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तीन लाख बच्चों को अब नहीं सताएंगे जानलेवा रोग
ब्यूरो, अमर उजाला/ हापुड़
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:10 PM IST
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बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में 0 से 5 वर्ष आयु वाले करीब तीन लाख बच्चे जानलेवा बीमारियों से पूरी तरह प्रतिरक्षित हो चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। महज 20 फीसदी बच्चे टीकाकरण से वंचित हैं,
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इन बच्चों को विशेष सूची में दर्ज कर योजना बनाई जा रही है। धौलाना क्षेत्र के पांच गांवों में लोग बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं हो रहे हैं, यही कारण है कि इन गांवों के बच्चों पर रोग अधिक सक्रिय हैं।
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जिले में 0 से 5 वर्ष आयु वाले करीब 3.20 लाख बच्चे हैं। छोटे बच्चों में गलाघोटू, पीलिया, टिटनेश, दिमागी बुखार, निमोनिया, खसरा जैसे खतरनाक रोग सक्रिय रहते हैं। कई बार ये रोग बच्चों की जान तक भी ले लेते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अब जिले के नौहिहाल बीमारियों से पूरी तरह प्रतिरक्षित है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो जिले में 80 फीसदी बच्चों को जानलेवा बीमारी से बचाने वाले टीके लग चुके हैं।
भविष्य में इन बच्चों को खतरनाक रोगों से परेशान नहीं होना पड़ेगा। मुख्य बात यह है कि समूचे प्रदेश में हापुड़ टीकाकरण के मामले में शीर्ष 10 जिलों में अग्रणी स्थान पर है।
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि जिले में 80 फीसदी बच्चे पूर्ण प्रतिरक्षित हैं, इन बच्चों को सात जानलेवा बीमारी नहीं छू सकेंगी। धौलाना क्षेत्र में विशेष तैयारी के साथ बच्चों को प्रतिरक्षित किया जाएगा। उन्होंने लोगों से बच्चों का टीकाकरण कराने का आह्वान किया।
सामान्य टीकाकरण के दौरान जिले में करीब 12 हजार बच्चे ऐसे थे, जो झुग्गी, झोपड़ी, भट्ठे आदि पर रहने के कारण अक्सर टीकाकरण से वंचित रहते थे। वर्ष 2015 में मिशन इंद्रधनुष चलाया गया, इसमें ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उनका टीकाकरण किया गया।
जुलाई 2016 तक चले इस मिशन के तहत 8955 बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है। स्वास्थ्य अफसरों की मानें तो अब जिले में सिर्फ सामान्य टीकाकरण ही चलेगा, मिशन इंद्रधनुष जिले में नहीं चल सकेगा, क्योंकि यहां टीकाकरण की स्थिति संतोषजनक है।
धौलाना क्षेत्र के गांव खीचड़ा, पिपलेड़ा, ढोलक बस्ती, दहपा, बझैड़ा कला के लोग अपने बच्चों का टीकाकरण नहीं करा रहे हैं। यही कारण है इन गांवों में बच्चे अधिक बीमार पड़ रहे हैं।
इसी क्षेत्र की वजह से जिले में टीकाकरण अभियान पिछड़ रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य अफसरों ने यहां के लोगों को जागरूक करने के लिए यूनिसेफ को जिम्मेदारी सौंप दी है।