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एक ही रात में उजड़ गई अंजलि की गोद
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एक ही रात में उजड़ गई अंजलि की गोद
हापुड़। पेट में संक्रमण से होने से हुई दो भाइयों की मौत से उसके माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। इससे एक ही रात में अंजलि की गोद उजड़ गई। बेबस पिता रातभर चिकित्सकों के पैर पड़ता रहा। चिकित्सक बच्चों को नया जीवन तो नहीं दे सके, लेकिन मेरठ के एक अस्पताल प्रबंधन ने मानवता को शर्मसार करते हुए एक रात का 40 हजार रुपये का बिल पीड़ित परिवार से ऐंठ लिया।
कुचेसर रोड चौपला निवासी अनिल कुमार प्राइवेट बसों में हेल्परी करता है। उसकी पत्नी अंजलि भी मजदूरी करती है। दंपति अपने दो और तीन वर्षीय बेटों के बेहतर भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करते थे। उन्हें इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि यह होली उनके हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ देगी। जब सब लोग दुल्हैंडी का त्योहार मना रहे थे, तब अनिल के दोनों बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। शाम के समय हालत बिगड़ी तो बच्चों को हापुड़ के निजी अस्पतालों में ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए और बच्चों को मेरठ रेफर कर दिया।
सूचना मिलते ही बेबस पिता भी कर्जे पर 40 हजार रुपये लेकर मेरठ पहुंच गया। रातभर चिकित्सकों के पैर पड़ता रहा, लेकिन रात में 12 बजे उसके बड़े बेटे ने दम तोड़ दिया। गम को सीने में दबाए दंपति छोटे बेटे के जीने की उम्मीद जगाए रहे, लेकिन तड़के करीब पांच बजे दूसरे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। उसके बाद दंपति फूट-फूटकर रोने लगे। इस दौरान मेरठ के अस्पताल प्रबंधन का घिनौना चेहरा भी सामने आया। बेबस दंपति को एक रात का बिल 40 हजार रुपये ऐंठ किया।
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-अस्पतालों में चिकित्सकों के पैर पड़ता रहा बेबस पिता
-मासूमों की मौत के बाद भी मेरठ के निजी अस्पताल ने वसूला 40 हजार का बिल
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हापुड़। पेट में संक्रमण से होने से हुई दो भाइयों की मौत से उसके माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है। इससे एक ही रात में अंजलि की गोद उजड़ गई। बेबस पिता रातभर चिकित्सकों के पैर पड़ता रहा। चिकित्सक बच्चों को नया जीवन तो नहीं दे सके, लेकिन मेरठ के एक अस्पताल प्रबंधन ने मानवता को शर्मसार करते हुए एक रात का 40 हजार रुपये का बिल पीड़ित परिवार से ऐंठ लिया।
कुचेसर रोड चौपला निवासी अनिल कुमार प्राइवेट बसों में हेल्परी करता है। उसकी पत्नी अंजलि भी मजदूरी करती है। दंपति अपने दो और तीन वर्षीय बेटों के बेहतर भविष्य के लिए दिन रात मेहनत करते थे। उन्हें इस बात का तनिक भी अंदाजा नहीं था कि यह होली उनके हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ देगी। जब सब लोग दुल्हैंडी का त्योहार मना रहे थे, तब अनिल के दोनों बच्चे जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। शाम के समय हालत बिगड़ी तो बच्चों को हापुड़ के निजी अस्पतालों में ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने हाथ खड़े कर दिए और बच्चों को मेरठ रेफर कर दिया।
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सूचना मिलते ही बेबस पिता भी कर्जे पर 40 हजार रुपये लेकर मेरठ पहुंच गया। रातभर चिकित्सकों के पैर पड़ता रहा, लेकिन रात में 12 बजे उसके बड़े बेटे ने दम तोड़ दिया। गम को सीने में दबाए दंपति छोटे बेटे के जीने की उम्मीद जगाए रहे, लेकिन तड़के करीब पांच बजे दूसरे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया। उसके बाद दंपति फूट-फूटकर रोने लगे। इस दौरान मेरठ के अस्पताल प्रबंधन का घिनौना चेहरा भी सामने आया। बेबस दंपति को एक रात का बिल 40 हजार रुपये ऐंठ किया।
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-अस्पतालों में चिकित्सकों के पैर पड़ता रहा बेबस पिता
-मासूमों की मौत के बाद भी मेरठ के निजी अस्पताल ने वसूला 40 हजार का बिल