाएगी। एक से तीन अगस्त को मॉपअप राउंड चलाया जाएगा। इस राउंड में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में दवाई खाने से वंचित रहने वाले बच्चों को घर-घर जाकर दवाई खिलाई जाएगी। दवा घरवालों के हाथ में नहीं दी जाएगी।
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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि यदि बच्चे के पेट में पहले से कीड़े हैं तो एल्बेंडाजोल का सेवन करने से थोड़ी परेशानी हो सकती है। आशा कार्यकर्ता भी लाभार्थी बच्चों के परिवार के लोगों को इन सामान्य प्रतिकूल प्रभाव के बारे में बताएंगी। लोगों को बताया जाएगा कि दवा खाने के बाद यदि समस्या होती है तो घबराएं नहीं, तत्काल स्थानीय आशा कार्यकर्ता, एएनएम, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें।
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उन्होंने बताया कि सर्दी, खांसी, बुखार, सांस लेने में परेशानी होने या बच्चे को किसी रोग की दवा खा रहा हो अथवा कोविड पॉजिटिव हो तो कीड़े की दवा नहीं खिलाई जाएगी। एक वर्ष से दो वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली और तीन से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली खिलाई जाएगी।
दिमाग तक कीड़े पहुंचने का होता है खतरा
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि जो बच्चे मिट्टी में खेलते हैं उनके पेट में कीड़े हो जाने की आशंका हो जाने की आशंका ज्यादा होती है। इससे सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि बच्चों में खून की कमी हो जाती है। अपच व पेट में ऐंठन रहता है। कीड़े की संख्या अधिक होने पर वह लीवर, फेंफड़े व कभी-कभी दिमाग तक पहुंच जाते हैं। जिससे गंभीर समस्या होती है। हर छह माह पर कीड़े की दवाई खिलाने से बच्चे सुरक्षित रहेंगे।
समस्या होने पर यह करें उपाय
बच्चे को खुली और छायादार जगह में लिटा दें।
पीने के लिए साफ पानी दें।
बच्चे पर परिजन स्वयं निगरानी रखें।
आशा स्थानीय चिकित्सक को फोन पर सूचना दें।
108 नंबर पर कॉल कर बच्चे को अस्पताल पहुंचाएं।
दवाई खाने से यह हो सकती है परेशानी
जी मिचलाना की परेशानी होना
उल्टी-दस्त की परेशानी होना
पेट में हल्का दर्द होना
थकान का अनुभव होना