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भाजपा विधायक समेत सपा के पूर्व मंत्री की प्रतिष्ठा दाव पर
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:58 AM IST
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भाजपा विधायक समेत सपा के पूर्व मंत्री की प्रतिष्ठा दाव पर
भाजपा और सपा को अपनी खोई सीट फिर से कब्जाने की चुनौती
बसपाई पहली बार खाता खोलने को लेकर आशान्वित
भूतेश्वर प्रसाद शर्मा
गढ़मुक्तेश्वर। भाजपा विधायक समेत सपा के पूर्व मंत्री की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। इस बार भाजपा और सपा को अपनी खोई सीट फिर से कब्जाने तो बसपा के सामने पहली बार जीत का खाता खोलने की चुनौती है।
जीत-हार के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2001 में भाजपा के रामौतार राजौरा और 2006 में सपा के सोना सिंह ने पहली बार अपनी पार्टियों की विजय पताका फहराई थी। 2012 के चुनाव में कांग्रेस की संगीता पुरुषोत्तम ने अप्रत्याशित ढंग में पूर्व चेयरमैन सोना सिंह की बसपा समर्थित पत्नी सुमन सिंह को पराजित कर दिया था, लेकिन भाजपा से किस्मत आजमाने वाली पूर्व चेयरमैन रामौतार राजौरा की पत्नी सुमन अपनी जमानत तक गंवा बैठी थी। भाजपा विधायक कमल मलिक को मोदी और योगी मैजिक के सहारे चेयरमैन सीट फिर से कब्जा जमाने की चुनौती है तो सपा के पूर्व मंत्री मदन चौहान के सामने भी सीट जीतकर लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी दावेदारी मजबूत करने का लक्ष्य है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार वोटिंग में करीब साढ़े हजार की बढ़ोतरी हुई है, जिसे प्रमुख पार्टियों के सभी प्रत्याशी अपने पक्ष में होना बताकर जीत तय मान रहे हैं।
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भाजपा और सपा को अपनी खोई सीट फिर से कब्जाने की चुनौती
बसपाई पहली बार खाता खोलने को लेकर आशान्वित
भूतेश्वर प्रसाद शर्मा
गढ़मुक्तेश्वर। भाजपा विधायक समेत सपा के पूर्व मंत्री की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है। इस बार भाजपा और सपा को अपनी खोई सीट फिर से कब्जाने तो बसपा के सामने पहली बार जीत का खाता खोलने की चुनौती है।
जीत-हार के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2001 में भाजपा के रामौतार राजौरा और 2006 में सपा के सोना सिंह ने पहली बार अपनी पार्टियों की विजय पताका फहराई थी। 2012 के चुनाव में कांग्रेस की संगीता पुरुषोत्तम ने अप्रत्याशित ढंग में पूर्व चेयरमैन सोना सिंह की बसपा समर्थित पत्नी सुमन सिंह को पराजित कर दिया था, लेकिन भाजपा से किस्मत आजमाने वाली पूर्व चेयरमैन रामौतार राजौरा की पत्नी सुमन अपनी जमानत तक गंवा बैठी थी। भाजपा विधायक कमल मलिक को मोदी और योगी मैजिक के सहारे चेयरमैन सीट फिर से कब्जा जमाने की चुनौती है तो सपा के पूर्व मंत्री मदन चौहान के सामने भी सीट जीतकर लोकसभा चुनाव 2019 में अपनी दावेदारी मजबूत करने का लक्ष्य है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार वोटिंग में करीब साढ़े हजार की बढ़ोतरी हुई है, जिसे प्रमुख पार्टियों के सभी प्रत्याशी अपने पक्ष में होना बताकर जीत तय मान रहे हैं।
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