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हापुड़ में डेंगू की रोकथाम करने में स्वास्थ्य विभाग की तैयारी अधूरी
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हापुड़ में डेंगू की रोकथाम करने में स्वास्थ्य विभाग की तैयारी अधूरी
हापुड़। डेंगू का मच्छर लोगों की सेहत पर जमकर कहर बरपा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तैयारी पूरी होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन अस्पतालों में सुविधा न के बराबर हैं। ऐसे में बुखार से तपे मरीज जनरल वार्डों में तड़प रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में न तो जांच के इंतजाम हैं और न ही बेहतर उपचार की सुविधा। निजी लैब भी संदिग्ध मरीजों में पुष्टि करने से बच रही हैं। अब तक सरकारी लैब तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि कर चुकी है।
डेंगू और मलेरिया जिले में हर साल कहर बरपाते हैं। स्वास्थ्य विभाग विभिन्न अभियान चलाकर मच्छर जनित रोगों से बचाव की तैयारी पूरी होने का दावा करता है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में जाकर अफसरों की तैयारी पूरी होने के दावों की सच्चाई देखी जा सकती है।
अस्पतालों में डेंगू की जांच के न तो कोई इंतजाम हैं और न ही बेहतर उपचार की सुविधा है। इन दिनों निजी, सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बुखार के मरीजों से फुल चल रही हैं। निजी अस्पताल मरीजों में डेंगू होने की पुष्टि अपने स्तर से नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य विभाग का भय है। यह लैब संदिग्ध मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को सौंपती हैं, जिनकी पुष्टि सरकारी लैब करती है। इसके बाद ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा रहा है।
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निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की मानें तो डेंगू का प्रकोप जबरदस्त है। बुखार के बहुत से मरीजों को उपचार डेंगू संबंधी ही दिया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की पुष्टि के आधार पर ही वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हैं। आलम यह है कि सरकारी लैब भी जिले के तीन मरीजों में अभी तक डेंगू की पुष्टि कर चुकी है।
साल दर साल डेंगू के मरीजों की स्थिति
वर्ष मरीजों की संख्या
2017 106
2018 51
2019 03
-डेंगू से बचाव के इंतजाम-
* घर ऑफिस के पास पानी जमा न होने दें।
* रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार अवश्य बदलें।
* डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, टंकी को अच्छी तरह से बंद कर रखें।
* खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोके।
* ऐसे कपड़े पहनें जिससे शरीर का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ढंका रहे।
-अधिकारी कहिन-
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.राजवीर सिंह का कहना है कि डेंगू का असर बीते वर्षों के मुकाबले कम है। क्योंकि पहले ही एंटी लार्वा अभियान चलाकर, मच्छर के लार्वा को नष्ट किया जा चुका है। मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है।
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हापुड़। डेंगू का मच्छर लोगों की सेहत पर जमकर कहर बरपा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तैयारी पूरी होने का दावा कर रहे हैं। लेकिन अस्पतालों में सुविधा न के बराबर हैं। ऐसे में बुखार से तपे मरीज जनरल वार्डों में तड़प रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में न तो जांच के इंतजाम हैं और न ही बेहतर उपचार की सुविधा। निजी लैब भी संदिग्ध मरीजों में पुष्टि करने से बच रही हैं। अब तक सरकारी लैब तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि कर चुकी है।
डेंगू और मलेरिया जिले में हर साल कहर बरपाते हैं। स्वास्थ्य विभाग विभिन्न अभियान चलाकर मच्छर जनित रोगों से बचाव की तैयारी पूरी होने का दावा करता है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में जाकर अफसरों की तैयारी पूरी होने के दावों की सच्चाई देखी जा सकती है।
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अस्पतालों में डेंगू की जांच के न तो कोई इंतजाम हैं और न ही बेहतर उपचार की सुविधा है। इन दिनों निजी, सरकारी अस्पतालों की ओपीडी बुखार के मरीजों से फुल चल रही हैं। निजी अस्पताल मरीजों में डेंगू होने की पुष्टि अपने स्तर से नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य विभाग का भय है। यह लैब संदिग्ध मरीजों के सैंपल स्वास्थ्य विभाग को सौंपती हैं, जिनकी पुष्टि सरकारी लैब करती है। इसके बाद ही रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जा रहा है।
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निजी अस्पतालों के चिकित्सकों की मानें तो डेंगू का प्रकोप जबरदस्त है। बुखार के बहुत से मरीजों को उपचार डेंगू संबंधी ही दिया जा रहा है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की पुष्टि के आधार पर ही वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करते हैं। आलम यह है कि सरकारी लैब भी जिले के तीन मरीजों में अभी तक डेंगू की पुष्टि कर चुकी है।
साल दर साल डेंगू के मरीजों की स्थिति
वर्ष मरीजों की संख्या
2017 106
2018 51
2019 03
-डेंगू से बचाव के इंतजाम-
* घर ऑफिस के पास पानी जमा न होने दें।
* रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार अवश्य बदलें।
* डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, टंकी को अच्छी तरह से बंद कर रखें।
* खिड़कियों और दरवाजों पर महीन जाली लगवाकर मच्छरों को घर में आने से रोके।
* ऐसे कपड़े पहनें जिससे शरीर का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा ढंका रहे।
-अधिकारी कहिन-
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.राजवीर सिंह का कहना है कि डेंगू का असर बीते वर्षों के मुकाबले कम है। क्योंकि पहले ही एंटी लार्वा अभियान चलाकर, मच्छर के लार्वा को नष्ट किया जा चुका है। मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है।