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मां के साथ स्नान करने आया किशोर गंगा में डूबा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 03 Jul 2019 12:00 AM IST
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मां के साथ स्नान करने आया किशोर गंगा में डूबा
मां के साथ गंगा स्नान करने आया किशोर डूबा, मौत
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गढ़मुक्तेश्वर। मां के साथ स्नान करने आए किशोर की ब्रजघाट गंगा में डूबकर मौत हो गई। मल्लाहों ने कड़ी मशक्कत के बाद शव खोज निकाला, जिसे देखते ही मां बेहोश होकर गिर पड़ी। सूचना पर आए गमजदा परिजन शव को अपने साथ ले गए।
हापुड़ के मेरठ गेट चौकी क्षेत्र में रहने वाले कांति की पत्नी सुधा अपने इकलौते बेटे चिराग 12 साल के साथ मंगलवार की सुबह आषाढ़ अमावस्या पर गंगा में डुबकी लगाने ब्रजघाट आईं थीं। सुधा और चिराग आरती स्थल के पास गंगा में डुबकी लगा रहे थे, तेज बहाव के साथ चिराग गहरे पानी में जाकर डूबने लगा। बेटे को डूबता देख सुधा ने शोर मचाया, जिसे सुनते ही किनारे पर नाव लेकर सवारियों की बाट जोह रहे दीपचंद, मुकेश, मोहन, गणेश समेत कई मल्लाहों ने गंगा में छलांग लगा दी। कुछ ही देर में चिराग गंगा में डूबकर आंखों से ओझल हो गया। मल्लाहों समेत पालिका गोताखोरों ने कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद गंगा में डूबे चिराग का शव खोज निकाला, जिसे देखते ही मां सुधा बेहोश होकर गिर पड़ी। जिसे मौके पर मौजूद लोग आनन फानन में स्थानीय चिकित्सक के पास ले गए, जहां इलाज के बाद होश आने पर उसने हादसे की खबर अपने परिजनों को दी। सूचना मिलते ही पुलिस भी गंगा किनारे पहुंच गई, लेकिन रोते बिलखते परिजन और रिश्तेदार किसी भी कार्रवाई के बिना बेहद गमगीन माहौल में चिराग का शव लेकर घर को लौट गए।
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मेरे जिगर के टुकड़े को कैसे भी बचा लो, 6 बहनों का इकलौता भाई है

गढ़मुक्तेश्वर। इकलौते बेटे के गंगा में डूबने के गम में सुधबुध खो बैठी मां घंटों तक जिगर के इकलौते टुकड़े को बचाने के लिए आसपास में मौजूद लोगों समेत इधर उधर गुहार लगाती रही।
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आषाढ़ अमावस्या के उपलक्ष्य में सुधा अपने इकलौते बेटे चिराग के साथ ब्रजघाट गंगा में आस्था की डुबकी लगाने आईं थीं, लेकिन उसे क्या पता था कि मोक्ष दायिनी गंगा मैया के किनारे से आज उसे बेटे की लाश लेकर घर को वापिस लौटना पड़ेगा। तेज बहाव के साथ गहरे पानी में जाकर चिराग गंगा में डूबने लगा तो सुधा की ममता जवाब दे गई। वह बेसुध होकर इधर उधर दौड़ लगाती हुई मेरे जिगर के टुकड़े को कैसे भी बचा लो की गुहार करती रही, लेकिन कुछ ही पलों में चिराग गंगा की लहरों के बीच डूबकर आंखों से ओझल हो चुका था। मल्लाहों समेत पालिका गोतखोरों ने कड़ी मशक्कत के बाद गंगा में डूबे अपने परिवार के इकलौते चिराग का शव बरामद किया तो उसकी मां पर मानो गम का पहाड़ सा टूट पड़ा। जिसके सदमे में वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी। होश आने पर सुधा बार बार यही रट लगा रही थी कि मेरे जिगर का टुकड़ा अपनी 6 बहनों का इकलौता भाई था, जो अब किसकी कलाई पर राखी बांधेंगी। इकलौते बेटे को खोने के सदमे में चूर एक मां का विलाप सुनकर आसपास में मौजूद गंगा भक्तों की भीड़ समेत हर किसी की आंखों से आंसू छलक उठे।
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