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मोबाइल एप रखेगा खाद, कीटनाशक की बिक्री पर नजर
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:00 AM IST
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अब मोबाइल एप रखेगा खाद, कीटनाशक की बिक्री पर नजर
निजी तौर पर खाद और कीटनाशकों की बिक्री पर अब मोबाइल एप के जरिए नजर रखी जाएगी। कृषि विभाग सभी प्रकार के खाद और कीटनाशकों की ब्रिकी पर निगरानी के लिए इसकी मदद लेगा।
इस काम के लिए मोबाइल फर्टीलाइजर्स मोबाइल सिस्टम (एमएफएमएस) के नाम से एप लांच किया है। सरकारी दुकानों के अलावा प्राइवेट दुकानें पर भी उर्वरकों की बिक्री की जाती है।
सरकारी दुकानों पर तो उर्वरकों की ब्रिकी का रिकार्ड रखा जाता है। लेकिन प्राइवेट दुकानों से इस ब्रिकी का सही रिकार्ड नहीं मिल पाता।
कभी कभी किसी खास उर्वरक या कीटनाशक की मांग अधिक होने पर प्राइवेट दुकानदार इनके स्टाक गुपचुप तरीके से कहीं ओर रख देते हैं और बाद में किसानों को अधिक दामों में बेचते हैं।
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निजी दुकानों पर ब्रिकी की निगरानी रखने के लिए ही अब एमएफएमएस मोबाइल एप लांच किया गया है। कृषि विभाग के इस मोबाइल एप पर दुकानदारों को मिलने वाले स्टाक की पूरी जानकारी अपडेट रखी जाएगी।
दुकानदार किस किसान को कितना माल बेच रहा है, इसकी जानकारी उसे एप पर अपडेट करनी होगी। जिले के सभी दुकानदारों को इससे जोड़ा जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार का कहना है कि एमएफएमएस एप से उर्वरकों और कीटनाशकों की बिक्री और खपत की जानकारी विभाग के पास रहेगी। इससे काफी हद तक कालाबाजारी कम होगी।
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निजी तौर पर खाद और कीटनाशकों की बिक्री पर अब मोबाइल एप के जरिए नजर रखी जाएगी। कृषि विभाग सभी प्रकार के खाद और कीटनाशकों की ब्रिकी पर निगरानी के लिए इसकी मदद लेगा।
इस काम के लिए मोबाइल फर्टीलाइजर्स मोबाइल सिस्टम (एमएफएमएस) के नाम से एप लांच किया है। सरकारी दुकानों के अलावा प्राइवेट दुकानें पर भी उर्वरकों की बिक्री की जाती है।
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सरकारी दुकानों पर तो उर्वरकों की ब्रिकी का रिकार्ड रखा जाता है। लेकिन प्राइवेट दुकानों से इस ब्रिकी का सही रिकार्ड नहीं मिल पाता।
कभी कभी किसी खास उर्वरक या कीटनाशक की मांग अधिक होने पर प्राइवेट दुकानदार इनके स्टाक गुपचुप तरीके से कहीं ओर रख देते हैं और बाद में किसानों को अधिक दामों में बेचते हैं।
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निजी दुकानों पर ब्रिकी की निगरानी रखने के लिए ही अब एमएफएमएस मोबाइल एप लांच किया गया है। कृषि विभाग के इस मोबाइल एप पर दुकानदारों को मिलने वाले स्टाक की पूरी जानकारी अपडेट रखी जाएगी।
दुकानदार किस किसान को कितना माल बेच रहा है, इसकी जानकारी उसे एप पर अपडेट करनी होगी। जिले के सभी दुकानदारों को इससे जोड़ा जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी शिवकुमार का कहना है कि एमएफएमएस एप से उर्वरकों और कीटनाशकों की बिक्री और खपत की जानकारी विभाग के पास रहेगी। इससे काफी हद तक कालाबाजारी कम होगी।