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अरहर पर महंगाई की मार: कीमतें 27% तक बढ़ीं, घरेलू मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य के पार निकले दाल के दाम

Wed, 26 Aug 2026 06:12 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
बोनस डेस्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 26 Aug 2026 06:12 AM IST
सार

त्योहारी सीजन से पहले अरहर दाल की कीमत बढ़ी है। घरेलू मंडियों में दाम एक साल में 26 से 27 फीसदी तक बढ़े हैं और कई जगह न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर पहुंच गए हैं। कम आवक, सीमित स्टॉक और आयात में कमी से कीमतों पर दबाव है। अब मसूर दाल भी महंगी होने के संकेत हैं, कनाडा में उत्पादन घटने का भारत पर कितना असर पड़ेगा?

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arhar price hike 27 percent msp above pulses prices domestic markets
Dal Price 2026:रसोई का बजट बिगाड़ सकती है दाल! अरहर-मूंग पर मौसम की मार का खतरा |Dhan-Danadan S2 EP3 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले घरेलू और आयातित अरहर दाल की कीमतों में धीरे-धीरे मजबूती का रुख देखने को मिल रहा है। कम घरेलू आवक, मिलर्स की ओर से बढ़ती खरीदारी और आयातित स्टॉक में कमी के चलते प्रमुख उत्पादक मंडियों में अरहर के भाव सरकार द्वारा तय खरीफ समर्थन मूल्य 8,450 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को छूने और पार करने लगे हैं। घरेलू मंडियों में अरहर की कीमतें एक साल में औसतन 26 से 27 फीसदी तक बढ़ गई हैं। आयातित दालों में चेन्नई लेमन तुअर में सबसे अधिक 36.55 फीसदी का उछाल आया है।
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कमोडिटी रिसर्च फर्म आईग्रेन इंडिया के मुताबिक, 22 अगस्त को समाप्त सप्ताह के दौरान घरेलू अरहर के साथ-साथ म्यांमार और अफ्रीकी अरहर की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। चेन्नई लेमन तुअर 20 अगस्त के 7,900 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 24 अगस्त को 8,500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। इसी तरह महाराष्ट्र की अकोला मंडी में भाव 8,550 रुपये और सोलापुर मंडी में 8,450 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए हैं।
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आगे कैसा रहेगा हाल
अरहर की कीमतों में मजबूती बनी रहेगी। सीमित आपूर्ति के चलते कीमतों को सहारा मिलता रहेगा। बाद में आयात बढ़ने और घरेलू खरीफ फसल बेहतर रहने से कीमतों में तेजी पर अंकुश लगेगा।
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-राहुल चौहान, निदेशक, आइग्रेन




कीमतों में क्यों लगी है आग
  • पुरानी फसल का स्टॉक घटने और नई खरीफ आवक में समय होने के कारण मंडियों में आपूर्ति बेहद सीमित है।
  • महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई प्रमुख अरहर उत्पादक इलाकों में बारिश की कमी।
  • म्यांमार से धीमी आवक, ऊंचे मालभाड़े और अफ्रीका में नई फसल की उपलब्धता को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण बंदरगाहों पर स्टॉक कम बना हुआ है, जो कीमतों को सहारा दे रहा है।

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मसूर दाल भी हो सकती है महंगी
वैश्विक स्तर पर मसूर के सबसे बड़े निर्यातक देश कनाडा में उत्पादन में भारी गिरावट और भारत की कनाडा पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आने वाले दिनों में मसूर दाल महंगी होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

वर्ष 2026 : भारत आयातित मसूर का आधा हिस्सा अकेले कनाडा से खरीदता है।

11.47 लाख टन रहा भारत का कुल मसूर आयात
कनाडा से आयात : 5.33 लाख टन
2025-26 में कनाडा में मसूर उत्पादन 33.63 लाख टन था। 2026-27 में 25 लाख टन का अनुमान है।
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