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पौराणिक मेले को मान्यता मिलने से जिला पंचायत से मेजबानी छिन सकती है------
Updated Thu, 21 Sep 2017 11:52 PM IST
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व्यापारियों को टैक्सों की मार से मिलेगी मुक्ति
- मेले को मान्यता मिलने से जिला पंचायत से छीन सकती है मेजबानी
इमरान अली
गढ़मुक्तेश्वर। खादर मेले को मान्यता मिलने से जिला पंचायत के हाथ से कमान छिन सकती है। वहीं, व्यापारियों-दुकानदारों को भारी भरकम टैक्स चुकाने से मुक्ति भी मिल जाएगी।
क्षेत्रीय विधायक कमल मलिक के अथक प्रयास से प्रदेश शासन ने उपेक्षित गढ़ खादर मेले को मान्यता दे दी है, जिससे मेला सरकारी होने पर अब जिला पंचायत को भी खजाना खर्च नहीं करना पड़ेगा। लेकिन ब्रिटिश शासन काल से चली आ रही परंपरा टूटने की संभावना है। मेला सरकारी होने के बाद इसके आयोजन का जिम्मा जिला पंचायत महकमे से प्रशासन के हाथ में आ सकता है। वहीं, मान्यता मिलने पर शासन से करोड़ों का अनुदान भी मिलना है, जिससे आवागमन के साथ ही मेले में पहुंचकर अदा किए जाने वाले टैक्सों से भक्तों समेत व्यापारियों को निजात मिल जाएगी। इसके अलावा सीमित संसाधनों के चलते जिला पंचायत महकमा मेला आयोजन में दिल खोलकर रकम खर्च नहीं कर पाता था, जिससे भक्तों समेत व्यापारियों को अपेक्षित स्तर पर सुविधा नहीं मिल पाती थीं।
एसडीएम मीनू राणा का कहना है कि मान्यता मिलने से खादर मेला पूरी तरह सरकारी हो गया है, लेकिन आयोजन किसके द्वारा किया जाएगा। इसका फैसला जिला प्रशासन करेगा।
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- मेले को मान्यता मिलने से जिला पंचायत से छीन सकती है मेजबानी
इमरान अली
गढ़मुक्तेश्वर। खादर मेले को मान्यता मिलने से जिला पंचायत के हाथ से कमान छिन सकती है। वहीं, व्यापारियों-दुकानदारों को भारी भरकम टैक्स चुकाने से मुक्ति भी मिल जाएगी।
क्षेत्रीय विधायक कमल मलिक के अथक प्रयास से प्रदेश शासन ने उपेक्षित गढ़ खादर मेले को मान्यता दे दी है, जिससे मेला सरकारी होने पर अब जिला पंचायत को भी खजाना खर्च नहीं करना पड़ेगा। लेकिन ब्रिटिश शासन काल से चली आ रही परंपरा टूटने की संभावना है। मेला सरकारी होने के बाद इसके आयोजन का जिम्मा जिला पंचायत महकमे से प्रशासन के हाथ में आ सकता है। वहीं, मान्यता मिलने पर शासन से करोड़ों का अनुदान भी मिलना है, जिससे आवागमन के साथ ही मेले में पहुंचकर अदा किए जाने वाले टैक्सों से भक्तों समेत व्यापारियों को निजात मिल जाएगी। इसके अलावा सीमित संसाधनों के चलते जिला पंचायत महकमा मेला आयोजन में दिल खोलकर रकम खर्च नहीं कर पाता था, जिससे भक्तों समेत व्यापारियों को अपेक्षित स्तर पर सुविधा नहीं मिल पाती थीं।
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एसडीएम मीनू राणा का कहना है कि मान्यता मिलने से खादर मेला पूरी तरह सरकारी हो गया है, लेकिन आयोजन किसके द्वारा किया जाएगा। इसका फैसला जिला प्रशासन करेगा।
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