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गांव को साक्षर बनाना होगा सभी विभागों की जिम्मेदारी
Updated Mon, 27 Nov 2017 01:34 AM IST
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सभी विभाग मिलकर गांवों को बनाएंगे साक्षर
नितिन दीक्षित
हापुड़। शासन की ओर से सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को पूर्ण साक्षर बनाने की योजना है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की जिम्मेदारी अब केवल शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि इसके लिए सभी विभागों को योजना में शामिल कर अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्राम पंचायती राज विभाग के साथ पुलिस जैसे विभाग भी इसमें अपना सहयोग करेंगे। पुलिस खासकर बच्चों को बाल अपराध की ओर जाने से रोकने के लिए जागरूक करेगी।
शासन की ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों की शिक्षा देने की मंशा है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को पूर्ण साक्षर करने के साथ बालक बालिकाओं की शिक्षा एवं समानता का अधिकार का पालन कराने की पूर्ण जिम्मेदारी जिले के बड़े अधिकारियों की होगी। योजना के अनुसार वर्ष 2017-18 के सर्व शिक्षा अभियान में पंचायती राज विभाग और यूनीसेफ की संयुक्त रूप से भागीदारी से कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिसमें मुख्य रूप से पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, आइसीडीएस, ग्राम्य विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, स्वास्थ्य विभाग, मदरसा बोर्ड, श्रम विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग को शामिल किया गया है। योजना में प्राथमिकता के आधार पर सांसद आदर्श गांव और अधिकारियों द्वारा गोद लिए गांवों को शामिल किया गया है। शामिल विभागों के अधिकारी गांवों की शिक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के साथ समय-समय अपने स्तर पर जांच भी करेंगे। कुल मिलाकर गांव के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
बच्चों को बाल अपराधों के प्रति जागरूक करेगी पुलिस
योजना के मुताबिक शिक्षा विभाग के साथ मुख्य जिम्मेदारी पुलिस को दी गई है। गांवों में बाल अपराध रोकने और बच्चों को स्कूल जाने से रोकने वालों को समझाने की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। समय-समय पर पुलिस को अपने स्तर पर शिक्षा का महत्व समझाने के लिए ग्रामीणों के साथ बैठक भी करनी होगी। इसके अलावा ग्राम शिक्षा रजिस्टर में दर्ज पांच से 14 वर्ष तक के बच्चों की वास्तविक स्थिति भी पता लगाना होगा।
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डीएम कृष्णा करुनेश का कहना है कि शासन के आदेशों पर ग्राम पंचायतों को पूर्ण साक्षर बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। शामिल विभागों को भी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में साक्षर का स्तर बढ़ाने के लिए अधिकारी भी गंभीर है। इसके निश्चित रूप से सुखद परिणाम सामने आएंगे।
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नितिन दीक्षित
हापुड़। शासन की ओर से सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को पूर्ण साक्षर बनाने की योजना है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की जिम्मेदारी अब केवल शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि इसके लिए सभी विभागों को योजना में शामिल कर अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ग्राम पंचायती राज विभाग के साथ पुलिस जैसे विभाग भी इसमें अपना सहयोग करेंगे। पुलिस खासकर बच्चों को बाल अपराध की ओर जाने से रोकने के लिए जागरूक करेगी।
शासन की ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों की शिक्षा देने की मंशा है। इसके लिए ग्राम पंचायतों को पूर्ण साक्षर करने के साथ बालक बालिकाओं की शिक्षा एवं समानता का अधिकार का पालन कराने की पूर्ण जिम्मेदारी जिले के बड़े अधिकारियों की होगी। योजना के अनुसार वर्ष 2017-18 के सर्व शिक्षा अभियान में पंचायती राज विभाग और यूनीसेफ की संयुक्त रूप से भागीदारी से कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जिसमें मुख्य रूप से पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, आइसीडीएस, ग्राम्य विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, स्वास्थ्य विभाग, मदरसा बोर्ड, श्रम विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग को शामिल किया गया है। योजना में प्राथमिकता के आधार पर सांसद आदर्श गांव और अधिकारियों द्वारा गोद लिए गांवों को शामिल किया गया है। शामिल विभागों के अधिकारी गांवों की शिक्षा व्यवस्था पर नजर रखने के साथ समय-समय अपने स्तर पर जांच भी करेंगे। कुल मिलाकर गांव के निरक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
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बच्चों को बाल अपराधों के प्रति जागरूक करेगी पुलिस
योजना के मुताबिक शिक्षा विभाग के साथ मुख्य जिम्मेदारी पुलिस को दी गई है। गांवों में बाल अपराध रोकने और बच्चों को स्कूल जाने से रोकने वालों को समझाने की जिम्मेदारी पुलिस की होगी। समय-समय पर पुलिस को अपने स्तर पर शिक्षा का महत्व समझाने के लिए ग्रामीणों के साथ बैठक भी करनी होगी। इसके अलावा ग्राम शिक्षा रजिस्टर में दर्ज पांच से 14 वर्ष तक के बच्चों की वास्तविक स्थिति भी पता लगाना होगा।
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डीएम कृष्णा करुनेश का कहना है कि शासन के आदेशों पर ग्राम पंचायतों को पूर्ण साक्षर बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। शामिल विभागों को भी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में साक्षर का स्तर बढ़ाने के लिए अधिकारी भी गंभीर है। इसके निश्चित रूप से सुखद परिणाम सामने आएंगे।