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यूक्रेन के धमाके यादकर नींद में जग जाती है प्रतिष्ठा
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पैत्रक गांव सुरौली में प्रतिष्ठा गुप्ता का स्वागत करते दादा।
- फोटो : HAMIRPUR
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। शनिवार को सुबह यूक्रेन से लौटी कस्बे की एमबीबीएस छात्रा प्रतिष्ठा की रात परिजनों के साथ सुकून से गुजरी। लेकिन उसके अंदर यूक्रेन के धमाकों का मंजर अभी भी समाया हुआ है। रात में वह कई बार नींद में जागकर अचानक बिस्तर में बैठ गई। जिससे परिजन परेशान रहे। सभी बिटिया को धैर्य एवं साहस बंधा रहे हैं।
कस्बे के मैथिलीशरण गुप्त मार्ग निवासी मेडिकल कारोबारी मुकेश गुप्ता की पुत्री प्रतिष्ठा यूक्रेन में रहकर पिछले डेढ़ वर्ष से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। 23 फरवरी तक सब कुछ सामान्य था। लेकिन जैसे ही 24 फरवरी का आगाज हुआ रूसी टैंकों से गरजे गोलों ने प्रतिष्ठा की नींद उड़ा दी और वह स्वदेस आने के लिए परेशान हो उठी। किसी तरह वह यूक्रेन की राजधानी कीव से 28 फरवरी को बाहर आई। प्रतिष्ठा पांच मार्च को सुबह घर लौट आई। परिजनों को पाकर उसके आंसू निकल आए और उसने बताया कि वहां का मंजर बहुत ही भयावह है। रात दिन गोलों की धमक से धरती हिल रही है।
शनिवार की पहली रात उसके परिजनों संग घर में गुजरी। लेकिन उसके अंदर समाया भय अभी भी कायम है। मां मधु देवी, पिता मुकेश कुमार ने उसे दिलासा दिलाया कि उसे कोई खतरा नहीं है। वह भय त्याग कर चैन की नींद सोए। रविवार की सुबह वह पिता के साथ पैतृक गांव सुरौली चली गई। गांव पहुंचने पर उसे अजीब तरह का सुकून मिला। अब वह खुश है।
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कस्बे के मैथिलीशरण गुप्त मार्ग निवासी मेडिकल कारोबारी मुकेश गुप्ता की पुत्री प्रतिष्ठा यूक्रेन में रहकर पिछले डेढ़ वर्ष से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। 23 फरवरी तक सब कुछ सामान्य था। लेकिन जैसे ही 24 फरवरी का आगाज हुआ रूसी टैंकों से गरजे गोलों ने प्रतिष्ठा की नींद उड़ा दी और वह स्वदेस आने के लिए परेशान हो उठी। किसी तरह वह यूक्रेन की राजधानी कीव से 28 फरवरी को बाहर आई। प्रतिष्ठा पांच मार्च को सुबह घर लौट आई। परिजनों को पाकर उसके आंसू निकल आए और उसने बताया कि वहां का मंजर बहुत ही भयावह है। रात दिन गोलों की धमक से धरती हिल रही है।
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शनिवार की पहली रात उसके परिजनों संग घर में गुजरी। लेकिन उसके अंदर समाया भय अभी भी कायम है। मां मधु देवी, पिता मुकेश कुमार ने उसे दिलासा दिलाया कि उसे कोई खतरा नहीं है। वह भय त्याग कर चैन की नींद सोए। रविवार की सुबह वह पिता के साथ पैतृक गांव सुरौली चली गई। गांव पहुंचने पर उसे अजीब तरह का सुकून मिला। अब वह खुश है।
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