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नेत्रहीनों की अंधेरी जिंदगी में उजियारे को नेत्रदान कर बने मिशाल
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बिहारी लाल
- फोटो : HAPUR
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दूसरों के अंधेरे जीवन में उजियारा लाएंगी बिहारी लाल की आंखें
हापुड़। नगर के गोल मार्केट निवासी बिहारी लाल मरणोपरांत भी दूसरे लोगों के अंधेरे जीवन में उजियारा लाएंगी। अंतिम इच्छानुसार परिजनों ने मेरठ से टीम को बुलाकर उनका नेत्रदान कराया।
90 वर्षीय बिहारी लाल बीते काफी समय से बीमार चल रहे थे। 13 अक्तूबर को उनका निधन हो गया। मृतक के पुत्र बैनर्जी भारती ने बताया कि उनके पिता की अंतिम इच्छा मरने के बाद नेत्रदान करने की थी।
उनके निधन पर मेरठ कॉलेज की टीम आई, डॉ आनंद प्रकाश की मदद से उनके नेत्रदान कराए गए। बैनर्जी भारती ने बताया कि उनकी इच्छा भी मरणोपरांत नेत्रदान करने की है। ताकि उनकी आंखों से किसी अन्य की जिंदगी रोशन हो सके।
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वहीं, अपने संपूर्ण अंग व शरीर का दान कर चुके उत्तर प्रदेश तैराकी संघ के एसोसिएट ज्वाइंट सेक्रेट्री रामानंद दाय ने कहा कि मरणोपरांत शरीर को जलाकर खाक करने से बेहतर है कि किसी की जिंदगी में उम्मीद और रोशनी पैदा की जाए।
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हापुड़। नगर के गोल मार्केट निवासी बिहारी लाल मरणोपरांत भी दूसरे लोगों के अंधेरे जीवन में उजियारा लाएंगी। अंतिम इच्छानुसार परिजनों ने मेरठ से टीम को बुलाकर उनका नेत्रदान कराया।
90 वर्षीय बिहारी लाल बीते काफी समय से बीमार चल रहे थे। 13 अक्तूबर को उनका निधन हो गया। मृतक के पुत्र बैनर्जी भारती ने बताया कि उनके पिता की अंतिम इच्छा मरने के बाद नेत्रदान करने की थी।
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उनके निधन पर मेरठ कॉलेज की टीम आई, डॉ आनंद प्रकाश की मदद से उनके नेत्रदान कराए गए। बैनर्जी भारती ने बताया कि उनकी इच्छा भी मरणोपरांत नेत्रदान करने की है। ताकि उनकी आंखों से किसी अन्य की जिंदगी रोशन हो सके।
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वहीं, अपने संपूर्ण अंग व शरीर का दान कर चुके उत्तर प्रदेश तैराकी संघ के एसोसिएट ज्वाइंट सेक्रेट्री रामानंद दाय ने कहा कि मरणोपरांत शरीर को जलाकर खाक करने से बेहतर है कि किसी की जिंदगी में उम्मीद और रोशनी पैदा की जाए।