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बेटी बचाओ बेटी बढ़ाओ अभियान भी बेअसर
Updated Sun, 03 Jun 2018 12:24 AM IST
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जन्म के कुछ ही घंटो बाद नवजात बच्ची गंगा किनारे छोड़ी
गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट गंगा किनारे शुक्रवार की रात कोई नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया। जन्म लेने के बाद जिस बच्ची को मां का प्यार भी नसीब नहीं हुआ, उसे रोते बिलखते देखकर लोगों का भी दिल पसीज गया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस ने एक दलित दंपति ने बेटी को पालने पोसने की जिम्मेदारी दी है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर भले ही देश भर में एक अभियान चल रहा हो। सरकार से लेकर सामाजिक संगठन इसकी दुहाई भी दे रहे हों, लेकिन बेटी के जन्म को अभिशाप समझने वालों की आज भी कोई कमी नहीं है। इसी अभिशाप की लालसा लिए किसी ने जन्म लेने के कुछ ही घंटों बाद एक नवजात बच्ची को ब्रजघाट के गंगा किनारे छोड़ दिया। भूखी-प्यासी नवजात बच्ची के रोने की आवाज जैसे ही लोगों के कानों में गूंजी तो उनके कदम ठिठक गए और वे आनन फानन में उस तरफ चले गए। लोगों ने जाकर देखा तो एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी हुई गंगा किनारे पड़ी हुई थी और भूख से बुरी तरह बिलख रही थी। गंगा किनारे नवजात बच्ची मिलने की सूचना पर ब्रजघाट में रहने वाला एक दलित युवक अपनी पत्नी को साथ लेकर मौके पर आ गया, तथा उस बच्ची को गोद लेने की गुजारिश की। निसंतान दंपति बच्ची को अपनी बेटी की तरह पाल पोसने की बात कहकर घर ले गया। वहीं सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज केपी सिंह भी मौके पर पहुंच गए, जिन्होंने दलित युवक को बच्ची की देखभाल में कोई भी कोताही न करने की कड़ी हिदायत दी। वहीं तहसीलदार मनोज कुमार सिंह का कहना है कि इस संबंध में ब्रजघाट पुलिस से पूरी जानकारी लेने के बाद गंगा किनारे लावारिस हालत में मिली बच्ची को बाल संरक्षण केंद्र में भिजवाया जाएगा, जिसके बाद ही संबंधित महकमा बच्ची के भविष्य को लेकर कोई फैसला लेगा।
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गढ़मुक्तेश्वर। ब्रजघाट गंगा किनारे शुक्रवार की रात कोई नवजात बच्ची को छोड़कर चला गया। जन्म लेने के बाद जिस बच्ची को मां का प्यार भी नसीब नहीं हुआ, उसे रोते बिलखते देखकर लोगों का भी दिल पसीज गया। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस ने एक दलित दंपति ने बेटी को पालने पोसने की जिम्मेदारी दी है।
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को लेकर भले ही देश भर में एक अभियान चल रहा हो। सरकार से लेकर सामाजिक संगठन इसकी दुहाई भी दे रहे हों, लेकिन बेटी के जन्म को अभिशाप समझने वालों की आज भी कोई कमी नहीं है। इसी अभिशाप की लालसा लिए किसी ने जन्म लेने के कुछ ही घंटों बाद एक नवजात बच्ची को ब्रजघाट के गंगा किनारे छोड़ दिया। भूखी-प्यासी नवजात बच्ची के रोने की आवाज जैसे ही लोगों के कानों में गूंजी तो उनके कदम ठिठक गए और वे आनन फानन में उस तरफ चले गए। लोगों ने जाकर देखा तो एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी हुई गंगा किनारे पड़ी हुई थी और भूख से बुरी तरह बिलख रही थी। गंगा किनारे नवजात बच्ची मिलने की सूचना पर ब्रजघाट में रहने वाला एक दलित युवक अपनी पत्नी को साथ लेकर मौके पर आ गया, तथा उस बच्ची को गोद लेने की गुजारिश की। निसंतान दंपति बच्ची को अपनी बेटी की तरह पाल पोसने की बात कहकर घर ले गया। वहीं सूचना मिलते ही चौकी इंचार्ज केपी सिंह भी मौके पर पहुंच गए, जिन्होंने दलित युवक को बच्ची की देखभाल में कोई भी कोताही न करने की कड़ी हिदायत दी। वहीं तहसीलदार मनोज कुमार सिंह का कहना है कि इस संबंध में ब्रजघाट पुलिस से पूरी जानकारी लेने के बाद गंगा किनारे लावारिस हालत में मिली बच्ची को बाल संरक्षण केंद्र में भिजवाया जाएगा, जिसके बाद ही संबंधित महकमा बच्ची के भविष्य को लेकर कोई फैसला लेगा।
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