{"_id":"5ce444dcbdec2207073c57d4","slug":"155846376012-hapur-news23","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस के गले की फांस बन सकता है कुर्की का नोटिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस के गले की फांस बन सकता है कुर्की का नोटिस
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलिस के गले की फांस बन सकता है कुर्की का नोटिस
हापुड़। ब्रजघाट में पुलिस द्वारा चोरी का माल बरामदगी के दौरान महिलाओं व अन्य लोगों के साथ मारपीट मामले में पुलिस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने एसपी के समक्ष दावा किया कि आश्रम का बेनामा उनके पक्ष के सुशील की पत्नी कृष्णा देवी के नाम है तो पुलिस ने चोरी की रिपोर्ट कैसे दर्ज कर ली। पीड़ित पक्ष ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मंगलवार दोपहर ब्रजघाट निवासी सुशील चौधरी के परिवार की महिलाएं मुजफ्फरनगर निवासी रिश्तेदार के साथ एसपी कार्यालय पहुंची। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आश्रम को कुर्क करने के लिए जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें लिखा है कि आश्रम के स्वामी लक्ष्मणदास महाराज थे। लक्ष्मणदास ने 2003 में ब्रह्मस्वरूप को वसीयत की थी। किन्हीं कारणवश 2005 में आश्रम की वसीयत अपने दूसरे शिष्य रामानंद को कर दी थी। रामानंद ने वसीयत के आधार पर ओमप्रकाश को वसीयत कर दी थी, जिसके बाद ओमप्रकाश ने आश्रम को अप्रैल माह में सुशील की पत्नी कृष्णा देवी के नाम बैनामा कर दिया था। भवन के कब्जे को लेकर दोनों पक्षों में काफी तनाव है। कभी भी कोई बड़ी घटना घटित हो सकती है। इसलिए आश्रम को कुर्क करके किसी अन्य की सुपुर्दगी में दिया जाए।
वहीं सुशील के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उपजिलाधिकारी गढ़मुक्तेश्वर को भेजी अपनी रिपोर्ट में खुद स्वीकार किया है कि कृष्णा देवी ने ओमप्रकाश से भवन का बैनामा कराया है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस ने बिना जांच के चोरी की रिपोर्ट कैसे दर्ज कर ली। एसपी डा. यशवीर सिंह ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। जांच में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
हापुड़। ब्रजघाट में पुलिस द्वारा चोरी का माल बरामदगी के दौरान महिलाओं व अन्य लोगों के साथ मारपीट मामले में पुलिस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पीड़ित पक्ष की महिलाओं ने एसपी के समक्ष दावा किया कि आश्रम का बेनामा उनके पक्ष के सुशील की पत्नी कृष्णा देवी के नाम है तो पुलिस ने चोरी की रिपोर्ट कैसे दर्ज कर ली। पीड़ित पक्ष ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मंगलवार दोपहर ब्रजघाट निवासी सुशील चौधरी के परिवार की महिलाएं मुजफ्फरनगर निवासी रिश्तेदार के साथ एसपी कार्यालय पहुंची। उन्होंने बताया कि पुलिस ने आश्रम को कुर्क करने के लिए जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें लिखा है कि आश्रम के स्वामी लक्ष्मणदास महाराज थे। लक्ष्मणदास ने 2003 में ब्रह्मस्वरूप को वसीयत की थी। किन्हीं कारणवश 2005 में आश्रम की वसीयत अपने दूसरे शिष्य रामानंद को कर दी थी। रामानंद ने वसीयत के आधार पर ओमप्रकाश को वसीयत कर दी थी, जिसके बाद ओमप्रकाश ने आश्रम को अप्रैल माह में सुशील की पत्नी कृष्णा देवी के नाम बैनामा कर दिया था। भवन के कब्जे को लेकर दोनों पक्षों में काफी तनाव है। कभी भी कोई बड़ी घटना घटित हो सकती है। इसलिए आश्रम को कुर्क करके किसी अन्य की सुपुर्दगी में दिया जाए।
विज्ञापन
वहीं सुशील के परिजनों का कहना है कि पुलिस ने उपजिलाधिकारी गढ़मुक्तेश्वर को भेजी अपनी रिपोर्ट में खुद स्वीकार किया है कि कृष्णा देवी ने ओमप्रकाश से भवन का बैनामा कराया है। ऐसे में सवाल उठता है कि पुलिस ने बिना जांच के चोरी की रिपोर्ट कैसे दर्ज कर ली। एसपी डा. यशवीर सिंह ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। जांच में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।
विज्ञापन