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ठग परिवार ने शुरुआत में जीता विश्वास, फिर दिया सिर्फ झांसा
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ठग परिवार ने शुरुआत में जीता विश्वास, फिर दिया सिर्फ झांसा
हापुड़। निफ्टैक ग्लोबल कंपनी खोलकर ठगी का जाल फैलाने वाले दोनों सगे भाइयों को इस काम में उनकी पत्नियां भी सहयोग कर रही थीं। इस ठग परिवार ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए शुरू में कुछ रकम वापस भी की। इसके बाद झांसा देने लगे। लोगों का दबाव बढ़ा तो कार्यालय बंद कर फरार हो गए। आरोपियों पर लोगों ने विभिन्न थानों में 96 मुकदमे दर्ज कराए हैं। पुलिस ने तीन दिन पहले ही पांचों आरोपियों के खिलाफ इनाम घोषित किया था।
एसपी दीपक भूकर ने बताया आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बहादुरगढ़ थाना पुलिस, सर्विलांस टीम के साथ साथ तीन टीमों को लगाया गया था। गढ़-स्याना रोड के गांव बहद के पास से सगे भाई अशोक और धर्मपाल, धर्मपाल की पत्नी सुषमा, अशोक की पत्नी सुनीता निवासी गांव चांदनेर थाना बहादुरगढ़ और अशोक निवासी भड़काऊ थाना नरसैना जिला बुलंदशहर को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने वर्ष 2008 में आरोपियों ने निफ्टैक ग्लोबल कंपनी की शुरुआत की थी। 18 महीनों में पैसा दोगुना करने का लोगों को लालच दिया। पहला कार्यालय बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के डेहरा कुटी और गढ़मुक्तेश्वर में खोला गया। इसके बाद हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद और दिल्ली में कार्यालय खोला गया। वर्ष 2008 में कंपनी का धंधा तेजी से बढ़ा और कुछ ही दिनों में मोटी राशि जमा कर ली। हापुड़ के करीब 18 सौ से दो हजार लोगों ने इस कंपनी में अपना पैसा लगाया। जो 500 करोड़ रुपये से अधिक है। आरोपियों ने पैसा शेयर मार्केट में लगा दिया। शुरुआत में कमाई हुई तो लोगों को भी दोगुना भुगतान किया। वर्ष 2015 में आरोपियों का मोटा नुकसान हुआ। करोड़ों रुपये शेयर ब्रोकर ने हजम कर लिए।
पहचान बदलकर राजस्थान में खोल ली थी नई कंपनी
ठगी का धंधा यहां धंधा चौपट हुआ तो दोनों भाई बाकी बचे करोड़ों रुपये लेकर अपने परिवार समेत राजस्थान के उदयपुर में जाकर बस गए। रिश्ते-नातेदारों से संबंध तोड़ नई पहचान और नए नाम से कंपनी बनाकर यही धंधा शुरू कर दिया था। उदयपुर में किराये के फ्लैट से ऐसी ही नई कंपनी की शुरुआत की। बड़ी बात यह थी कि आरोपियों ने अपने नए नामों से नए आधार कार्ड भी बनवा लिए। पुराने सारे रिकार्ड खत्म कर नए बैंक खाते खुलवा लिए। यही कारण रहा कि आरोपी पुलिस के रडार पर नहीं आ रहे थे।
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नहीं बदलवा सके मां का आधार कार्ड
पिछले तीन महीने से बहादुरगढ़ पुलिस और खासतौर से जिले की सर्विलांस टीम कंपनी के हापुड़ के कार्यालयों से बरामद हुए दस्तावेज और लैपटॉप खंगाल रही थी। पुलिस ने पुराने खातों की डिटेल निकलवाई, जो अब बंद थे। एक बैंक खाता ऐसा मिला, जो पुराने आधार कार्ड पर खोला गया था। दरअसल, आरोपियों ने अपने आधार कार्ड नए बनवा लिए थे लेकिन मां का आधार कार्ड नहीं बदलवा सके। इसी खाते की जांच की गई तो दूसरे नए खातों से लेनदेन का पता चला और तार जुड़ते चले गए। नए नंबर मिले तो सर्विलांस टीम ने सभी आरोपियों को ट्रेस कर लिया।
गाजियाबाद से खरीदी थी फॉरच्यूनर
आरोपी अशोक ने हाल ही मेें गाजियाबाद की एक एजेंसी से नए दस्तावेजों से फारच्यूनर गाड़ी खरीदी थी। पुलिस एजेंसी तक पहुंच गई। वहां से भी काफी जानकारी आरोपियों के बारे में हाथ लगी थी।
लोगों की गाढ़ी कमाई से हासिल की अकूत संपत्ति
पुलिस जांच के दौरान पता लगा है कि आरोपियों ने लोगों की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाकर अपने भविष्य का बंदोबस्त कर लिया था। आरोपियों ने अपने बच्चों, पत्नियों, परिवार के सदस्यों के नाम पर विभिन्न शहरों, गांवों में संपत्ति, कृषि भूमि, मकान, फ्लैट, प्लाट खरीद रखे हैं। अशोक और धर्मपाल ने कंपनी के नाम से और अपने-अपने नामों से अलग-अलग बैंकों में फर्जी तरीके से खाते भी खोल रखे हैं। ठगों की गिरफ्तारी से कंपनी में निवेश करने वालों में खुशी है। बहादुरगढ़ क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने अपनी कृषि भूमि, पशु, दुकान, मकान समेत अन्य प्रॉपट्री को बेच दिया और रकम दोगुना कराने के लिए पैसा निवेश किया था।
कुर्की हुई, तीन दिन पहले घोषित किया था इनाम
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि कंपनी के डायरेक्टर अशोक और धर्मपाल पुत्र रघुवीर, धर्मपाल की पत्नी सुषमा, अशोक की पत्नी सुनीता और अशोक पुत्र चंद्रपाल निवासी भड़काऊ की न्यायालय के आदेश पर इसी वर्ष अगस्त में कुर्की की कार्रवाई की गई थी। तीन दिन पहले आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई करते हुए इनाम घोषित किया गया था।
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हापुड़। निफ्टैक ग्लोबल कंपनी खोलकर ठगी का जाल फैलाने वाले दोनों सगे भाइयों को इस काम में उनकी पत्नियां भी सहयोग कर रही थीं। इस ठग परिवार ने लोगों का भरोसा जीतने के लिए शुरू में कुछ रकम वापस भी की। इसके बाद झांसा देने लगे। लोगों का दबाव बढ़ा तो कार्यालय बंद कर फरार हो गए। आरोपियों पर लोगों ने विभिन्न थानों में 96 मुकदमे दर्ज कराए हैं। पुलिस ने तीन दिन पहले ही पांचों आरोपियों के खिलाफ इनाम घोषित किया था।
एसपी दीपक भूकर ने बताया आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए बहादुरगढ़ थाना पुलिस, सर्विलांस टीम के साथ साथ तीन टीमों को लगाया गया था। गढ़-स्याना रोड के गांव बहद के पास से सगे भाई अशोक और धर्मपाल, धर्मपाल की पत्नी सुषमा, अशोक की पत्नी सुनीता निवासी गांव चांदनेर थाना बहादुरगढ़ और अशोक निवासी भड़काऊ थाना नरसैना जिला बुलंदशहर को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों ने वर्ष 2008 में आरोपियों ने निफ्टैक ग्लोबल कंपनी की शुरुआत की थी। 18 महीनों में पैसा दोगुना करने का लोगों को लालच दिया। पहला कार्यालय बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के डेहरा कुटी और गढ़मुक्तेश्वर में खोला गया। इसके बाद हापुड़, बुलंदशहर, गाजियाबाद और दिल्ली में कार्यालय खोला गया। वर्ष 2008 में कंपनी का धंधा तेजी से बढ़ा और कुछ ही दिनों में मोटी राशि जमा कर ली। हापुड़ के करीब 18 सौ से दो हजार लोगों ने इस कंपनी में अपना पैसा लगाया। जो 500 करोड़ रुपये से अधिक है। आरोपियों ने पैसा शेयर मार्केट में लगा दिया। शुरुआत में कमाई हुई तो लोगों को भी दोगुना भुगतान किया। वर्ष 2015 में आरोपियों का मोटा नुकसान हुआ। करोड़ों रुपये शेयर ब्रोकर ने हजम कर लिए।
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पहचान बदलकर राजस्थान में खोल ली थी नई कंपनी
ठगी का धंधा यहां धंधा चौपट हुआ तो दोनों भाई बाकी बचे करोड़ों रुपये लेकर अपने परिवार समेत राजस्थान के उदयपुर में जाकर बस गए। रिश्ते-नातेदारों से संबंध तोड़ नई पहचान और नए नाम से कंपनी बनाकर यही धंधा शुरू कर दिया था। उदयपुर में किराये के फ्लैट से ऐसी ही नई कंपनी की शुरुआत की। बड़ी बात यह थी कि आरोपियों ने अपने नए नामों से नए आधार कार्ड भी बनवा लिए। पुराने सारे रिकार्ड खत्म कर नए बैंक खाते खुलवा लिए। यही कारण रहा कि आरोपी पुलिस के रडार पर नहीं आ रहे थे।
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नहीं बदलवा सके मां का आधार कार्ड
पिछले तीन महीने से बहादुरगढ़ पुलिस और खासतौर से जिले की सर्विलांस टीम कंपनी के हापुड़ के कार्यालयों से बरामद हुए दस्तावेज और लैपटॉप खंगाल रही थी। पुलिस ने पुराने खातों की डिटेल निकलवाई, जो अब बंद थे। एक बैंक खाता ऐसा मिला, जो पुराने आधार कार्ड पर खोला गया था। दरअसल, आरोपियों ने अपने आधार कार्ड नए बनवा लिए थे लेकिन मां का आधार कार्ड नहीं बदलवा सके। इसी खाते की जांच की गई तो दूसरे नए खातों से लेनदेन का पता चला और तार जुड़ते चले गए। नए नंबर मिले तो सर्विलांस टीम ने सभी आरोपियों को ट्रेस कर लिया।
गाजियाबाद से खरीदी थी फॉरच्यूनर
आरोपी अशोक ने हाल ही मेें गाजियाबाद की एक एजेंसी से नए दस्तावेजों से फारच्यूनर गाड़ी खरीदी थी। पुलिस एजेंसी तक पहुंच गई। वहां से भी काफी जानकारी आरोपियों के बारे में हाथ लगी थी।
लोगों की गाढ़ी कमाई से हासिल की अकूत संपत्ति
पुलिस जांच के दौरान पता लगा है कि आरोपियों ने लोगों की गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाकर अपने भविष्य का बंदोबस्त कर लिया था। आरोपियों ने अपने बच्चों, पत्नियों, परिवार के सदस्यों के नाम पर विभिन्न शहरों, गांवों में संपत्ति, कृषि भूमि, मकान, फ्लैट, प्लाट खरीद रखे हैं। अशोक और धर्मपाल ने कंपनी के नाम से और अपने-अपने नामों से अलग-अलग बैंकों में फर्जी तरीके से खाते भी खोल रखे हैं। ठगों की गिरफ्तारी से कंपनी में निवेश करने वालों में खुशी है। बहादुरगढ़ क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने अपनी कृषि भूमि, पशु, दुकान, मकान समेत अन्य प्रॉपट्री को बेच दिया और रकम दोगुना कराने के लिए पैसा निवेश किया था।
कुर्की हुई, तीन दिन पहले घोषित किया था इनाम
एसपी दीपक भूकर ने बताया कि कंपनी के डायरेक्टर अशोक और धर्मपाल पुत्र रघुवीर, धर्मपाल की पत्नी सुषमा, अशोक की पत्नी सुनीता और अशोक पुत्र चंद्रपाल निवासी भड़काऊ की न्यायालय के आदेश पर इसी वर्ष अगस्त में कुर्की की कार्रवाई की गई थी। तीन दिन पहले आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर के तहत कार्रवाई करते हुए इनाम घोषित किया गया था।