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रतवा गांव में पानी का संकट
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Sat, 23 May 2015 11:46 PM IST
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गांव रतवा में पेयजल की भीषण किल्लत है। तालाब और कुएं सूख गए हैं। इतना ही
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नहीं ज्यादातर हैंडपंप भी दगा दे गए हैं। हाल में लगाए गए नए हैंडपंप भी
सड़क के आसपास ही लगाए गए हैं। इससे कुछ ही लोगों को फायदा मिल रहा है।
पानी की कमी से हालात बिगड़ रहे हैं। पानी के अभाव में दर्जन भर से अधिक
मवेशियों की जान जा चुकी है।
रतवा में पहले से ही पेयजल की किल्लत है। पेयजल समस्या के लिए 35 साल पूर्व खंडेह गांव पेयजल योजना से बांदा की केन नदी से इस गांव को जोड़ा गया था, लेकिन कभी भी इस गांव में पानी नहीं आया।
पांच वर्ष पूर्व यहां के तालाब की आधी-अधूरी खुदाई कराई गई थी। बारिश के अभाव में यह तालाब सूखा पड़ा है। इस गांव में न तो कोई नदी है और न ही पानी का कोई अन्य स्रोत। इस गांव में तीन कुएं हैं।
इनमें से एक का पानी खराब है और वह भी सूख चुका है। दूसरे का पानी भी पूरी तरह सूख रहा है। गांव में सात हैंडपंप हैं। दो खराब पड़े है। तीन हैंडपंपों में थोड़ा-थोड़ा पानी आता है। दो हैंडपंप रिबोर के लिए पड़े हैं।
इस पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पानी की समस्या को देखते सदर विधायक ने एक हैंडपंप दलित बस्ती को प्रस्तावित किया है। वहीं, अन्य नेताओं को मिलाकर तीन हैंडपंप मशीनों के जरिये लगाए जा रहे हैं लेकिन ये सड़क के किनारे स्कूल के निकट वाली बस्ती के आसपास ही लग रहे हैं।
ऐसे में गांव की अन्य बस्ती को पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। गांव निवासी राममिलन अहिरवार, सीताराम का कहना है कि गांव के बाहर एक कुआं है। उसमें भी थोड़ा सा पानी बचा है। हालात बेहद गंभीर हैं, 15 दिन बाद यह कुंआ भी सूख जाएगा।
एसडीएम, मौदहा प्रवीणा अग्रवाल ने कहा कि गर्मी आते कुछ गांवों में पानी का संकट पैदा हो जाता है। ग्रामीणों से जानकारी मिली है। वह इस गांव में पानी उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास करेंगी।
दूरदराज पानी पीने जाते हैं बच्चे
गांव निवासी मंगल ने बताया कि स्कूल के सामने लगा हैंडपंप गंदा पानी दे रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे मिड-डे मील खाने के बाद दूरदराज पानी पीने जाते है। यह गांव रीवन गांव सभा में जुड़ा है। प्रधान रश्मि त्रिपाठी एक चरही बनवा रही हैं। उनका कहना है कि स्कूल के हैंडपंप में सबमर्सिबल डालकर इस चरही में पानी भरेंगे, जिससे मवेशी पानी पीकर अपनी जान बचा सकेंगे।
असरदार लोगों ने नहीं लगने दिया हैंडपंप
गांव के भैरम ने बताया कि पानी की भीषण समस्या है। पानी न मिलने से एक दर्जन से अधिक मवेशी मर चुके हैं। सैकड़ों वन गाय पानी की तलाश में घूमती हैं। पानी के अभाव में दम तोड़ रही हैं। बताया कि हमारे मकान के पास क्षेत्रीय विधायक शिवचरन प्रजापति ने एक हैंडपंप लगाने की संस्तुति की थी लेकिन असरदार लोगों ने हैंडपंप नहीं लगने दिया।
पानी न मिलने से मर रहे मवेशी
गांव के सत्यनारायण ने बताया कि पानी के अभाव में उसकी एक गाय मर चुकी है। बताया कि रमेश की पांच बकरियां व रामसिंह का एक बैल, गाय तथा मंगल की दो गायें मर चुकी हैं। इसके अलावा गांव के अन्य किसानों के मवेशी पानी के अभाव में मरे हैं। लेकिन सबसे अधिक मौतें वन गायों की हो रही हैं।
रतवा में पहले से ही पेयजल की किल्लत है। पेयजल समस्या के लिए 35 साल पूर्व खंडेह गांव पेयजल योजना से बांदा की केन नदी से इस गांव को जोड़ा गया था, लेकिन कभी भी इस गांव में पानी नहीं आया।
पांच वर्ष पूर्व यहां के तालाब की आधी-अधूरी खुदाई कराई गई थी। बारिश के अभाव में यह तालाब सूखा पड़ा है। इस गांव में न तो कोई नदी है और न ही पानी का कोई अन्य स्रोत। इस गांव में तीन कुएं हैं।
इनमें से एक का पानी खराब है और वह भी सूख चुका है। दूसरे का पानी भी पूरी तरह सूख रहा है। गांव में सात हैंडपंप हैं। दो खराब पड़े है। तीन हैंडपंपों में थोड़ा-थोड़ा पानी आता है। दो हैंडपंप रिबोर के लिए पड़े हैं।
इस पर अभी तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है। पानी की समस्या को देखते सदर विधायक ने एक हैंडपंप दलित बस्ती को प्रस्तावित किया है। वहीं, अन्य नेताओं को मिलाकर तीन हैंडपंप मशीनों के जरिये लगाए जा रहे हैं लेकिन ये सड़क के किनारे स्कूल के निकट वाली बस्ती के आसपास ही लग रहे हैं।
ऐसे में गांव की अन्य बस्ती को पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। गांव निवासी राममिलन अहिरवार, सीताराम का कहना है कि गांव के बाहर एक कुआं है। उसमें भी थोड़ा सा पानी बचा है। हालात बेहद गंभीर हैं, 15 दिन बाद यह कुंआ भी सूख जाएगा।
एसडीएम, मौदहा प्रवीणा अग्रवाल ने कहा कि गर्मी आते कुछ गांवों में पानी का संकट पैदा हो जाता है। ग्रामीणों से जानकारी मिली है। वह इस गांव में पानी उपलब्ध कराने का पूरा प्रयास करेंगी।
दूरदराज पानी पीने जाते हैं बच्चे
गांव निवासी मंगल ने बताया कि स्कूल के सामने लगा हैंडपंप गंदा पानी दे रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे मिड-डे मील खाने के बाद दूरदराज पानी पीने जाते है। यह गांव रीवन गांव सभा में जुड़ा है। प्रधान रश्मि त्रिपाठी एक चरही बनवा रही हैं। उनका कहना है कि स्कूल के हैंडपंप में सबमर्सिबल डालकर इस चरही में पानी भरेंगे, जिससे मवेशी पानी पीकर अपनी जान बचा सकेंगे।
असरदार लोगों ने नहीं लगने दिया हैंडपंप
गांव के भैरम ने बताया कि पानी की भीषण समस्या है। पानी न मिलने से एक दर्जन से अधिक मवेशी मर चुके हैं। सैकड़ों वन गाय पानी की तलाश में घूमती हैं। पानी के अभाव में दम तोड़ रही हैं। बताया कि हमारे मकान के पास क्षेत्रीय विधायक शिवचरन प्रजापति ने एक हैंडपंप लगाने की संस्तुति की थी लेकिन असरदार लोगों ने हैंडपंप नहीं लगने दिया।
पानी न मिलने से मर रहे मवेशी
गांव के सत्यनारायण ने बताया कि पानी के अभाव में उसकी एक गाय मर चुकी है। बताया कि रमेश की पांच बकरियां व रामसिंह का एक बैल, गाय तथा मंगल की दो गायें मर चुकी हैं। इसके अलावा गांव के अन्य किसानों के मवेशी पानी के अभाव में मरे हैं। लेकिन सबसे अधिक मौतें वन गायों की हो रही हैं।