{"_id":"602ab5d58ebc3ee8f8517797","slug":"hapur-news-hapur-news-gbd2138107192","type":"story","status":"publish","title_hn":"ब्लॉक प्रमुख के लिए जिले में कम नहीं रहा घमासान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ब्लॉक प्रमुख के लिए जिले में कम नहीं रहा घमासान
विज्ञापन
ब्लॉक प्रमुख के लिए जिले में कम नहीं रहा घमासान
हापुड़। जिला पंचायत के साथ-साथ जिले में ब्लॉक प्रमुख और प्रधान पद के लिए भी कम घमासान नहीं रहा है। पिछले चुनाव में जिले के चारों ब्लॉक के चुनाव में काफी रस्साकशी देखने को मिली। दो ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी आए, हालांकि सत्ता बदलने के बाद ही अपनी कुर्सी बचा पाने में सफल हुए।
विधानसभा व लोकसभा चुनाव शहरी व ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े होते हैं लेकिन त्रिस्तरीय चुनाव ग्रामीण क्षेत्र से ही जुड़े हुए हैं। इन चुनावों में गांवों की राजनीति भी खुलकर सामने आती है। जिला पंचायत के चुनाव हों या फिर प्रधान व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव। चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछली योजना में ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी को लेकर काफी उतार चढ़ाव सामने आए थे। जनपद में चार ब्लॉक हैं जिसमें हापुड़, सिंभावली, गढ़ व धौलाना हैं। ब्लॉक प्रमुख का चुनाव वर्ष 2016 में हुआ था। प्रदेश में सपा की सरकार थी और ब्लॉक की सभी अध्यक्ष पदों पर सपा के प्रत्याशियों ने ही बाजी मारी थी। हापुड़ ब्लॉक से लुखराड़ा निवासी बबीता सिंह निर्विरोध चुनी गई थी। हालांकि कांग्रेस के पूर्व विधायक गजराज सिंह की पत्नी लज्जारानी ने इस पद के लिए खासी मशक्कत की थी, पर्चा भी लिया था लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने नामांकन नहीं किया। धौलाना में भी खिचरा निवासी संतोष यादव भी सपा से निर्विरोध चुने गए। इसके अलावा गढ़ ब्लॉक से प्रसपा के रवि यादव ने अपने विरोधी अफजाल को हराया और सिंभावली से सपा के रविंद्र यादव ब्लॉक प्रमुख के रूप में चुने गए थे। फरवरी 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद फिर समीकरण बदल गए। गढ़, सिंभावली और धौलाना में तख्तापलट के पूरे प्रयास किए गए। गढ़ में रवि यादव के खिलाफ दिनेश यादव द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जो विफल हो गया। वर्ष 2019 में एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, इसमें भी सफलता नहीं मिली। सिंभावली ब्लॉक प्रमुख रविंद्र यादव के खिलाफ भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख सदस्यों के सत्यापन में झूठे शपथपत्र देने के मामले में भी फंसे थे। कुल मिलाकर सभी ब्लॉक प्रमुखों ने दल बदल और दूसरे तिकड़म लगाकर अपनी सीट बचाकर रखी। हालांकि अब फिर से चुनाव की तैयारी शुरू हो गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा ब्लॉक प्रमुख को लेकर भी काफी घमासान देखने को मिलेगा।
विज्ञापन
हापुड़। जिला पंचायत के साथ-साथ जिले में ब्लॉक प्रमुख और प्रधान पद के लिए भी कम घमासान नहीं रहा है। पिछले चुनाव में जिले के चारों ब्लॉक के चुनाव में काफी रस्साकशी देखने को मिली। दो ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी आए, हालांकि सत्ता बदलने के बाद ही अपनी कुर्सी बचा पाने में सफल हुए।
विधानसभा व लोकसभा चुनाव शहरी व ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े होते हैं लेकिन त्रिस्तरीय चुनाव ग्रामीण क्षेत्र से ही जुड़े हुए हैं। इन चुनावों में गांवों की राजनीति भी खुलकर सामने आती है। जिला पंचायत के चुनाव हों या फिर प्रधान व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव। चुनाव जीतने के लिए प्रत्याशी कोई कसर नहीं छोड़ते। पिछली योजना में ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी को लेकर काफी उतार चढ़ाव सामने आए थे। जनपद में चार ब्लॉक हैं जिसमें हापुड़, सिंभावली, गढ़ व धौलाना हैं। ब्लॉक प्रमुख का चुनाव वर्ष 2016 में हुआ था। प्रदेश में सपा की सरकार थी और ब्लॉक की सभी अध्यक्ष पदों पर सपा के प्रत्याशियों ने ही बाजी मारी थी। हापुड़ ब्लॉक से लुखराड़ा निवासी बबीता सिंह निर्विरोध चुनी गई थी। हालांकि कांग्रेस के पूर्व विधायक गजराज सिंह की पत्नी लज्जारानी ने इस पद के लिए खासी मशक्कत की थी, पर्चा भी लिया था लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने नामांकन नहीं किया। धौलाना में भी खिचरा निवासी संतोष यादव भी सपा से निर्विरोध चुने गए। इसके अलावा गढ़ ब्लॉक से प्रसपा के रवि यादव ने अपने विरोधी अफजाल को हराया और सिंभावली से सपा के रविंद्र यादव ब्लॉक प्रमुख के रूप में चुने गए थे। फरवरी 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद फिर समीकरण बदल गए। गढ़, सिंभावली और धौलाना में तख्तापलट के पूरे प्रयास किए गए। गढ़ में रवि यादव के खिलाफ दिनेश यादव द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, जो विफल हो गया। वर्ष 2019 में एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया, इसमें भी सफलता नहीं मिली। सिंभावली ब्लॉक प्रमुख रविंद्र यादव के खिलाफ भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। इस दौरान ब्लॉक प्रमुख सदस्यों के सत्यापन में झूठे शपथपत्र देने के मामले में भी फंसे थे। कुल मिलाकर सभी ब्लॉक प्रमुखों ने दल बदल और दूसरे तिकड़म लगाकर अपनी सीट बचाकर रखी। हालांकि अब फिर से चुनाव की तैयारी शुरू हो गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा ब्लॉक प्रमुख को लेकर भी काफी घमासान देखने को मिलेगा।
विज्ञापन