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रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ीं पालिका ईओ की बढ़ीं दिक्कतें
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रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ीं पालिका ईओ की बढ़ीं दिक्कतें
गढ़मुक्तेश्वर। रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ीं पालिका ईओ की दिक्कत थमने की बजाए लगातार बढ़ती जा रही हैं। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने चार्ज छीना और जिला प्रशासन ने निलंबन की सिफारिश कर शासन को पत्र भेजा।
ब्रजघाट ठेकेदार गौरव मिश्रा और उसके पिता से निर्माण कार्यों का 50 लाख का भुगतान दिलाने और उन्हें ब्लैक लिस्टेड न करने की आड़ में दस लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने 28 जून को गढ़ पालिका कार्यालय में ट्रैपिंग ऑपरेशन किया था। टीम इंचार्ज केपी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में पालिका ईओ अमिता वरुण, लिपिक अब्दुल और ठेकेदार भूपेंद्र सिंह निवासी बहजोई जनपद संभल को आरोपी बनाया गया है, जिनमें भूपेंद्र पर रिश्वत के तौर पर ठेकेदार गौरव मिश्रा द्वारा मुहैया कराई गई चार लाख की रकम लेकर फरार होने का आरोप लगाया गया है। करीब 18 दिन बाद भी आरोपी भूपेंद्र की धरपकड़ नहीं हो पाई है, जबकि ईओ भी फिलहाल कानून के शिकंजे से दूर हैं। रिश्वत मांगने के केस को अपने खिलाफ गहरी साजिश और एंटी करप्शन विभाग द्वारा आरोपी बनाए गए ठेकेदार भूपेंद्र से कोई भी वास्ता न होने का उल्लेख कर ईओ ने मेरठ की एंटी करप्शन कोर्ट द्वितीय में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी, जिसका ठेकेदार गौरव मिश्रा के वकील आस मोहम्मद द्वारा पुरजोर विरोध किए जाने पर एंटी करप्शन अदालत के जज पंकज मिश्रा ने 11 जुलाई को खारिज कर दिया था। अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद ईओ की दिक्कत लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि पालिका परिषद से जुड़े विकास और जनहित के कामों को सुचारु रखने के मकसद से नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार सिंह ने ईओ अमिता वरुण का कार्यभार छीन लिया है। वहीं जिला प्रशासन ने ईओ के निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजने के साथ ही वैकल्पिक तौर पर ईओ का चार्ज गढ़ एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी को सौंप दिया है। ठेकेदार गौरव मिश्रा ने बताया कि मेरठ कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में भी कैवियट दायर कर दी है, जबकि हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर ईओ के निलंबन की गुहार भी की गई है।
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गढ़मुक्तेश्वर। रिश्वतखोरी के मामले से जुड़ीं पालिका ईओ की दिक्कत थमने की बजाए लगातार बढ़ती जा रही हैं। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने चार्ज छीना और जिला प्रशासन ने निलंबन की सिफारिश कर शासन को पत्र भेजा।
ब्रजघाट ठेकेदार गौरव मिश्रा और उसके पिता से निर्माण कार्यों का 50 लाख का भुगतान दिलाने और उन्हें ब्लैक लिस्टेड न करने की आड़ में दस लाख की रिश्वत मांगने के आरोप में मेरठ की एंटी करप्शन टीम ने 28 जून को गढ़ पालिका कार्यालय में ट्रैपिंग ऑपरेशन किया था। टीम इंचार्ज केपी सिंह द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट में पालिका ईओ अमिता वरुण, लिपिक अब्दुल और ठेकेदार भूपेंद्र सिंह निवासी बहजोई जनपद संभल को आरोपी बनाया गया है, जिनमें भूपेंद्र पर रिश्वत के तौर पर ठेकेदार गौरव मिश्रा द्वारा मुहैया कराई गई चार लाख की रकम लेकर फरार होने का आरोप लगाया गया है। करीब 18 दिन बाद भी आरोपी भूपेंद्र की धरपकड़ नहीं हो पाई है, जबकि ईओ भी फिलहाल कानून के शिकंजे से दूर हैं। रिश्वत मांगने के केस को अपने खिलाफ गहरी साजिश और एंटी करप्शन विभाग द्वारा आरोपी बनाए गए ठेकेदार भूपेंद्र से कोई भी वास्ता न होने का उल्लेख कर ईओ ने मेरठ की एंटी करप्शन कोर्ट द्वितीय में अग्रिम जमानत की अर्जी दायर की थी, जिसका ठेकेदार गौरव मिश्रा के वकील आस मोहम्मद द्वारा पुरजोर विरोध किए जाने पर एंटी करप्शन अदालत के जज पंकज मिश्रा ने 11 जुलाई को खारिज कर दिया था। अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद ईओ की दिक्कत लगातार बढ़ती जा रही हैं, क्योंकि पालिका परिषद से जुड़े विकास और जनहित के कामों को सुचारु रखने के मकसद से नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनीष कुमार सिंह ने ईओ अमिता वरुण का कार्यभार छीन लिया है। वहीं जिला प्रशासन ने ईओ के निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को रिपोर्ट भेजने के साथ ही वैकल्पिक तौर पर ईओ का चार्ज गढ़ एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी को सौंप दिया है। ठेकेदार गौरव मिश्रा ने बताया कि मेरठ कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में भी कैवियट दायर कर दी है, जबकि हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर ईओ के निलंबन की गुहार भी की गई है।
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