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दिवाली बीतते ही स्मॉग का कहर रुलाने लगा
Updated Sat, 10 Nov 2018 01:16 AM IST
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दिवाली बीतते ही छाया स्मॉग का कहर
गढ़मुक्तेश्वर। दिवाली बीतते ही स्मॉग के प्रकोप से वातावरण में धुंध छाने पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। दृश्यता प्रभावित होने से वाहनों में भिड़ंत होने की आशंका बढ़ गई है।
रोक के बाद भी फसलों के अवशेष जलाने का गोरखधंधा जारी है, क्योंकि मेले के मद्देनजर गन्ने की फसल काटने वाले कई किसान एनजीटी समेत शासन के नियमों की अनदेखी कर खेतों में गन्ने की पत्ती और धान की पराली समेत फसलों के अवशेष जलाने से बाज आने को तैयार नहीं हैं। दिवाली के बाद वायुमंडल में धुंध और धुएं का गुबार छाने से जहां राजधानी दिल्ली समेत समूचे एनसीआर क्षेत्र में रहने वालों को स्मॉग का कहर खूब रुला रहा है, वहीं शुक्रवार की सुबह को गढ़-ब्रजघाट नगरी क्षेत्र में धुंध सी छाने से सांस के मरीजों को खूब दिक्कत हुई। वहीं सूरज ढलते ही शाम को भी हवा के साथ वातावरण में स्मॉग की परत छा गई, जिससे सांस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत घरों में दुबकने को मजबूर होना पड़ा। वहीं ग्राहकों की तादाद घटने से शाम होते ही बाजारों में सन्नाटा सा पसरने से व्यापारियों को मंदी की मार झेलनी पड़ी। धुंध और धुएं का गुबार छाने से सुबह और शाम को सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ।
कई दिनों तक धुंध और स्मॉग का कहर रुलाता रहेगा।
मौसम वैज्ञानिक डॉ.नफीस चौधरी का कहना है कि तापमान गिरने से वाष्पीकरण क्रिया में बढ़ोतरी होने लगी है, लेकिन वायुमंडल में नमी बढ़ने से भाप अपेक्षित ढंग से ऊपर नहीं उठ पा रही है। दिवाली के दौरान हुई आतिशबाजी का धुंआ भी वातावरण में छाने से धुंध और स्मॉग की समस्या बढ़ी है, जिससे आंखों में जलन होने के साथ ही अस्थमा पीड़ितों को खुली हवा में सांस लेने में काफी दिक्कत होती है।
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गढ़मुक्तेश्वर। दिवाली बीतते ही स्मॉग के प्रकोप से वातावरण में धुंध छाने पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। दृश्यता प्रभावित होने से वाहनों में भिड़ंत होने की आशंका बढ़ गई है।
रोक के बाद भी फसलों के अवशेष जलाने का गोरखधंधा जारी है, क्योंकि मेले के मद्देनजर गन्ने की फसल काटने वाले कई किसान एनजीटी समेत शासन के नियमों की अनदेखी कर खेतों में गन्ने की पत्ती और धान की पराली समेत फसलों के अवशेष जलाने से बाज आने को तैयार नहीं हैं। दिवाली के बाद वायुमंडल में धुंध और धुएं का गुबार छाने से जहां राजधानी दिल्ली समेत समूचे एनसीआर क्षेत्र में रहने वालों को स्मॉग का कहर खूब रुला रहा है, वहीं शुक्रवार की सुबह को गढ़-ब्रजघाट नगरी क्षेत्र में धुंध सी छाने से सांस के मरीजों को खूब दिक्कत हुई। वहीं सूरज ढलते ही शाम को भी हवा के साथ वातावरण में स्मॉग की परत छा गई, जिससे सांस के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत घरों में दुबकने को मजबूर होना पड़ा। वहीं ग्राहकों की तादाद घटने से शाम होते ही बाजारों में सन्नाटा सा पसरने से व्यापारियों को मंदी की मार झेलनी पड़ी। धुंध और धुएं का गुबार छाने से सुबह और शाम को सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ।
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कई दिनों तक धुंध और स्मॉग का कहर रुलाता रहेगा।
मौसम वैज्ञानिक डॉ.नफीस चौधरी का कहना है कि तापमान गिरने से वाष्पीकरण क्रिया में बढ़ोतरी होने लगी है, लेकिन वायुमंडल में नमी बढ़ने से भाप अपेक्षित ढंग से ऊपर नहीं उठ पा रही है। दिवाली के दौरान हुई आतिशबाजी का धुंआ भी वातावरण में छाने से धुंध और स्मॉग की समस्या बढ़ी है, जिससे आंखों में जलन होने के साथ ही अस्थमा पीड़ितों को खुली हवा में सांस लेने में काफी दिक्कत होती है।
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