{"_id":"5e99caca8ebc3e6fd10029ee","slug":"bulandshahar-news-hapur-news-gbd197612512","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे हैं हापुड़ के दो चिकित्सक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे हैं हापुड़ के दो चिकित्सक
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना मरीजों की सेवा में जुटे हैं हापुड़ के दो चिकित्सक
हापुड़। कोठीगेट अस्पताल के प्रभारी और फार्मासिस्ट अपनी जान को हथेली पर रख बीते एक महीने से कोरोना संक्रमित मरीजों की देखरेख में जुटे हैं। 24 घंटे ड्यूटी पर अलर्ट रहने के साथ ही वह सर्वे को जाने वाली टीमों को भी तैयार करते हैं ताकि उनमें किसी तरह का संक्रमण नहीं लग सके। करीब 450 संदिग्धों को क्वांरिटीन करने के साथ ही पॉजिटिव मरीजों की देखभाल का भी जिम्मा उठा रहे हैं। कार्यालय को ही इन्होंने अपना घर बना लिया है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि चिकित्सकों को आखिर क्यों कोरोना योद्धाओं की संज्ञा दी गई है।
कोरोना के संक्रमण से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। आलम यह है कि इस वायरस की चर्चा मात्र से ही लोगों में दहशत फैलने लगी है। ऐसे में चिकित्सक किसी देवदूत से कम नहीं आंके जा सकते। करीब एक महीने पहले से हापुड़ में कोरोना से बचाव के इंतजाम शुरू कर दिए गए थे।
कोठीगेट अस्पताल के प्रभारी डा.योगेश गुप्ता व फार्मासिस्ट नीरज कुमार को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह दोनों चिकित्सक बीते एक महीने से 24 घंटे अपनी ड्यूटी दे रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक वह जिले को कोरोना संकट से बचाने में जुटे रहते हैं। बता दें कि अभी तक यह दोनों करीब 450 संदिग्धों को क्वारंटीन कर चुके हैं। ऐसे में कौन व्यक्ति संक्रमित हो और इनकी जान पर आफत बन जाए इसकी चिंता किए बगैर वह अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
विज्ञापन
इतना ही नहीं दोनों चिकित्सकों ने कार्यालय को ही अपना घर बना लिया है। संक्रमण परिवार तक न जाए इसके लिए वह एक महीने से घर भी नहीं गए। सिर्फ वीडियो कॉलिंग के जरिए परिजनों का हालचाल जान लेते हैं। जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की देखरेख में भी यह अपना पूर्ण सहयोग दे रहें हैं। आइसोलेशन वार्ड में भी इन्हें रोजाना जाना पड़ता है।
इसके अलावा सर्वे को जाने वाले करीब 150 कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी यही उठा रहे हैं। टीम के प्रत्येक सदस्य को सैनिटाइज करने के बाद उन्हें किटों से लैस करते हैं, ताकि किसी तरह का संक्रमण उनमें न फैल सके। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर चिकित्सकों को क्यों कोरोना योद्धाओं की संज्ञा दी गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.रेखा शर्मा व डिप्टी सीएमओ डा. जेपी त्यागी ने भी इन दोनों चिकित्सकों का हौसला बढ़ाया है। साथ ही कोरोना से बचाव में लगे चिकित्सकों व कर्मचारियों का भी उत्साह बढ़ाया है।
विज्ञापन
हापुड़। कोठीगेट अस्पताल के प्रभारी और फार्मासिस्ट अपनी जान को हथेली पर रख बीते एक महीने से कोरोना संक्रमित मरीजों की देखरेख में जुटे हैं। 24 घंटे ड्यूटी पर अलर्ट रहने के साथ ही वह सर्वे को जाने वाली टीमों को भी तैयार करते हैं ताकि उनमें किसी तरह का संक्रमण नहीं लग सके। करीब 450 संदिग्धों को क्वांरिटीन करने के साथ ही पॉजिटिव मरीजों की देखभाल का भी जिम्मा उठा रहे हैं। कार्यालय को ही इन्होंने अपना घर बना लिया है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि चिकित्सकों को आखिर क्यों कोरोना योद्धाओं की संज्ञा दी गई है।
कोरोना के संक्रमण से पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है। आलम यह है कि इस वायरस की चर्चा मात्र से ही लोगों में दहशत फैलने लगी है। ऐसे में चिकित्सक किसी देवदूत से कम नहीं आंके जा सकते। करीब एक महीने पहले से हापुड़ में कोरोना से बचाव के इंतजाम शुरू कर दिए गए थे।
विज्ञापन
कोठीगेट अस्पताल के प्रभारी डा.योगेश गुप्ता व फार्मासिस्ट नीरज कुमार को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह दोनों चिकित्सक बीते एक महीने से 24 घंटे अपनी ड्यूटी दे रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक वह जिले को कोरोना संकट से बचाने में जुटे रहते हैं। बता दें कि अभी तक यह दोनों करीब 450 संदिग्धों को क्वारंटीन कर चुके हैं। ऐसे में कौन व्यक्ति संक्रमित हो और इनकी जान पर आफत बन जाए इसकी चिंता किए बगैर वह अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
विज्ञापन
इतना ही नहीं दोनों चिकित्सकों ने कार्यालय को ही अपना घर बना लिया है। संक्रमण परिवार तक न जाए इसके लिए वह एक महीने से घर भी नहीं गए। सिर्फ वीडियो कॉलिंग के जरिए परिजनों का हालचाल जान लेते हैं। जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की देखरेख में भी यह अपना पूर्ण सहयोग दे रहें हैं। आइसोलेशन वार्ड में भी इन्हें रोजाना जाना पड़ता है।
इसके अलावा सर्वे को जाने वाले करीब 150 कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी यही उठा रहे हैं। टीम के प्रत्येक सदस्य को सैनिटाइज करने के बाद उन्हें किटों से लैस करते हैं, ताकि किसी तरह का संक्रमण उनमें न फैल सके। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आखिर चिकित्सकों को क्यों कोरोना योद्धाओं की संज्ञा दी गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डा.रेखा शर्मा व डिप्टी सीएमओ डा. जेपी त्यागी ने भी इन दोनों चिकित्सकों का हौसला बढ़ाया है। साथ ही कोरोना से बचाव में लगे चिकित्सकों व कर्मचारियों का भी उत्साह बढ़ाया है।