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Hapur News: बच्ची का मेरठ में होगा प्रसव, हापुड़ में नहीं सुविधा
Fri, 30 Aug 2024 11:25 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Fri, 30 Aug 2024 11:25 PM IST
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हापुड़। बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के गांव में रिश्ते के दादा की हैवानियत का शिकार 13 वर्षीय मासूम का मेरठ में अगले महीने प्रसव होगा। बच्ची का हीमोग्लोबिन सिर्फ आठ जीएम है, भ्रूण जीवित है और प्रसव जोखिमपूर्ण है। सीएमओ ने दो स्त्री रोग विशेषज्ञ के पैनल की निगरानी में जीवनरक्षक उपकरणों के साथ प्रसव की प्रक्रिया अपनाने की रिपोर्ट दी है।
दरअसल, हापुड़ के सरकारी अस्पतालों में ओटी और इमरजेंसी की व्यवस्था सुचारू नहीं है। जिले में कोई सर्जन भी नहीं है, स्त्री रोग विशेषज्ञ भी सिर्फ एक है। रक्त की व्यवस्था का भी उचित विकल्प नहीं है। कोर्ट ने बच्ची के प्रसव के संबंध में सीएमओ से रिपोर्ट मांगी थी। जांच के उपरांत पता चला कि बच्ची के शरीर में खून की बेहद कमी है।
हीमोग्लोबिन का स्तर महज आठ जीएम है, जिसमें सिजेरियन या सामान्य प्रसव कराना खतरनाक है। बच्ची की लंबाई भी कम है, ऐसे में उसका प्रसव बेहद जोखिमपूर्ण है। मेरठ मेडिकल में प्रसव कराना सुविधाजनक माना गया। सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि बच्ची का प्रसव दो स्त्री रोग विशेषज्ञों के पैनल में होना सुरक्षित है। साथ ही ओटी और आपात वार्ड की उचित व्यवस्था भी प्रसव के दौरान जरूरी है। ऐसे में अब बच्ची का प्रसव हापुड़ में नहीं हो सकेगा।
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यह था मामला-
बच्ची के मां और पिता की मौत के बाद पीड़िता और उसके भाई को नौ साल पहले पिता का फूफा अपने साथ ले आया था। दो साल पहले आरोपी की पत्नी का निधन हो गया। जिसके बाद से रिश्ते के दादा ने 13 साल की बच्ची को अपनी हैवानियत का शिकार बनाना शुरू किया। डरा धमकाकर दो साल तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। बच्ची गर्भवती हो गई, जिस पर आरोपी बच्ची को उसके ताऊ के घर छोड़कर चला गया। अल्ट्रासाउंड के दौरान गर्भ का पता चलाने पर संबंधित थाने में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। काउंसलिंग में बच्ची ने आरोपी की हैवानियत का खुलासा किया।
कोट -पीड़ित अब आठ महीने से अधिक की गर्भवती है, सुरक्षित प्रसव के लिए मेरठ मेडिकल सही होगा। दो स्त्री रोग विशेषज्ञ का पैनल जरूरी है। पूरी रिपोर्ट से न्यायालय को अवगत करा दिया गया है।-- डॉ.सुनील त्यागी, सीएमओ।
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दरअसल, हापुड़ के सरकारी अस्पतालों में ओटी और इमरजेंसी की व्यवस्था सुचारू नहीं है। जिले में कोई सर्जन भी नहीं है, स्त्री रोग विशेषज्ञ भी सिर्फ एक है। रक्त की व्यवस्था का भी उचित विकल्प नहीं है। कोर्ट ने बच्ची के प्रसव के संबंध में सीएमओ से रिपोर्ट मांगी थी। जांच के उपरांत पता चला कि बच्ची के शरीर में खून की बेहद कमी है।
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हीमोग्लोबिन का स्तर महज आठ जीएम है, जिसमें सिजेरियन या सामान्य प्रसव कराना खतरनाक है। बच्ची की लंबाई भी कम है, ऐसे में उसका प्रसव बेहद जोखिमपूर्ण है। मेरठ मेडिकल में प्रसव कराना सुविधाजनक माना गया। सीएमओ ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि बच्ची का प्रसव दो स्त्री रोग विशेषज्ञों के पैनल में होना सुरक्षित है। साथ ही ओटी और आपात वार्ड की उचित व्यवस्था भी प्रसव के दौरान जरूरी है। ऐसे में अब बच्ची का प्रसव हापुड़ में नहीं हो सकेगा।
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यह था मामला-
बच्ची के मां और पिता की मौत के बाद पीड़िता और उसके भाई को नौ साल पहले पिता का फूफा अपने साथ ले आया था। दो साल पहले आरोपी की पत्नी का निधन हो गया। जिसके बाद से रिश्ते के दादा ने 13 साल की बच्ची को अपनी हैवानियत का शिकार बनाना शुरू किया। डरा धमकाकर दो साल तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। बच्ची गर्भवती हो गई, जिस पर आरोपी बच्ची को उसके ताऊ के घर छोड़कर चला गया। अल्ट्रासाउंड के दौरान गर्भ का पता चलाने पर संबंधित थाने में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। काउंसलिंग में बच्ची ने आरोपी की हैवानियत का खुलासा किया।
कोट -पीड़ित अब आठ महीने से अधिक की गर्भवती है, सुरक्षित प्रसव के लिए मेरठ मेडिकल सही होगा। दो स्त्री रोग विशेषज्ञ का पैनल जरूरी है। पूरी रिपोर्ट से न्यायालय को अवगत करा दिया गया है।