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Hapur News: दो दिन तक अस्पताल में जिंदगी से जूझता रहा दीपक, परिजनों का इलाज में लापरवाही का आरोप
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मृतक दीपक उर्फ़ गोलू का फाइल फ़ोटो
हापुड़। दीपक की मौत के मामले में परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। परिजनों का आरोप था कि दीपक दो दिन से मेरठ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती था, लेकिन उसे सही इलाज नहीं मिला। उसका लगातार खून बह रहा था और उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। जिसके कारण रविवार को उसकी मौत हो गई। सही इलाज मिलता तो शायद दीपक की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि पुलिस प्रशासन ने परिजनों के आरोपों का खंडन किया है। वहीं, दीपक की मौत के बाद अब परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
दीपक के पिता बच्चू सिंह मजदूरी करते थे, लेकिन अब वह दिल के मरीज हैं और घर पर ही रहते हैं। दीपक के अलावा उसके परिवार में मां बीला, छोटा भाई सरदार उर्फ शेरू के अलावा तीन छोटी बहनें शामिल हैं। दीपक पैंठ में कपड़ा बेचने का कार्य करता था और परिवार में अकेला कमाने वाला था। दीपक की मौत से परिवार में कोहराम मचा था। जैसे ही शव गांव में पहुंचा तो परिजनों और कुछ युवाओं ने आरोप लगाया कि दीपक के इलाज में लापरवाही बरती गई है। हालांकि एएसपी डॉ. विनीत भटनागर ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे दो दिन दीपक के साथ मेडिकल में ही रहे और लगातार बेहतर चिकित्सकों से उसका इलाज कराया। गोली शरीर से निकलने को लेकर भी जमकर कहासुनी हुई। लोग दीपक के अंदर गोली होने की बात कह रहे थे, जबकि एएसपी ने कहा कि गोली को ऑपरेशन कर निकाल दिया गया था।
बेखौफ से आरोपी, सौ कदम दूर से झोंके फायर--
गम और गुस्से के बीच ग्रामीणों ने शुक्रवार को हुई घटना के दौरान आरोपियों की बेखौफ और दुष्साहसिक करतूत के बारे में बताया। गांव निवासी ब्रह्मपाल ने बताया कि घटना के दिन आरोपी लाठी-डंडों के अलावा अवैध असलहा लेकर यहां पहुंचे और हमला बोल दिया। इस दौरान आरोपियों ने पूरी गली को घेर लिया और करीब मात्र सौ कदम की दूरी से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस दौरान बाकी के अलावा दीपक को सीधे गोली सीने में लगी और वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद भी आरोपी फायरिंग और पथराव करते रहे। पुलिस के आने की सूचना पर ही आरोपी फरार हुए। ग्रामीणों ने बताया कि घटना के दौरान पीड़ित पक्ष और आसपास के लोगों ने अपने घरों के दरवाजों को बंद कर खुद की जान बचाई।
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ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी--
घटना को लेकर पुलिस को पहले ही आशंका थी कि ग्रामीण हंगामा कर सकते हैं। इसके लिए पुलिस ने पहले ही अपनी तैयारी कर ली थी। पुलिस ने गांव के संबंधित रास्तों पर शनिवार को ही सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे। जिसकी निगरानी कंट्रोल रूम से लगातार की जा रही थी। इसके अलावा पूरे घटनाक्रम पर लगातार ड्रोन से नजर रखी जा रही थी। पूरे हंगामे के दौरान पुलिस का ड्रोन आसमान में मंडराता हुआ नजर आया।
सोशल मीडिया पर गांव पहुंचने के आह्वान से पुलिस की अटकी सांसें-- रविवार सुबह दीपक की मौत की खबर फैलते ही कुछ युवकों ने जातीय संघर्ष में मौत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। इस दौरान अनुसूचित जाति के युवकों को अधिक से अधिक संख्या में गांव बदनौली पहुंचने का आह्वान किया गया। इस प्रकार की पोस्टों को देखकर पुलिस में हड़कंप मच गया और बदनौली में पीड़ित के मकान की ओर जाने वाले रास्ते और मुख्य मार्ग पर भी बैरिकेडिंग कर दी गई। शव आने से पहले करीब 12 बजे बाइकों पर सवार कुछ युवक हापुड़ से पहुंचे और रोके जाने पर हंगामा कर दिया। पुलिस ने बमुश्किल उन्हें रोककर वापस भेजा। हालांकि पुलिस के रोके जाने के बावजूद कुछ युवक चोरी छिपे दूसरे रास्तों से गांव तक पहुंच गए।
बदनौली पहुंचे बसपा और अन्य दलों के नेता
शव पहुंचने के बाद विभिन्न पार्टियों के नेता भी गांव पहुंच गए। बसपा के जिलाध्यक्ष एके कदर्म, मेरठ मंडल प्रभारी केपी सिंह के अलावा आसपा जिला प्रभारी वीरेंद्र सिरीश मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। दलित स्वाभिमान रक्षा संघर्ष वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल आजाद ने भी दलित परिवार पर इस हमले की निंदा की है।
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दीपक के पिता बच्चू सिंह मजदूरी करते थे, लेकिन अब वह दिल के मरीज हैं और घर पर ही रहते हैं। दीपक के अलावा उसके परिवार में मां बीला, छोटा भाई सरदार उर्फ शेरू के अलावा तीन छोटी बहनें शामिल हैं। दीपक पैंठ में कपड़ा बेचने का कार्य करता था और परिवार में अकेला कमाने वाला था। दीपक की मौत से परिवार में कोहराम मचा था। जैसे ही शव गांव में पहुंचा तो परिजनों और कुछ युवाओं ने आरोप लगाया कि दीपक के इलाज में लापरवाही बरती गई है। हालांकि एएसपी डॉ. विनीत भटनागर ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि वे दो दिन दीपक के साथ मेडिकल में ही रहे और लगातार बेहतर चिकित्सकों से उसका इलाज कराया। गोली शरीर से निकलने को लेकर भी जमकर कहासुनी हुई। लोग दीपक के अंदर गोली होने की बात कह रहे थे, जबकि एएसपी ने कहा कि गोली को ऑपरेशन कर निकाल दिया गया था।
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बेखौफ से आरोपी, सौ कदम दूर से झोंके फायर
गम और गुस्से के बीच ग्रामीणों ने शुक्रवार को हुई घटना के दौरान आरोपियों की बेखौफ और दुष्साहसिक करतूत के बारे में बताया। गांव निवासी ब्रह्मपाल ने बताया कि घटना के दिन आरोपी लाठी-डंडों के अलावा अवैध असलहा लेकर यहां पहुंचे और हमला बोल दिया। इस दौरान आरोपियों ने पूरी गली को घेर लिया और करीब मात्र सौ कदम की दूरी से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस दौरान बाकी के अलावा दीपक को सीधे गोली सीने में लगी और वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद भी आरोपी फायरिंग और पथराव करते रहे। पुलिस के आने की सूचना पर ही आरोपी फरार हुए। ग्रामीणों ने बताया कि घटना के दौरान पीड़ित पक्ष और आसपास के लोगों ने अपने घरों के दरवाजों को बंद कर खुद की जान बचाई।
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ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी
घटना को लेकर पुलिस को पहले ही आशंका थी कि ग्रामीण हंगामा कर सकते हैं। इसके लिए पुलिस ने पहले ही अपनी तैयारी कर ली थी। पुलिस ने गांव के संबंधित रास्तों पर शनिवार को ही सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए थे। जिसकी निगरानी कंट्रोल रूम से लगातार की जा रही थी। इसके अलावा पूरे घटनाक्रम पर लगातार ड्रोन से नजर रखी जा रही थी। पूरे हंगामे के दौरान पुलिस का ड्रोन आसमान में मंडराता हुआ नजर आया।
सोशल मीडिया पर गांव पहुंचने के आह्वान से पुलिस की अटकी सांसें
बदनौली पहुंचे बसपा और अन्य दलों के नेता
शव पहुंचने के बाद विभिन्न पार्टियों के नेता भी गांव पहुंच गए। बसपा के जिलाध्यक्ष एके कदर्म, मेरठ मंडल प्रभारी केपी सिंह के अलावा आसपा जिला प्रभारी वीरेंद्र सिरीश मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को सांत्वना दी। दलित स्वाभिमान रक्षा संघर्ष वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष अनिल आजाद ने भी दलित परिवार पर इस हमले की निंदा की है।