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मतदाताओं ने वोट डालने तक प्रत्याशियों को झांसे में रखा
Updated Thu, 23 Nov 2017 01:04 AM IST
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आखिरी समय तक खामोशी ओढ़े रहा मतदाता
अनिल त्यागी। हापुड़। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष और वार्ड सदस्य चुनाव के लिए बुधवार को मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों की हार-जीत पर मुहर लगा दी। लेकिन मतदाताओं का आखिरी समय तक खामोशी ओढ़े रहना सभी प्रत्याशियों को अखर रहा है। यही वजह है कि शाम तक चुनाव की तस्वीर साफ नहीं हो सकी। हालांकि इसके बावजूद अधिकंाश प्रमुख प्रत्याशी अपनी जीत के दावे ठोकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यह बात अलग है कि मतदान का प्रतिशत कम होने से समीकरण बदल गये हैं। इसका लाभ किसे मिलेगा, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अबकी चुनाव में यह बात जरूर देखने को मिली कि प्रचार सामग्री से शहर मानो पट गया था। ऐेसे में यह अनुमान लगाना मुुश्किल हो रहा था कि पालिकाध्यक्ष पद की ओर कौन प्रत्याशी बढ़त बनाएगा। लोगों का अनुमान था कि मतदान की पूर्व संध्या तक रूझान पता चल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, बल्कि मतदान समाप्त होने तक मतदाताओं ने प्रत्याशियों को झांसे में रखा, क्योंकि उन्होंने मतदान से पहले और बाद में भी चुप्पी साधे रखी। इसका एक कारण यह भी रहा है कि पालिकाध्यक्ष के साथ ही वार्ड सदस्यों का भी चुनाव रहा। नगर पालिका परिषद हापुड़ के चुनाव में सिर्फ 52.52 प्रतिशत मतदान होने से चुनाव की तस्वीर बदलती नजर आई है। अब राजनीतिक गलियारों से जुड़े लोग साफ कह रहे हैं कि अबकी चुनाव में पालिकाध्यक्ष की कुर्सी किसके हाथ लग जाए, कुछ पता नहीं।
वहीं, दिलचस्प बात यह है कि इस बार एक निर्दलीय प्रत्याशी ने नगर पालिका परिषद हापुड़ के अध्यक्ष पद के समीकरण ही बिगाड़ दिए। माना जा रहा है कि इसी कारण से यहां पालिकाध्यक्ष चुनाव की तस्वीर साफ नहीं है। कुल मिलाकर मतदान के बाद प्रमुख प्रत्याशी अपने खास लोगों तथा मतदान केंद्रों पर तैनात रहे एजेंटों से अंदर के रुझान की रिपोर्ट मांगने में जुटे थे। दरअसल मतदान के बाद मतगणना होने तक प्रत्याशी और उनके समर्थक तरह-तरह के अनुमान लगाते रहते हैं। इससे प्रत्याशियों की बेचैनी घटना बढ़ना स्वाभाविक है।
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अनिल त्यागी। हापुड़। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष और वार्ड सदस्य चुनाव के लिए बुधवार को मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों की हार-जीत पर मुहर लगा दी। लेकिन मतदाताओं का आखिरी समय तक खामोशी ओढ़े रहना सभी प्रत्याशियों को अखर रहा है। यही वजह है कि शाम तक चुनाव की तस्वीर साफ नहीं हो सकी। हालांकि इसके बावजूद अधिकंाश प्रमुख प्रत्याशी अपनी जीत के दावे ठोकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यह बात अलग है कि मतदान का प्रतिशत कम होने से समीकरण बदल गये हैं। इसका लाभ किसे मिलेगा, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अबकी चुनाव में यह बात जरूर देखने को मिली कि प्रचार सामग्री से शहर मानो पट गया था। ऐेसे में यह अनुमान लगाना मुुश्किल हो रहा था कि पालिकाध्यक्ष पद की ओर कौन प्रत्याशी बढ़त बनाएगा। लोगों का अनुमान था कि मतदान की पूर्व संध्या तक रूझान पता चल जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका, बल्कि मतदान समाप्त होने तक मतदाताओं ने प्रत्याशियों को झांसे में रखा, क्योंकि उन्होंने मतदान से पहले और बाद में भी चुप्पी साधे रखी। इसका एक कारण यह भी रहा है कि पालिकाध्यक्ष के साथ ही वार्ड सदस्यों का भी चुनाव रहा। नगर पालिका परिषद हापुड़ के चुनाव में सिर्फ 52.52 प्रतिशत मतदान होने से चुनाव की तस्वीर बदलती नजर आई है। अब राजनीतिक गलियारों से जुड़े लोग साफ कह रहे हैं कि अबकी चुनाव में पालिकाध्यक्ष की कुर्सी किसके हाथ लग जाए, कुछ पता नहीं।
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वहीं, दिलचस्प बात यह है कि इस बार एक निर्दलीय प्रत्याशी ने नगर पालिका परिषद हापुड़ के अध्यक्ष पद के समीकरण ही बिगाड़ दिए। माना जा रहा है कि इसी कारण से यहां पालिकाध्यक्ष चुनाव की तस्वीर साफ नहीं है। कुल मिलाकर मतदान के बाद प्रमुख प्रत्याशी अपने खास लोगों तथा मतदान केंद्रों पर तैनात रहे एजेंटों से अंदर के रुझान की रिपोर्ट मांगने में जुटे थे। दरअसल मतदान के बाद मतगणना होने तक प्रत्याशी और उनके समर्थक तरह-तरह के अनुमान लगाते रहते हैं। इससे प्रत्याशियों की बेचैनी घटना बढ़ना स्वाभाविक है।
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