{"_id":"5d07e8328ebc3e3f2631c172","slug":"156079926911440-hapur-news146","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिले के 440 निजी अस्पतालों में हड़ताल से मरीज बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिले के 440 निजी अस्पतालों में हड़ताल से मरीज बेहाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजी अस्पतालों में हड़ताल से मरीज बेहाल
हापुड़। अस्पतालों में हो रही हिंसक घटनाओं के विरोध में सोमवार को आईएमए के आह्वान पर जिलेभर के निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। अस्पतालों की ओपीडी बंद रहने से दूर दराज के मरीजों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। चिकित्सकों ने सुरक्षा संबंधी कड़ा कानून बनाने की मांग को लेकर गृह मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। मरीज सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर रहे।
इन दिनों चिकित्सकों व अस्पतालों में मारपीट, तोड़फोड़ की घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। चिकित्सक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसके विरोध में सोमवार को आईएमए के आह्वान पर निजी चिकित्सक रेलवे रोड स्थित डा. निशी चाइल्ड केयर सेंटर पर एकत्र हुए।
आईएमए के सचिव डा. योगेश गोयल ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार चिकित्सकों व अस्पतालों पर हिंसा के विरुद्ध सख्त कानून बनाए, हिंसा करने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान हो, पश्चिमी बंगाल में दोषी व्यक्तियों पर त्वरित कार्रवाई कर शांति व्यवस्था बहाल की जाए। मांगों के निस्तारण को चिकित्सकों ने गृह मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
विज्ञापन
ज्ञापन सौंपने वालों में अध्यक्ष डा. वीपी अग्रवाल, डा. विक्रांत बंसल, डा. आनंद प्रकाश, डा. सुनील शर्मा, डा. दिनेश गर्ग, डा. एनएम सिंह, डा. पराग शर्मा, डा. नरेंद्र केन, डा. अनुराग सिंहल, डा. आदर्श जैन, डा. नीता शर्मा आदि मौजूद रहे।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की उमड़ी भीड़
हड़ताल के चलते निजी अस्पतालों में सन्नाटा पसरा रहा। ओपीडी बंद रहने से मरीजों को अस्पतालों में उपचार नहीं मिल सका। दूर दराज से आए मरीजों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। बहुत से मरीजों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया। जिसके चलते सोमवार को सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। व्यवस्था बनाने में चिकित्सकों के पसीने छूट गए
-दिन भर भटके मरीज-
अस्पतालों में निजी चिकित्सकों की हड़ताल के चलते दिनभर मरीज भटकते रहे। राहत नहीं मिलने पर उन्हें सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।
शीला ने बताया कि पेट में दर्द से काफी परेशान हैं, उपचार के लिए अस्पताल पहुंची। लेकिन चिकित्सकों की हड़ताल के चलते परेशान होना पड़ रहा है।
हनी सैनी का कहना था कि सोमवार को अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सकों की हड़ताल के बारे में पता चला। पैर में दर्द से परेशान हैं, मजबूरी में घर लौटना पड़ रहा है।
रजनी का कहना था कि चिकित्सकों की हड़ताल के चलते वह अपना उपचार नहीं करा सकी है। अब सरकारी अस्पताल में ही उपचार कराना पड़ेगा।
शोभित कंसल का कहना था कि चिकित्सकों पर हमला वास्तव में निंदनीय है। सरकार को इस ओर कड़ा रुख अपनाकर कानून बनाना होगा। --फोटो संख्या
मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने रैली निकाल किया प्रदर्शन
पिलखुवा। कोलकाता के एक अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट की घटना को लेकर रविवार को क्षेत्र के चिकित्सकों व सरस्वती मेडिकल कॉलेज के छात्र भी हड़ताल पर रहे। साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के गलत रवैये के विरोध में रैली निकाल रोष प्रकट किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि केंद्र सरकार चिकित्सकों के लिए ऐसा कानून बनाए ताकि दोबारा मारपीट की घटना न हो सके। आज डाक्टरों पर हमला करने वाले खुलेआम घूम रहे है। पश्चिम बंगाल की सरकार उन्हें पकड़कर सख्त से सख्त सजा दे। प्रदर्शन करने वालों में डा. प्रशांत सिंह, डा. कर्मचंद, डा. प्रभात, डा. सनाईबाद, डा. प्रभात, डा. रमन, डा. प्रकल्प, डा. मोहित, डा. प्राप्ति, डा. हरमीत, डा. इमरीन, डा. लिनिया समेत सैकड़ाें चिकित्सक व छात्र शामिल थे। इसके अलावा जीएस मडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने भी रैली निकाली। रैली रेलवे रोड स्थित रेलवे लाइन से शुरू होकर मोहल्ला शिवाली नगर, साकेत, मोहल्ला मंडी, मोहल्ला जवाहर बाजार व मोहल्ला रमपुरा होते हुए वापस रेलवे लाइन के पास सपन्न हुई। इस दौरान डा. निर्मल, डा. फैजल, डा. शहिद, डा. युवराज, डा. राकेश, डा. तरुण, डा. मनीषा, डा. रितिका समेत कई डाक्टर उपस्थित थे।
विज्ञापन
हापुड़। अस्पतालों में हो रही हिंसक घटनाओं के विरोध में सोमवार को आईएमए के आह्वान पर जिलेभर के निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। अस्पतालों की ओपीडी बंद रहने से दूर दराज के मरीजों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। चिकित्सकों ने सुरक्षा संबंधी कड़ा कानून बनाने की मांग को लेकर गृह मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। मरीज सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर रहे।
इन दिनों चिकित्सकों व अस्पतालों में मारपीट, तोड़फोड़ की घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। चिकित्सक स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इसके विरोध में सोमवार को आईएमए के आह्वान पर निजी चिकित्सक रेलवे रोड स्थित डा. निशी चाइल्ड केयर सेंटर पर एकत्र हुए।
विज्ञापन
आईएमए के सचिव डा. योगेश गोयल ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में केंद्र सरकार चिकित्सकों व अस्पतालों पर हिंसा के विरुद्ध सख्त कानून बनाए, हिंसा करने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान हो, पश्चिमी बंगाल में दोषी व्यक्तियों पर त्वरित कार्रवाई कर शांति व्यवस्था बहाल की जाए। मांगों के निस्तारण को चिकित्सकों ने गृह मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
विज्ञापन
ज्ञापन सौंपने वालों में अध्यक्ष डा. वीपी अग्रवाल, डा. विक्रांत बंसल, डा. आनंद प्रकाश, डा. सुनील शर्मा, डा. दिनेश गर्ग, डा. एनएम सिंह, डा. पराग शर्मा, डा. नरेंद्र केन, डा. अनुराग सिंहल, डा. आदर्श जैन, डा. नीता शर्मा आदि मौजूद रहे।
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की उमड़ी भीड़
हड़ताल के चलते निजी अस्पतालों में सन्नाटा पसरा रहा। ओपीडी बंद रहने से मरीजों को अस्पतालों में उपचार नहीं मिल सका। दूर दराज से आए मरीजों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। बहुत से मरीजों ने सरकारी अस्पतालों का रुख किया। जिसके चलते सोमवार को सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। व्यवस्था बनाने में चिकित्सकों के पसीने छूट गए
-दिन भर भटके मरीज-
अस्पतालों में निजी चिकित्सकों की हड़ताल के चलते दिनभर मरीज भटकते रहे। राहत नहीं मिलने पर उन्हें सरकारी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ा।
शीला ने बताया कि पेट में दर्द से काफी परेशान हैं, उपचार के लिए अस्पताल पहुंची। लेकिन चिकित्सकों की हड़ताल के चलते परेशान होना पड़ रहा है।
हनी सैनी का कहना था कि सोमवार को अस्पताल पहुंचे तो चिकित्सकों की हड़ताल के बारे में पता चला। पैर में दर्द से परेशान हैं, मजबूरी में घर लौटना पड़ रहा है।
रजनी का कहना था कि चिकित्सकों की हड़ताल के चलते वह अपना उपचार नहीं करा सकी है। अब सरकारी अस्पताल में ही उपचार कराना पड़ेगा।
शोभित कंसल का कहना था कि चिकित्सकों पर हमला वास्तव में निंदनीय है। सरकार को इस ओर कड़ा रुख अपनाकर कानून बनाना होगा। --फोटो संख्या
मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने रैली निकाल किया प्रदर्शन
पिलखुवा। कोलकाता के एक अस्पताल में डॉक्टरों से मारपीट की घटना को लेकर रविवार को क्षेत्र के चिकित्सकों व सरस्वती मेडिकल कॉलेज के छात्र भी हड़ताल पर रहे। साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के गलत रवैये के विरोध में रैली निकाल रोष प्रकट किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि केंद्र सरकार चिकित्सकों के लिए ऐसा कानून बनाए ताकि दोबारा मारपीट की घटना न हो सके। आज डाक्टरों पर हमला करने वाले खुलेआम घूम रहे है। पश्चिम बंगाल की सरकार उन्हें पकड़कर सख्त से सख्त सजा दे। प्रदर्शन करने वालों में डा. प्रशांत सिंह, डा. कर्मचंद, डा. प्रभात, डा. सनाईबाद, डा. प्रभात, डा. रमन, डा. प्रकल्प, डा. मोहित, डा. प्राप्ति, डा. हरमीत, डा. इमरीन, डा. लिनिया समेत सैकड़ाें चिकित्सक व छात्र शामिल थे। इसके अलावा जीएस मडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने भी रैली निकाली। रैली रेलवे रोड स्थित रेलवे लाइन से शुरू होकर मोहल्ला शिवाली नगर, साकेत, मोहल्ला मंडी, मोहल्ला जवाहर बाजार व मोहल्ला रमपुरा होते हुए वापस रेलवे लाइन के पास सपन्न हुई। इस दौरान डा. निर्मल, डा. फैजल, डा. शहिद, डा. युवराज, डा. राकेश, डा. तरुण, डा. मनीषा, डा. रितिका समेत कई डाक्टर उपस्थित थे।