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Hapur News: दरगाही बाबा की समाधि पर लगा मेला, जुटी हजारों की भीड़
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लिसाड़ी मेले में मौजूद श्रद्धालु और पुलिसकर्मी। संवाद
सिंभावली। गांव लिसाड़ी में दरगाही बाबा की समाधि पर लगे मेले में आखिरी दिन उमड़ी महिला बच्चों के साथ हजारों भक्तों की भीड़ ने मन्नत मांगी। मनोरजन के साधनों में हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ने के साथ ही जमकर बिक्री भी हुई।
इससे दुकानदारों के चेहरों पर भी रौनक दिखाई दी। दरगाही बाबा की समाधि पर चल रहे वसंत कालीन मेले का सोमवार को समापन हो गया। समापन पर महंत डॉ. देवेश्वरानंद ने दरगाही बाबा की समाधि पर पहुंचने वालों से पूजा अर्चना कराई।
आखिरी दिन महिला बच्चों और आसपास के राज्यों के हजारों भक्तों ने बाबा की समाधि पर मत्था टेकने के बाद चादरपोशी करते हुए परिवार में खुशहाली, कारोबार में बढ़ोतरी, सुख शांति, बच्चों की तरक्की जैसी मनौती मांगीं।
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मेले के आखिरी दिन झूला सर्कस व अन्य मनोरंजन के साधनों में दर्शकों का तांता लगा रहा, जबकि परंपरागत मिठाइयों, घरेलू उपयोग के सामान की भी जमकर बिक्री हुई। महंत डॉ. देवेश्वरानंद ने बताया कि करीब तीन सौ साल से चली आ रही मान्यता के अनुसार मुगल बादशाह शाह आलम द्वारा बनवाई गई दरगाही बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाकर मन्नत मांगने से सुख शांति आती है।
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इससे दुकानदारों के चेहरों पर भी रौनक दिखाई दी। दरगाही बाबा की समाधि पर चल रहे वसंत कालीन मेले का सोमवार को समापन हो गया। समापन पर महंत डॉ. देवेश्वरानंद ने दरगाही बाबा की समाधि पर पहुंचने वालों से पूजा अर्चना कराई।
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आखिरी दिन महिला बच्चों और आसपास के राज्यों के हजारों भक्तों ने बाबा की समाधि पर मत्था टेकने के बाद चादरपोशी करते हुए परिवार में खुशहाली, कारोबार में बढ़ोतरी, सुख शांति, बच्चों की तरक्की जैसी मनौती मांगीं।
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मेले के आखिरी दिन झूला सर्कस व अन्य मनोरंजन के साधनों में दर्शकों का तांता लगा रहा, जबकि परंपरागत मिठाइयों, घरेलू उपयोग के सामान की भी जमकर बिक्री हुई। महंत डॉ. देवेश्वरानंद ने बताया कि करीब तीन सौ साल से चली आ रही मान्यता के अनुसार मुगल बादशाह शाह आलम द्वारा बनवाई गई दरगाही बाबा की समाधि पर चादर चढ़ाकर मन्नत मांगने से सुख शांति आती है।