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Hapur News: धौलाना में कृषि भूमि घोटाला रोकने के लिए सात बार भेजे थे पत्र
Fri, 23 Aug 2024 10:13 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 23 Aug 2024 10:13 PM IST
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हापुड़। धौलाना तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर धारा-80 (भू-उपयोग परिवर्तन) के मामलों में बड़े खेल किए हैं। इसे रोकने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने सात बार पत्र लिखे थे, लेकिन धौलाना तहसील के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। धारा-80 के 169 मामलों में जवाब देने के बाद भी तहसील के अधिकारियों ने प्राधिकरण की तरफ से नामित अधिवक्ता को सत्यापित प्रतिलिपि नहीं दी।
विधायक धर्मेश तोमर की शिकायत के बाद धौलाना तहसील में जमीनों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर जांच चल रही है। यह जांच अब अंतिम पड़ाव पर है। अधिकारी दो दिन बाद मंडलायुक्त व शासन को अपनी जांच सौपेंगे। इस जांच को लेकर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव ने भी जांच टीम को एक पत्र सौंपा है। जिसमें बताया गया है कि प्राधिकरण की तरफ से नामित अधिवक्ता ने फरवरी में एसडीएम को एक पत्र लिखा था। जिसमें बताया गया था कि उनके न्यायालय में लंबित धारा-80 यूपीआरसी के वादों के संबंध में 41 वादों में जवाब बजरिये डाक व 128 वाद में स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर प्राप्त कराए गए, लेकिन वादों के जवाब की सत्यापित प्रति काफी समय से नहीं मिल रही है।
एक या दो दिन पहले भेजते थे सूचना
ग्रेनो औद्योगिक विकास प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी रजनीकांत ने 24 जनवरी और रामनयन सिंह ने 13 मई व सात अगस्त और सौम्य श्रीवास्तव ने 23 दिसंबर को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि धारा-80 के सूचना पत्र डाक के माध्यम से नियत तिथि के उपरांत प्राप्त हो रहे हैं। इस प्रकार विलंब से प्राप्त हुए प्रकरणों में सूचनापत्र नियत तिथि से एक या दो दिन पूर्व प्राप्त कराए गए हैं, इस कारण प्राधिकरण अपना पक्ष सही प्रकार से नहीं रख पा रहा था। यही कारण था कि जमीनों की धारा-80 करते समय एकपक्षीय आदेश पारित हो रहे थे। इससे प्राधिकरण की भविष्य में महायोजना प्रभावित हो रही थी। इसमें रावली, भोवापुर, धौलाना, दौलतपुर, मदापुर मुस्ताफाबाद, नंदपुर, कंदौला, करनपुर जट्ट, हावल गांवों के मामले शामिल थे। इन गांवों में भूमि के दाम धारा-80 होने के बाद कई गुना बढ़े हैं।
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अधिकारियों को बचाने में जुटे सफेदपोश--
जब से मामले की जांच शुरू हुई है। भाजपा में ही गुटबाजी चर्म सीमा पर बढ़ गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधायक धर्मेश तोमर और दूसरा गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक गुट तत्कालीन तहसील अधिकारी व जिले के एक उच्च अधिकारी को बचाने में जुटा है तो विधायक मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बचाव वाला गुट और पश्चिम क्षेत्र के एक बड़े नेता ने मामले में लखनऊ तक सिफारिश की है।
कोट -
मंडलायुक्त से कुछ बिंदुओं पर चर्चा हुई है। दो दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट दे देंगे। ग्रेनो के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी से जांच संबंधी कुछ बिंदु पर जवाब मांगा गया था। जिस पर उन्होंने पत्र में बताया है कि धारा-80 के मामलों में सूचना देरी से मिल रही थी। जिस कारण प्राधिकरण अपना पक्ष सही प्रकार से नहीं रख पा रहा था। - जसजीत कौर, अपर आयुक्त व जांच अधिकारी
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विधायक धर्मेश तोमर की शिकायत के बाद धौलाना तहसील में जमीनों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर जांच चल रही है। यह जांच अब अंतिम पड़ाव पर है। अधिकारी दो दिन बाद मंडलायुक्त व शासन को अपनी जांच सौपेंगे। इस जांच को लेकर ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव ने भी जांच टीम को एक पत्र सौंपा है। जिसमें बताया गया है कि प्राधिकरण की तरफ से नामित अधिवक्ता ने फरवरी में एसडीएम को एक पत्र लिखा था। जिसमें बताया गया था कि उनके न्यायालय में लंबित धारा-80 यूपीआरसी के वादों के संबंध में 41 वादों में जवाब बजरिये डाक व 128 वाद में स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर प्राप्त कराए गए, लेकिन वादों के जवाब की सत्यापित प्रति काफी समय से नहीं मिल रही है।
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एक या दो दिन पहले भेजते थे सूचना
ग्रेनो औद्योगिक विकास प्राधिकरण के विशेष कार्याधिकारी रजनीकांत ने 24 जनवरी और रामनयन सिंह ने 13 मई व सात अगस्त और सौम्य श्रीवास्तव ने 23 दिसंबर को पत्र लिखा था। पत्र में कहा गया था कि धारा-80 के सूचना पत्र डाक के माध्यम से नियत तिथि के उपरांत प्राप्त हो रहे हैं। इस प्रकार विलंब से प्राप्त हुए प्रकरणों में सूचनापत्र नियत तिथि से एक या दो दिन पूर्व प्राप्त कराए गए हैं, इस कारण प्राधिकरण अपना पक्ष सही प्रकार से नहीं रख पा रहा था। यही कारण था कि जमीनों की धारा-80 करते समय एकपक्षीय आदेश पारित हो रहे थे। इससे प्राधिकरण की भविष्य में महायोजना प्रभावित हो रही थी। इसमें रावली, भोवापुर, धौलाना, दौलतपुर, मदापुर मुस्ताफाबाद, नंदपुर, कंदौला, करनपुर जट्ट, हावल गांवों के मामले शामिल थे। इन गांवों में भूमि के दाम धारा-80 होने के बाद कई गुना बढ़े हैं।
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अधिकारियों को बचाने में जुटे सफेदपोश
जब से मामले की जांच शुरू हुई है। भाजपा में ही गुटबाजी चर्म सीमा पर बढ़ गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, विधायक धर्मेश तोमर और दूसरा गुट आमने-सामने आ गए हैं। एक गुट तत्कालीन तहसील अधिकारी व जिले के एक उच्च अधिकारी को बचाने में जुटा है तो विधायक मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। बचाव वाला गुट और पश्चिम क्षेत्र के एक बड़े नेता ने मामले में लखनऊ तक सिफारिश की है।
कोट -
मंडलायुक्त से कुछ बिंदुओं पर चर्चा हुई है। दो दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट दे देंगे। ग्रेनो के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी से जांच संबंधी कुछ बिंदु पर जवाब मांगा गया था। जिस पर उन्होंने पत्र में बताया है कि धारा-80 के मामलों में सूचना देरी से मिल रही थी। जिस कारण प्राधिकरण अपना पक्ष सही प्रकार से नहीं रख पा रहा था। - जसजीत कौर, अपर आयुक्त व जांच अधिकारी