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अस्पतालों की सुरक्षा रामभरोसे
Updated Sun, 16 Jul 2017 12:48 AM IST
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अस्पतालों की सुरक्षा रामभरोसे
जिले में सरकारी अस्पतालों में आग लगी तो बड़ी घटना हो सकती है। यहां के अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी है। खानापूर्ति के नाम पर सिलेंडर लगे हैं।
शायद ही कभी इनका परीक्षण हुआ हो। स्वास्थ्य व फायर अधिकारी मामले से अनजान बने हैं। जिले में चार सीएचसी हैं। जबकि कई उपकेंद्र चल रहे हैं। इन अस्पतालों में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज आते हैं
। स्वास्थ्य के नाम पर जान बचाने के लिए आने वाले मरीजों की जान यहां आकर खतरे में पड़ जाती है। यहां अस्पतालों में आग से बचाव के लिए सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी है।
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खानापूर्ति के नाम अस्पताल में सीज फायर सिलेंडर जरूर लगे हैं, लेकिन शायद ही कभी इनका परीक्षण हुआ हो। इतना ही नहीं अधिकारियों को इनकी संख्या भी नहीं पता है।
ऐसे में आग लगी तो यहां कोई बड़ा हादसा होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले का मुख्य अस्पताल वर्तमान में गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है।
यहां भी दीवारों पर सिलेंडर तो लगे हैं, लेकिन कोई भी उनके रख रखाव पर ध्यान नहीं देता है। शायद ही कभी स्वास्थ्य व फायर अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया गया हो। जिससे अधिकारी अंजान बने हुए हैं।
अग्निशमन अधिकारी जीतपाल सिंह ने बताया कि आग के इंतजाम के लिए समय समय पर जांच की जाती हैं। सीएमओ डा. एके सिंह ने बताया कि सुरक्षा को लेकर पूर्ण सतर्कता बरती जाती है।
अस्पतालों में सुरक्षा बेहतर है। सुरक्षा के बीच मरीजों का बेहतर उपचार करना ही उनकी प्राथमिकता है।
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जिले में सरकारी अस्पतालों में आग लगी तो बड़ी घटना हो सकती है। यहां के अस्पतालों में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी है। खानापूर्ति के नाम पर सिलेंडर लगे हैं।
शायद ही कभी इनका परीक्षण हुआ हो। स्वास्थ्य व फायर अधिकारी मामले से अनजान बने हैं। जिले में चार सीएचसी हैं। जबकि कई उपकेंद्र चल रहे हैं। इन अस्पतालों में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मरीज आते हैं
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। स्वास्थ्य के नाम पर जान बचाने के लिए आने वाले मरीजों की जान यहां आकर खतरे में पड़ जाती है। यहां अस्पतालों में आग से बचाव के लिए सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी है।
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खानापूर्ति के नाम अस्पताल में सीज फायर सिलेंडर जरूर लगे हैं, लेकिन शायद ही कभी इनका परीक्षण हुआ हो। इतना ही नहीं अधिकारियों को इनकी संख्या भी नहीं पता है।
ऐसे में आग लगी तो यहां कोई बड़ा हादसा होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। जिले का मुख्य अस्पताल वर्तमान में गढ़ रोड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है।
यहां भी दीवारों पर सिलेंडर तो लगे हैं, लेकिन कोई भी उनके रख रखाव पर ध्यान नहीं देता है। शायद ही कभी स्वास्थ्य व फायर अधिकारियों द्वारा सत्यापन किया गया हो। जिससे अधिकारी अंजान बने हुए हैं।
अग्निशमन अधिकारी जीतपाल सिंह ने बताया कि आग के इंतजाम के लिए समय समय पर जांच की जाती हैं। सीएमओ डा. एके सिंह ने बताया कि सुरक्षा को लेकर पूर्ण सतर्कता बरती जाती है।
अस्पतालों में सुरक्षा बेहतर है। सुरक्षा के बीच मरीजों का बेहतर उपचार करना ही उनकी प्राथमिकता है।