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बिजली के करंट से अपंग लाइमैन ने मांगी मौत
Updated Wed, 21 Feb 2018 12:00 AM IST
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करंट लगने से अपंग हुए लाइनमैन ने मांगी मौत
हापुड़। बिजली का करंट लगने से अपंग हुआ लाइनमैन ऊर्जा निगम की ओर से खास राहत न मिलने के कारण अपनी बूढ़ी मां के साथ दर-दर भटकने को मजबूर हो रहा है। इलाज में 13 लाख रुपये लगने के एवज में उसे सिर्फ 5.24 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। ऐसे में वह कर्जदारी में फंस गया है। मंगलवार को पीड़ित ने सीएम को पत्र भेजकर आत्महत्या की अनुमति मांगी है।
गांव सिमरौली निवासी योगेंद्र ने बताया कि वह वर्ष 2006 में बिजली निगम में संविदा लाइनमैन के पद पर तैनात था। 11 मई को जई ने उसे गांव बिगास में फाल्ट को दुरुस्त करने के लिए भेजा था, शट डाउन भी लिया गया था। मगर, अचानक लाइन में करंट दौड़ गया। इस कारण वह बुरी तरह झुलस गया, उपचार के दौरान उसके दोनों हाथ काट दिए गए। इलाज में अब तक 13 लाख रुपये से ज्यादा पैसा खर्च हो चुका है, लेकिन निगम की ओर से सिर्फ 5.24 लाख रुपये का ही मुआवजा मिला है। घर में उसकी बूढ़ी मां के अलावा कोई और कमाने वाला भी नहीं है। मंगलवार को पीड़ित योगेंद्र अपनी मां के साथ डीएम कार्यालय पहुंचा। उसने बताया कि इलाज में सारा पैसा खर्च हो गया है। वह कर्जदारी में डूबे हुए हैं। कहीं से भी आर्थिक मदद नहीं मिल रही है। बिजली निगम के अधिकारी कार्यालय से बाहर कर देते हैं।
उन्होंने सीएम को ज्ञापन भेजकर पेंशन व नौकरी दिलाने की मांग उठाई, साथ ही मांग पूरी न होने पर आत्महत्या की मंजूरी की भी गुहार लगाई है।
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हापुड़। बिजली का करंट लगने से अपंग हुआ लाइनमैन ऊर्जा निगम की ओर से खास राहत न मिलने के कारण अपनी बूढ़ी मां के साथ दर-दर भटकने को मजबूर हो रहा है। इलाज में 13 लाख रुपये लगने के एवज में उसे सिर्फ 5.24 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। ऐसे में वह कर्जदारी में फंस गया है। मंगलवार को पीड़ित ने सीएम को पत्र भेजकर आत्महत्या की अनुमति मांगी है।
गांव सिमरौली निवासी योगेंद्र ने बताया कि वह वर्ष 2006 में बिजली निगम में संविदा लाइनमैन के पद पर तैनात था। 11 मई को जई ने उसे गांव बिगास में फाल्ट को दुरुस्त करने के लिए भेजा था, शट डाउन भी लिया गया था। मगर, अचानक लाइन में करंट दौड़ गया। इस कारण वह बुरी तरह झुलस गया, उपचार के दौरान उसके दोनों हाथ काट दिए गए। इलाज में अब तक 13 लाख रुपये से ज्यादा पैसा खर्च हो चुका है, लेकिन निगम की ओर से सिर्फ 5.24 लाख रुपये का ही मुआवजा मिला है। घर में उसकी बूढ़ी मां के अलावा कोई और कमाने वाला भी नहीं है। मंगलवार को पीड़ित योगेंद्र अपनी मां के साथ डीएम कार्यालय पहुंचा। उसने बताया कि इलाज में सारा पैसा खर्च हो गया है। वह कर्जदारी में डूबे हुए हैं। कहीं से भी आर्थिक मदद नहीं मिल रही है। बिजली निगम के अधिकारी कार्यालय से बाहर कर देते हैं।
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उन्होंने सीएम को ज्ञापन भेजकर पेंशन व नौकरी दिलाने की मांग उठाई, साथ ही मांग पूरी न होने पर आत्महत्या की मंजूरी की भी गुहार लगाई है।