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अब आशाएं गांवों में महिलाओं को सिखायेंगी ओआरएस बनाने की विधि
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:20 AM IST
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अब आशाएं गांवों में महिलाओं को
सिखाएंगी ओआरएस बनाने की विधि
हापुड़। स्वास्थ्य विभाग की आशाएं अब गांवों में कार्यशाला लगाकर महिलाओं को ओआरएस बनाने की विधि बताएंगी। इससे महिलाएं अपने बच्चों को डायरिया आदि होने पर उसका संतुलित घोल बनाकर बच्चों को पिला सकेंगी। एक कार्यशाला में 10 परिवारों की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल जल्द ही शुरू होने जा रही है।
डायरिया की चपेट में आकर अनेक बच्चे दम तोड़ देते हैं। जानकारी के अभाव में अभिभावक बच्चे के शरीर में डायरिया के कारण हुई पानी की कमी को दूर नहीं कर पाते हैं, बल्कि उसे देशी उपचार देते रहते हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने डायरिया पर शिकंजा कसने की रणनीति बना ली है।
डायरिया से पीड़ित बच्चे की देखभाल कैसे करें, उसे क्या पिलाएं और क्या खिलाएं इसकी पूरी जानकारी आशाओं को दी जा रही है। जल्द ही प्रत्येक गांव में कार्यशाला का आयोजन होगा। प्रत्येक कार्यशाला में आशा 10 परिवार की महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी।
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प्रशिक्षण में महिलाओं को ओआरएस का घोल बनाने, डायरिया के दौरान बच्चों की किस तरह देखभाल करें, पूरी जानकारी दी जाएगी। अफसरों ने गांवों की सूची तैयार कर आशाओं को किट उपलब्ध कराने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। जल्द ही डायरिया पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू कर दी जाएगी।
डिप्टी सीएमओ डा.प्रवीण शर्मा का कहना है कि आशाएं गांवों में जाकर महिलाओं को ओआरएस का संतुलित घोल बनाना सिखायेंगी, ताकि महिलाएं बच्चे को डायरिया आदि होने पर अच्छे से देखभाल कर सकें।
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सिखाएंगी ओआरएस बनाने की विधि
हापुड़। स्वास्थ्य विभाग की आशाएं अब गांवों में कार्यशाला लगाकर महिलाओं को ओआरएस बनाने की विधि बताएंगी। इससे महिलाएं अपने बच्चों को डायरिया आदि होने पर उसका संतुलित घोल बनाकर बच्चों को पिला सकेंगी। एक कार्यशाला में 10 परिवारों की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पहल जल्द ही शुरू होने जा रही है।
डायरिया की चपेट में आकर अनेक बच्चे दम तोड़ देते हैं। जानकारी के अभाव में अभिभावक बच्चे के शरीर में डायरिया के कारण हुई पानी की कमी को दूर नहीं कर पाते हैं, बल्कि उसे देशी उपचार देते रहते हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने डायरिया पर शिकंजा कसने की रणनीति बना ली है।
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डायरिया से पीड़ित बच्चे की देखभाल कैसे करें, उसे क्या पिलाएं और क्या खिलाएं इसकी पूरी जानकारी आशाओं को दी जा रही है। जल्द ही प्रत्येक गांव में कार्यशाला का आयोजन होगा। प्रत्येक कार्यशाला में आशा 10 परिवार की महिलाओं को प्रशिक्षण देंगी।
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प्रशिक्षण में महिलाओं को ओआरएस का घोल बनाने, डायरिया के दौरान बच्चों की किस तरह देखभाल करें, पूरी जानकारी दी जाएगी। अफसरों ने गांवों की सूची तैयार कर आशाओं को किट उपलब्ध कराने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। जल्द ही डायरिया पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू कर दी जाएगी।
डिप्टी सीएमओ डा.प्रवीण शर्मा का कहना है कि आशाएं गांवों में जाकर महिलाओं को ओआरएस का संतुलित घोल बनाना सिखायेंगी, ताकि महिलाएं बच्चे को डायरिया आदि होने पर अच्छे से देखभाल कर सकें।