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खेत में जलाए गए फसलों के अवशेष
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खेत में जलाए गए फसलों के अवशेष
गढ़मुक्तेश्वर। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी वायु प्रदूषण कम नहीं हो रहा है। मंगलवार को एक खेत में फसलों के अवशेष जलाए गए। इससे लोगों में रोष है।
मेला रोड से कृष्णावाली मढैया को जाने वाले रास्ते पर एक खेत में फसल अवशेष जलाए गए, जिसके चलते वहां पर काफी देर तक धुएं के कारण लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ी। जबकि प्रदूषण की भरमार रोकने को एनजीटी ने फसलों के अवशेष जलाने के साथ ही इस बार दीपावली पर आतिशबाजी की बिक्री को भी रोक दिया है, लेकिन इसके बाद भी फसलों के अवशेष जलाने पर कोई भी रोक नहीं लग पा रही है। धुएं का गुबार उठने से गढ़-ब्रजघाट समेत देहात से जुड़े डेढ़ सौ गांवों में रहने वाले एलर्जी और अस्थमा के मरीजों को खुली हवा में सांस तक लेना दुश्वार हो रहा है।
एसडीएम विजयवर्धन तोमर का कहना है कि फसलों के अवशेष किसी भी रूप में जलाने नहीं दिए जाएंगे, जिस पर पूरी तरह रोक लगाने को हल्का लेखपालों समेत राजस्व कर्मियों से निगरानी कराकर किसानों को जागरूक करने की मुहिम भी चलाई जाएगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी वायु प्रदूषण कम नहीं हो रहा है। मंगलवार को एक खेत में फसलों के अवशेष जलाए गए। इससे लोगों में रोष है।
मेला रोड से कृष्णावाली मढैया को जाने वाले रास्ते पर एक खेत में फसल अवशेष जलाए गए, जिसके चलते वहां पर काफी देर तक धुएं के कारण लोगों को दिक्कत झेलनी पड़ी। जबकि प्रदूषण की भरमार रोकने को एनजीटी ने फसलों के अवशेष जलाने के साथ ही इस बार दीपावली पर आतिशबाजी की बिक्री को भी रोक दिया है, लेकिन इसके बाद भी फसलों के अवशेष जलाने पर कोई भी रोक नहीं लग पा रही है। धुएं का गुबार उठने से गढ़-ब्रजघाट समेत देहात से जुड़े डेढ़ सौ गांवों में रहने वाले एलर्जी और अस्थमा के मरीजों को खुली हवा में सांस तक लेना दुश्वार हो रहा है।
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एसडीएम विजयवर्धन तोमर का कहना है कि फसलों के अवशेष किसी भी रूप में जलाने नहीं दिए जाएंगे, जिस पर पूरी तरह रोक लगाने को हल्का लेखपालों समेत राजस्व कर्मियों से निगरानी कराकर किसानों को जागरूक करने की मुहिम भी चलाई जाएगी।
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