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ईएसआई का लाभ चाहिए तो काटते रहें गाजियाबाद के चक्कर
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ईएसआई का लाभ चाहिए तो काटते रहें गाजियाबाद के चक्कर
हापुड़। अगर आप जॉब करते हैं और वेतन से ईएसआई की कटौती करा रहे हैं, तो यह आशा न करें कि आपको समस्या आने पर ईएसआई का लाभ मिल जाएगा। वजह जिले में ईएसआई का कोई कार्यालय का न होना है। ऐसे में कर्मचारियों को कामकाज छोड़कर गाजियाबाद के चक्कर लगाने पड़ते हैं, उनका बिल पास होना तो दूर, कई बार अधिकारियों से संपर्क तक नहीं हो पाता है।
जिले के करीब 15 हजार कर्मचारी ईएसआईसी से जुड़े हैं। इन कर्मचारियों के वेतन से हर महीने 1.75 फीसदी की कटौती कर, पैसा ईएसआई को भेजा जाता है। इस मद में पैसा इसलिए भेजा जाता है, ताकि कर्मचारी या उसके परिजनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आने पर सरकारी खर्च पर इलाज मिल सके। हापुड़ में ईएसआई का अस्पताल तो मौजूद है, लेकिन यहां न तो कोई स्थायी चिकित्सक है और न ही कोई फार्मोस्टि है। वहीं कर्मचारियों की समस्या सुनने के लिए यहां कोई लोकल ऑफिस भी मौजूद नहीं है। कर्मचारी यदि प्राईवेट अस्पतालों में उपचार करा, दवा व इलाज का बिल ईएसआई से पास कराना चाहते हैं तो उन्हें महीनों अधिकारियों से संपर्क साधने में ही लग जाते हैं। लोकल कार्यालय न होने के कारण कर्मचारियों को गाजियाबाद के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे ही सैकड़ों मामले जिले में चल रहे हैं।
हापुड़ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन उठा रही मांग
- हापुड़ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव अमन गुप्ता का कहना है कि कर्मचारियों के हित में लोकल स्तर पर ईएसआई का कार्यालय होना जरूरी है। कई बार उद्योग बंधुओं की बैठक में भी इस मांग को उठाया जा चुका है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता। जल्द ही ईएसआई के अधिकारियों का गाजियाबाद जाकर घेराव करेंगे।
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एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को ईएसआई का लाभ न मिलना गंभीर मामला है। इस संबंध में जांच कराकर, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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हापुड़। अगर आप जॉब करते हैं और वेतन से ईएसआई की कटौती करा रहे हैं, तो यह आशा न करें कि आपको समस्या आने पर ईएसआई का लाभ मिल जाएगा। वजह जिले में ईएसआई का कोई कार्यालय का न होना है। ऐसे में कर्मचारियों को कामकाज छोड़कर गाजियाबाद के चक्कर लगाने पड़ते हैं, उनका बिल पास होना तो दूर, कई बार अधिकारियों से संपर्क तक नहीं हो पाता है।
जिले के करीब 15 हजार कर्मचारी ईएसआईसी से जुड़े हैं। इन कर्मचारियों के वेतन से हर महीने 1.75 फीसदी की कटौती कर, पैसा ईएसआई को भेजा जाता है। इस मद में पैसा इसलिए भेजा जाता है, ताकि कर्मचारी या उसके परिजनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आने पर सरकारी खर्च पर इलाज मिल सके। हापुड़ में ईएसआई का अस्पताल तो मौजूद है, लेकिन यहां न तो कोई स्थायी चिकित्सक है और न ही कोई फार्मोस्टि है। वहीं कर्मचारियों की समस्या सुनने के लिए यहां कोई लोकल ऑफिस भी मौजूद नहीं है। कर्मचारी यदि प्राईवेट अस्पतालों में उपचार करा, दवा व इलाज का बिल ईएसआई से पास कराना चाहते हैं तो उन्हें महीनों अधिकारियों से संपर्क साधने में ही लग जाते हैं। लोकल कार्यालय न होने के कारण कर्मचारियों को गाजियाबाद के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे ही सैकड़ों मामले जिले में चल रहे हैं।
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हापुड़ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन उठा रही मांग
- हापुड़ स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव अमन गुप्ता का कहना है कि कर्मचारियों के हित में लोकल स्तर पर ईएसआई का कार्यालय होना जरूरी है। कई बार उद्योग बंधुओं की बैठक में भी इस मांग को उठाया जा चुका है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं होता। जल्द ही ईएसआई के अधिकारियों का गाजियाबाद जाकर घेराव करेंगे।
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एसडीएम सत्यप्रकाश सिंह का कहना है कि कर्मचारियों को ईएसआई का लाभ न मिलना गंभीर मामला है। इस संबंध में जांच कराकर, कड़ी कार्रवाई की जाएगी।