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सर्जन नहीं होने से छह माह से नहीं हो पा रहे ऑपरेशन
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सर्जन नहीं होने से छह माह से नहीं हो पा रहे ऑपरेशन
हापुड़। छह माह पहले जिले के एक मात्र सर्जन का स्थानांतरण होने के बाद से अभी तक नए सर्जन तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को ऑपरेशन कराने के लिए भटकना पड़ रहा है। जनपद में अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी टोटा है। मरीज निजी अस्पतालों में महंगा उपचार कराने को मजबूर हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार ने लोगों की अच्छी सेहत के लिए हर सुविधा मुहैया कराने की घोषणा की है। इतनी घोषणाएं और योजनाएं चलाने का जनपद में कोई लाभ नहीं हो रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। सर्जन के स्थानांतरण से पहले यहां प्रति दिन छह से आठ ऑपरेशन होते थे, अब यह संख्या सिमटकर दो से तीन रह गई है। थोड़ी अधिक परेशानी होने पर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। मरीजों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेखा शर्मा का कहना है कि जिला अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती कराई जा चुकी है। जल्द जिला अस्पताल में सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती कराई जाएगी। इसके लिए शासन को लगातार पत्र भेजा जा रहा है।
सीएमओ को भी करने पड़ रहे ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग में सर्जन की तैनाती न होने के कारण कई बार सीएमओ को ही प्रसूताओं के आपरेशन करने पड़ रहे हैं। जिले में पहले के मुकाबले अब नसबंदी भी होनी काफी कम हो गई है।
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एक मात्र फिजिशियन के सहारे स्वास्थ्य विभाग
जनपद में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दो राजकीय महिला चिकित्सालय हैं। केवल नेत्र रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ और केवल एक ही फिजिशियन तैनात हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग केवल एक फिजिशियन और नेत्र रोग विशेषज्ञ के सहारे चल रहा है। त्वचा रोग विशेषज्ञ तक की तैनाती नहीं है। जबकि इन रोगों के मरीजों की जनपद में भरमार है।
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हापुड़। छह माह पहले जिले के एक मात्र सर्जन का स्थानांतरण होने के बाद से अभी तक नए सर्जन तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को ऑपरेशन कराने के लिए भटकना पड़ रहा है। जनपद में अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों का भी टोटा है। मरीज निजी अस्पतालों में महंगा उपचार कराने को मजबूर हैं।
केंद्र और प्रदेश सरकार ने लोगों की अच्छी सेहत के लिए हर सुविधा मुहैया कराने की घोषणा की है। इतनी घोषणाएं और योजनाएं चलाने का जनपद में कोई लाभ नहीं हो रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में अभी तक विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हुई है। सर्जन के स्थानांतरण से पहले यहां प्रति दिन छह से आठ ऑपरेशन होते थे, अब यह संख्या सिमटकर दो से तीन रह गई है। थोड़ी अधिक परेशानी होने पर मरीजों को रेफर किया जा रहा है। मरीजों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रेखा शर्मा का कहना है कि जिला अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती कराई जा चुकी है। जल्द जिला अस्पताल में सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती कराई जाएगी। इसके लिए शासन को लगातार पत्र भेजा जा रहा है।
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सीएमओ को भी करने पड़ रहे ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग में सर्जन की तैनाती न होने के कारण कई बार सीएमओ को ही प्रसूताओं के आपरेशन करने पड़ रहे हैं। जिले में पहले के मुकाबले अब नसबंदी भी होनी काफी कम हो गई है।
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एक मात्र फिजिशियन के सहारे स्वास्थ्य विभाग
जनपद में छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 24 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दो राजकीय महिला चिकित्सालय हैं। केवल नेत्र रोग विशेषज्ञ, तीन बाल रोग विशेषज्ञ और केवल एक ही फिजिशियन तैनात हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग केवल एक फिजिशियन और नेत्र रोग विशेषज्ञ के सहारे चल रहा है। त्वचा रोग विशेषज्ञ तक की तैनाती नहीं है। जबकि इन रोगों के मरीजों की जनपद में भरमार है।