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आम के पेड़ों पर बौर आया, बागवानों के खिले चेहरे
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आम के पेड़ों पर बौर आया, बागवानों के खिले चेहरे
हापुड़। वसंत के मौसम के साथ ही आम के बागों में बहार आ गई है। पेड़ों पर बौर आने लगे हैं, जिसे देखकर बागवान काफी खुश हैं। इस बार बंपर आम के पैदावर होने की उम्मीद है, जिससे अच्छे मुनाफे की आस है।
जिले में काफी पैमाने पर आम की फसल का उत्पादन होता है। आसपास के जिलों के साथ पड़ोसी राज्यों में भी जिले का आम भेजा जाता है। इससे बागवानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है। बीते वर्ष कोरोना संकट के लॉकडाउन लग गया था, जिससे फसल तैयार होने के बाद फसल बाहर नहीं जा सकी थी। जिससे जिले में ही आम की ब्रिकी करनी पड़ी, मात्रा अधिक होने के कारण बागवानों को फसल का अच्छा दाम नहीं मिल पाया था।
इस वर्ष आम के बागों में समय से बहार आ गई है। पेड़ों पर भारी संख्या में बोर लगने लगे हैं। जिससे कोरोना की मार झेल चुके बागवान बौर को देखकर काफी खुश है। इस वर्ष यदि मौसम ने साथ दिया तो फसल अच्छी होगी और फसल के बाहर जाने से बागवानों को अच्छा मुनाफा मिलेगा।
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जिला उद्यान अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि कोरोना के चलते पिछले वर्ष बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन इस बार काफी अच्छा बौर आया है, जिससे अच्छी फसल और मुनाफे की उम्मीद है। फसल की पैदावार मौसम का काफी असर पड़ता है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो अच्छी फसल होगी।
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जिले में छह हजार हेक्टेयर में हैं आम के बाग
जिले में आम का काफी अधिक रकबा है। करीब छह हजार हेक्टेयर में आम के बाग हैं और जिले में कई प्रजातियों के आम की पैदावार होती है, जिसमें दहशहरी, चौंसा, बंबई, लंगड़ा, फजली आदि प्रजातियां शामिल हैं। यहां से अधिकतर आम दिल्ली मंडी जाता है, जहां से इसे दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है।
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मौसम आम के अनुकूल, किसान करा रहे स्प्रे
नली निवासी गौरव प्रताप का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल है और अभी तक बौर अच्छा आ रहा है। बागों में किसान स्प्रे आदि करा रहे हैं। मौसम ने साथ दिया तो बंपर पैदावार होने की उम्मीद है।
उपैड़ा निवासी अजय त्यागी ने बताया कि कोरोना के चलते पिछले सीजन में बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार बौर अच्छा आया है। जिससे आम का उत्पालन अच्छा होने की उम्मीद है।
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हापुड़। वसंत के मौसम के साथ ही आम के बागों में बहार आ गई है। पेड़ों पर बौर आने लगे हैं, जिसे देखकर बागवान काफी खुश हैं। इस बार बंपर आम के पैदावर होने की उम्मीद है, जिससे अच्छे मुनाफे की आस है।
जिले में काफी पैमाने पर आम की फसल का उत्पादन होता है। आसपास के जिलों के साथ पड़ोसी राज्यों में भी जिले का आम भेजा जाता है। इससे बागवानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है। बीते वर्ष कोरोना संकट के लॉकडाउन लग गया था, जिससे फसल तैयार होने के बाद फसल बाहर नहीं जा सकी थी। जिससे जिले में ही आम की ब्रिकी करनी पड़ी, मात्रा अधिक होने के कारण बागवानों को फसल का अच्छा दाम नहीं मिल पाया था।
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इस वर्ष आम के बागों में समय से बहार आ गई है। पेड़ों पर भारी संख्या में बोर लगने लगे हैं। जिससे कोरोना की मार झेल चुके बागवान बौर को देखकर काफी खुश है। इस वर्ष यदि मौसम ने साथ दिया तो फसल अच्छी होगी और फसल के बाहर जाने से बागवानों को अच्छा मुनाफा मिलेगा।
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जिला उद्यान अधिकारी एसके शर्मा का कहना है कि कोरोना के चलते पिछले वर्ष बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। लेकिन इस बार काफी अच्छा बौर आया है, जिससे अच्छी फसल और मुनाफे की उम्मीद है। फसल की पैदावार मौसम का काफी असर पड़ता है। यदि मौसम अनुकूल रहा तो अच्छी फसल होगी।
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जिले में छह हजार हेक्टेयर में हैं आम के बाग
जिले में आम का काफी अधिक रकबा है। करीब छह हजार हेक्टेयर में आम के बाग हैं और जिले में कई प्रजातियों के आम की पैदावार होती है, जिसमें दहशहरी, चौंसा, बंबई, लंगड़ा, फजली आदि प्रजातियां शामिल हैं। यहां से अधिकतर आम दिल्ली मंडी जाता है, जहां से इसे दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है।
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मौसम आम के अनुकूल, किसान करा रहे स्प्रे
नली निवासी गौरव प्रताप का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल है और अभी तक बौर अच्छा आ रहा है। बागों में किसान स्प्रे आदि करा रहे हैं। मौसम ने साथ दिया तो बंपर पैदावार होने की उम्मीद है।
उपैड़ा निवासी अजय त्यागी ने बताया कि कोरोना के चलते पिछले सीजन में बागवानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार बौर अच्छा आया है। जिससे आम का उत्पालन अच्छा होने की उम्मीद है।