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मथुरा की कंपनी के नाम पर धौलाना में बनाई जा रही थीं नकली दवाइयां
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ूपीएसआईडीसी में औषधि विभाग द्वारा छापा मारने के दौरान फैक्ट्री के बाहर खड़ी टीम संवाद
- फोटो : HAPUR
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मथुरा की कंपनी के नाम पर धौलाना में बनाई जा रही थीं नकली दवाइयां
धौलाना। औद्योगिक क्षेत्र में मथुरा की एक नामी कंपनी के नाम पर नकली दवाइयां बनाई जा रही थीं। मेरठ मंडल के खाद्य एवं औषधि प्रसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार रात छापा मारकर इस धंधे का पर्दाफाश किया। रात से लेकर मंगलवार पूरे दिन कार्रवाई चलती रही। टीम ने सभी उपकरण और दवाइयों के कच्चे माल सहित फैक्टरी को सील कर दिया है। दवाइयों के तीन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा गया है।
जिला औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने बताया कि मथुरा के कोशीकला औद्योगिक क्षेत्र में दवाई बनाने वाली कंपनी गोमेज हेल्थकेयर के अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि बुलंदशहर के ग्रामीण अंचल में उनकी कंपनी के नाम पर बाजार में एक नकली एंटीबायोटिक खपाई जा रही है। इन दवाइयों को बेचने वाले एमआर की निशानदेही पर हापुड़ के अलावा मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत के औषधि निरीक्षकों की टीम ने सोमवार रात संयुक्त रूप से मसूरी-गुलावठी रोड औद्योगिक क्षेत्र की इकाई संख्या एच-50 पर छापा मारा। इस दौरान पाया गया कि कंपनी में बिना लाइसेंस के ही एलोपैथिक दवाइयों का निर्माण हो रहा था। मथुरा की कंपनी का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर का प्रयोग किया जा रहा था। टीम ने बरामद सभी उपकरण और दवाइयों के कच्चे माल को सीलकर दिया। बरामद दवाइयों की कीमत लगभग 16 लाख रुपये बताई गई है।
औषधि निरीक्षक ने बताया कि कंपनी मालिक परमीत रस्तोगी गाजियाबाद का रहने वाला है। उसके खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। हालांकि परमीत रस्तोगी अपने पास लाइसेंस होने का दावा कर रहा है।
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रात में होता था सारा काम
अधिकारियों ने बताया कि यहां दवाइयां बनाने का कार्य रात के समय में ही होता था। फैक्टरी दिन के समय बंद रहती थी। रात में कर्मचारी यहां आते थे। दवाइयों की सप्लाई मथुरा, बुलंदशहर, आगरा और आसपास के जनपदों में रात में ही की जाती थी। मथुरा और दूसरे क्षेत्रों में दवाइयों के बेअसर होने की शिकायतों के बाद खुद कंपनी के अधिकारियों ने ही उस क्षेत्र के एमआर से इस संबंध में पूछताछ की थी। इस अवैध धंधे की पोल खुली।
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धौलाना। औद्योगिक क्षेत्र में मथुरा की एक नामी कंपनी के नाम पर नकली दवाइयां बनाई जा रही थीं। मेरठ मंडल के खाद्य एवं औषधि प्रसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार रात छापा मारकर इस धंधे का पर्दाफाश किया। रात से लेकर मंगलवार पूरे दिन कार्रवाई चलती रही। टीम ने सभी उपकरण और दवाइयों के कच्चे माल सहित फैक्टरी को सील कर दिया है। दवाइयों के तीन नमूनों को जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा गया है।
जिला औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने बताया कि मथुरा के कोशीकला औद्योगिक क्षेत्र में दवाई बनाने वाली कंपनी गोमेज हेल्थकेयर के अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि बुलंदशहर के ग्रामीण अंचल में उनकी कंपनी के नाम पर बाजार में एक नकली एंटीबायोटिक खपाई जा रही है। इन दवाइयों को बेचने वाले एमआर की निशानदेही पर हापुड़ के अलावा मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत के औषधि निरीक्षकों की टीम ने सोमवार रात संयुक्त रूप से मसूरी-गुलावठी रोड औद्योगिक क्षेत्र की इकाई संख्या एच-50 पर छापा मारा। इस दौरान पाया गया कि कंपनी में बिना लाइसेंस के ही एलोपैथिक दवाइयों का निर्माण हो रहा था। मथुरा की कंपनी का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर का प्रयोग किया जा रहा था। टीम ने बरामद सभी उपकरण और दवाइयों के कच्चे माल को सीलकर दिया। बरामद दवाइयों की कीमत लगभग 16 लाख रुपये बताई गई है।
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औषधि निरीक्षक ने बताया कि कंपनी मालिक परमीत रस्तोगी गाजियाबाद का रहने वाला है। उसके खिलाफ सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा। हालांकि परमीत रस्तोगी अपने पास लाइसेंस होने का दावा कर रहा है।
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रात में होता था सारा काम
अधिकारियों ने बताया कि यहां दवाइयां बनाने का कार्य रात के समय में ही होता था। फैक्टरी दिन के समय बंद रहती थी। रात में कर्मचारी यहां आते थे। दवाइयों की सप्लाई मथुरा, बुलंदशहर, आगरा और आसपास के जनपदों में रात में ही की जाती थी। मथुरा और दूसरे क्षेत्रों में दवाइयों के बेअसर होने की शिकायतों के बाद खुद कंपनी के अधिकारियों ने ही उस क्षेत्र के एमआर से इस संबंध में पूछताछ की थी। इस अवैध धंधे की पोल खुली।

यूपीएसआईडीसी में औषधि विभाग द्वारा छापा मारने के दौरान फैक्ट्री के अंदर जाँच करते अधिकारी संवा?- फोटो : HAPUR