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कोरोना संक्रमितों में 50 फीसदी युवा व 35 फीसदी महिलाएं
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कोरोना संक्रमितों में 50 फीसदी युवा व 35 फीसदी महिलाएं
हापुड़(जतिन त्यागी)। जिले में कोरोना को मजाक समझने वाले युवा सचेत हों जाएं और गलत फहमी से भी बाहर निकलें। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस समय जिले में कुल संक्रमितों में 50 फीसदी मरीज युवा ही हैं। यह अलग बात है कि मृत्यु दर बुजुर्गों की ही सबसे अधिक है। महिला और बच्चों पर भी कोरोना का दुष्प्रभाव दिख रहा है।
जिले में कोरोना का पहला दो अप्रैल को सामने आया था। इसके बाद जिला प्रशासन की सख्ती से कुछ दिन के लिए कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी। लेकिन अचानक से मामलों में बढ़ोत्तरी होती गई। आलम यह है कि जैसे जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे ही कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। कोरोना की अभी तक वैक्सीन नहीं बन सकी है, ऐसे में इससे बचाव के लिए इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने की होड़ छीड़ी है। युवा खुद को बहुत शक्तिशाली समझ रहे हैं और कोरोना जैसे संक्रमण की गंभीरता को अनदेखा कर रहे हैं। लेकिन उनकी यह अनदेखी अब उन्हीं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल संक्रमित मरीजों के 50 फीसदी मरीज युवा/व्यस्क वर्ग से ही हैं।
हालांकि यह बात अलग है कि मृत्यु दर में अधिकांश बुजुर्ग ही शामिल हैं। लेकिन बड़ी बात यह है कि बुजुर्गों तक आखिर कोरोना का संक्रमण किस तरह पहुंचा। निश्चित ही घर के युवा ही बाहर आते जाते हैं, ऐसे में उन्हीं के जरिये संक्रमण घरों तक पहुंच रहा है। युवाओं को सचेत होने की आवश्यकता है। क्योंकि वह खुद ही अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए घर के बुजुर्ग और बच्चों को इस वायरस की चपेट में आने से बचा सकते हैं।
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- जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की आंकड़ा-
बच्चे महिला व्यस्क बुजुर्ग
58 363 513 91
संक्रमितों की स्थिति प्रतिशत में
बच्चे - 5.65 फीसदी
महिला - 35.41 फीसदी
व्यस्क - 50.05 फीसदी
बुजुर्ग - 8.87 फीसदी
(नोट : जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1025 है)
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.रेखा शर्मा ने बताया कि कोरोना को लेकर खासकर युवा सचेेेत रहें और अपने स्वस्थ के साथ ही अपने परिजनों का भी ख्याल रखें। क्योंकि जिनकी इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर है, उसे कोरोना से अधिक खतरा है।
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हापुड़(जतिन त्यागी)। जिले में कोरोना को मजाक समझने वाले युवा सचेत हों जाएं और गलत फहमी से भी बाहर निकलें। क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस समय जिले में कुल संक्रमितों में 50 फीसदी मरीज युवा ही हैं। यह अलग बात है कि मृत्यु दर बुजुर्गों की ही सबसे अधिक है। महिला और बच्चों पर भी कोरोना का दुष्प्रभाव दिख रहा है।
जिले में कोरोना का पहला दो अप्रैल को सामने आया था। इसके बाद जिला प्रशासन की सख्ती से कुछ दिन के लिए कोरोना की रफ्तार धीमी पड़ी। लेकिन अचानक से मामलों में बढ़ोत्तरी होती गई। आलम यह है कि जैसे जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे ही कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। कोरोना की अभी तक वैक्सीन नहीं बन सकी है, ऐसे में इससे बचाव के लिए इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने की होड़ छीड़ी है। युवा खुद को बहुत शक्तिशाली समझ रहे हैं और कोरोना जैसे संक्रमण की गंभीरता को अनदेखा कर रहे हैं। लेकिन उनकी यह अनदेखी अब उन्हीं के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में कुल संक्रमित मरीजों के 50 फीसदी मरीज युवा/व्यस्क वर्ग से ही हैं।
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हालांकि यह बात अलग है कि मृत्यु दर में अधिकांश बुजुर्ग ही शामिल हैं। लेकिन बड़ी बात यह है कि बुजुर्गों तक आखिर कोरोना का संक्रमण किस तरह पहुंचा। निश्चित ही घर के युवा ही बाहर आते जाते हैं, ऐसे में उन्हीं के जरिये संक्रमण घरों तक पहुंच रहा है। युवाओं को सचेत होने की आवश्यकता है। क्योंकि वह खुद ही अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए घर के बुजुर्ग और बच्चों को इस वायरस की चपेट में आने से बचा सकते हैं।
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- जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की आंकड़ा-
बच्चे महिला व्यस्क बुजुर्ग
58 363 513 91
संक्रमितों की स्थिति प्रतिशत में
बच्चे - 5.65 फीसदी
महिला - 35.41 फीसदी
व्यस्क - 50.05 फीसदी
बुजुर्ग - 8.87 फीसदी
(नोट : जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1025 है)
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.रेखा शर्मा ने बताया कि कोरोना को लेकर खासकर युवा सचेेेत रहें और अपने स्वस्थ के साथ ही अपने परिजनों का भी ख्याल रखें। क्योंकि जिनकी इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर है, उसे कोरोना से अधिक खतरा है।