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गंगा द्वार पर बना 9 लाख का खड़ंजा, तीन दिन में टूटा
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गंगा द्वार पर बना 9 लाख का खड़ंजा, तीन दिन में टूटा
गढ़मुक्तेश्वर। कार्तिक पूर्णिमा मेले को लेकर कमिश्नर के आदेश पर गंगा द्वार पर होने वाले जलभराव से निजात के लिए पालिका द्वारा 9 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा गया था। लेकिन ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री लगाने के कारण मेले के समापन से पहले ही खड़ंजा क्षतिग्रस्त होना शुरू हो गया है। लाखों की लागत से बने 60 मीटर की सड़क का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
कार्तिक पूर्णिमा मेले की तैयारियों को लेकर कमिश्नर सेल्वा कुमारी ने मेला स्थल का निरीक्षण किया था। जिसके बाद वहां से लौटने के दौरान उन्होंने मेला रोड पर जलभराव की असलियत जानने के पैदल चलकर भ्रमण किया था। जिसके बाद कमिश्नर ने पालिका अधिकारियों को निर्देशित कर जलभराव से निजात के लिए आदेश दिए थे। जिसको लेकर नगर पालिका द्वारा वहां पर करीब डेढ़ फीट ऊंचा खड़ंजा बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया। जिसमें ठेकेदार ने 9 लाख रुपये में मेला मार्ग पर गंगा द्वार के पास 60 मीटर लंबा खड़ंजा तो तैयार कर दिया, लेकिन वह तीन दिन में ही क्षतिग्रस्त हो गया। बता दें कि यह मेले का मुख्य मार्ग है, जहां खड़ंजा टूटना शुरू हो गया है। खड़ंजे में लगी ईंट निकलकर वाहनों में लग रही है, जिससे वहां से निकलने वाले वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी के भराव और ईंटों को लगाकर खड़ंजा तैयार कर दिया। कही भी सीमेंट का कार्य नहीं हुआ है। जिसके कारण नौ लाख रुपये से बना खड़ंजा रास्ते में दिक्कत बन रहा है।
नगर पालिका ईओ संजीवनराम यादव का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में कोई खामी पाई जाती है, तो ठेकेदार पर भी कार्रवाई होगी।
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गढ़मुक्तेश्वर। कार्तिक पूर्णिमा मेले को लेकर कमिश्नर के आदेश पर गंगा द्वार पर होने वाले जलभराव से निजात के लिए पालिका द्वारा 9 लाख रुपये का टेंडर छोड़ा गया था। लेकिन ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री लगाने के कारण मेले के समापन से पहले ही खड़ंजा क्षतिग्रस्त होना शुरू हो गया है। लाखों की लागत से बने 60 मीटर की सड़क का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
कार्तिक पूर्णिमा मेले की तैयारियों को लेकर कमिश्नर सेल्वा कुमारी ने मेला स्थल का निरीक्षण किया था। जिसके बाद वहां से लौटने के दौरान उन्होंने मेला रोड पर जलभराव की असलियत जानने के पैदल चलकर भ्रमण किया था। जिसके बाद कमिश्नर ने पालिका अधिकारियों को निर्देशित कर जलभराव से निजात के लिए आदेश दिए थे। जिसको लेकर नगर पालिका द्वारा वहां पर करीब डेढ़ फीट ऊंचा खड़ंजा बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया। जिसमें ठेकेदार ने 9 लाख रुपये में मेला मार्ग पर गंगा द्वार के पास 60 मीटर लंबा खड़ंजा तो तैयार कर दिया, लेकिन वह तीन दिन में ही क्षतिग्रस्त हो गया। बता दें कि यह मेले का मुख्य मार्ग है, जहां खड़ंजा टूटना शुरू हो गया है। खड़ंजे में लगी ईंट निकलकर वाहनों में लग रही है, जिससे वहां से निकलने वाले वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी के भराव और ईंटों को लगाकर खड़ंजा तैयार कर दिया। कही भी सीमेंट का कार्य नहीं हुआ है। जिसके कारण नौ लाख रुपये से बना खड़ंजा रास्ते में दिक्कत बन रहा है।
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नगर पालिका ईओ संजीवनराम यादव का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में कोई खामी पाई जाती है, तो ठेकेदार पर भी कार्रवाई होगी।
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