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गेहूं खरीद केंद्र बंद, किसानों का रह गया 1.91 मीट्रिक टन अनाज
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गेहूं खरीद केंद्र बंद, किसानों का रह गया 1.91 मीट्रिक टन अनाज
हापुड़। गेहूं क्रय केंद्रों पर मंगलवार को तौल का आखिरी दिन था। जिले में अब तक 33924 मीट्रिक टन गेहूं अब तक खरीदा गया है लेकिन अभी भी किसानों के पास करीब 1.91 लाख मीट्रिक टन गेहूं बच गया है। तिथि बढ़ने का भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ, सात दिन में महज 1066 मिट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी है।
जिले में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। इसके लिए 31 केंद्र बनाए गए और खरीद की अंतिम तिथि 15 जून रखी गई। इस बार शासन ने बिना लक्ष्य तय किए गेहूं की खरीद कराई। जिसके चलते गत वर्षों के मुकाबले तीन गुना से अधिक गेहूं की खरीद की गई। किसानों की उत्सुकता को देखकर खरीद की तिथि बढ़ाकर 22 जून कर दी गई।
लेकिन 15 जून के बाद से जिला प्रशासन ने केंद्रों की संख्या घटाकर 14 कर दी। इनमें शुरू के दो दिन तक 14 केंद्रों में से 13 बंद रहे, सिर्फ एक पर ही खरीद हुई। हालांकि इसके बाद चार केंद्रों पर खरीद शुरू हुई। तिथि बढ़ने के बाद से सात दिनों में सिर्फ 1066 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद की जा सकी है।
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कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले के 45 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई की गई। 2.25 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन हुआ। सरकारी केंद्रों पर सिर्फ 33924 हजार मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी, जबकि 1.93 लाख मीट्रिक टन गेहूं अभी भी अवशेष रह गया है।
63.25 करोड़ का किया भुगतान
जिले के किसानों से खरीद किए गेहूं का विभाग द्वारा 63.25 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। जबकि 3.75 करोड़ रुपये का अवशेष भुगतान भी जल्द करने का दावा किया गया है।
एमएसपी पर ब्रिकी मुश्किल
सरकारी खरीद केंद्रों के बंद होने से अब खुले बाजार में एमएसपी पर गेहूं की बिक्री करना चुनौती साबित होगा। क्योंकि बाजार में गेहूं 1700 रुपये तक ही खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसानों को फसल से मुनाफा कमाना मुश्किल होगा।
जल्द होगा अवशेष भुगतान
शासन से खरीद की तिथि बढ़ाने के कोई आदेश नहीं मिले हैं। मंगलवार को अंतिम तौल की गई है, किसानों को अधिकांश भुगतान कर दिया गया है। अवशेष भुगतान जल्द करा दिया जाएगा।--जिला विपणन अधिकारी, सुरेश यादव।
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हापुड़। गेहूं क्रय केंद्रों पर मंगलवार को तौल का आखिरी दिन था। जिले में अब तक 33924 मीट्रिक टन गेहूं अब तक खरीदा गया है लेकिन अभी भी किसानों के पास करीब 1.91 लाख मीट्रिक टन गेहूं बच गया है। तिथि बढ़ने का भी किसानों को कोई फायदा नहीं हुआ, सात दिन में महज 1066 मिट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी है।
जिले में गेहूं की खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। इसके लिए 31 केंद्र बनाए गए और खरीद की अंतिम तिथि 15 जून रखी गई। इस बार शासन ने बिना लक्ष्य तय किए गेहूं की खरीद कराई। जिसके चलते गत वर्षों के मुकाबले तीन गुना से अधिक गेहूं की खरीद की गई। किसानों की उत्सुकता को देखकर खरीद की तिथि बढ़ाकर 22 जून कर दी गई।
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लेकिन 15 जून के बाद से जिला प्रशासन ने केंद्रों की संख्या घटाकर 14 कर दी। इनमें शुरू के दो दिन तक 14 केंद्रों में से 13 बंद रहे, सिर्फ एक पर ही खरीद हुई। हालांकि इसके बाद चार केंद्रों पर खरीद शुरू हुई। तिथि बढ़ने के बाद से सात दिनों में सिर्फ 1066 मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद की जा सकी है।
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कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले के 45 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की बुवाई की गई। 2.25 लाख मीट्रिक टन कुल उत्पादन हुआ। सरकारी केंद्रों पर सिर्फ 33924 हजार मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो सकी, जबकि 1.93 लाख मीट्रिक टन गेहूं अभी भी अवशेष रह गया है।
63.25 करोड़ का किया भुगतान
जिले के किसानों से खरीद किए गेहूं का विभाग द्वारा 63.25 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया गया है। जबकि 3.75 करोड़ रुपये का अवशेष भुगतान भी जल्द करने का दावा किया गया है।
एमएसपी पर ब्रिकी मुश्किल
सरकारी खरीद केंद्रों के बंद होने से अब खुले बाजार में एमएसपी पर गेहूं की बिक्री करना चुनौती साबित होगा। क्योंकि बाजार में गेहूं 1700 रुपये तक ही खरीदा जा रहा है। ऐसे में किसानों को फसल से मुनाफा कमाना मुश्किल होगा।
जल्द होगा अवशेष भुगतान
शासन से खरीद की तिथि बढ़ाने के कोई आदेश नहीं मिले हैं। मंगलवार को अंतिम तौल की गई है, किसानों को अधिकांश भुगतान कर दिया गया है। अवशेष भुगतान जल्द करा दिया जाएगा।--जिला विपणन अधिकारी, सुरेश यादव।