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यूक्रेन से लौटी प्रतिष्ठा को मां ने गले लगाया
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यूक्रेन से आई प्रतिष्ठा व उनके पिता मुकेश कुमार को पुष्पगुच्छ भेंट करते डीएम डा.चंद्र भूषण त्रिप?
- फोटो : HAMIRPUR
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भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। प्रतिष्ठा के वतन वापस आते ही मां मधु उसे सीने से लगाकर भावुक हो गई। रुंधे गले से प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा मोदी हैं तो मुमकिन हुआ है। जिलाधिकारी ने मुख्यालय बुलाकर पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।
मेडिकल व्यवसायी मुकेश कुमार की बेटी प्रतिष्ठा यूक्रेन की राजधानी कीव में रहकर एमबीबीएस कर रही थीं। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने पर वहां की स्थिति खराब हो गई। सोमवार को कीव में कर्फ्यू में ढील मिलने पर प्रतिष्ठा लबीब पहुंचने के बाद स्लोवाकिया पहुंची। वहां से वायुसेना के विमान से उन्हें लाया गया। शनिवार सुबह वह कस्बे में पहुंची। उसके घर आते ही परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। मां उसे सीने से लगाकर भावुक हो गईं। दादा चंदकिशोर शिवहरे, मामा, मामी, चाचा, चाची ने बेटी को तिलक लगाकर पुष्पमाला पहनाकर स्वागत कर उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वहीं कस्बे के पूर्व चेयरमैन शिवनारायण सोनकर, नवल शुक्ला, व्यापार मंडल अध्यक्ष महेश गुप्ता दीपू उनके घर पहुंचे और देश वापसी आने पर ढेर सारी बधाइयां दीं। बेटी के वापस आने पर जिलाधिकारी डॉ चंद्रभूषण त्रिपाठी ने तहसीलदार को उसके घर भेज कर बुलाया। यहां बेटी से भेंट कर उसे पुष्प गुच्छ सहित अन्य उपहार देकर स्वागत किया। आगे की पढ़ाई जारी रखने का कोई रास्ता निकलने पर मदद का आश्वासन दिया।
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प्रतिष्ठा ने युद्ध के सात दिनों का हाल बताते हुए कहा कि जिस दिन रूस ने आक्रमण किया तो सबका दिल दहल उठा। उन्हें हॉस्टल के कमरों से हटाकर बेसमेंट में रोकने के लिए मजबूर किया गया। बेटी ने बताया कि मिसाइल, गोली, बम की आवाज से दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं और डर के साथ जीवन बीत रहा था। युद्ध के शुरू होने के तीसरे दिन चार यूक्रेनी युवक लूट के इरादे से उनके हॉस्टल में घुस आए। एक के हाथ में गन और तीन लोगों के हाथ में चाकू थे। उनको देखकर बहुत ही भयभीत हो गए थे। सीनियर्स ने मोर्चा संभाला और उन्हें वापस जाने पर मजबूर किया। सोमवार को कर्फ्यू में ढील देने के बाद उन्हें निकालने में यूक्रेन और रूस की सेना ने पूरा सहयोग दिया और वह लोग रेलवे स्टेशन तक पहुंचे। स्लोवाकिया के केन्यान शहर पहुंचने पर वहां के वालिंटियर व भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने भरपूर सहयोग दिया।
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मेडिकल व्यवसायी मुकेश कुमार की बेटी प्रतिष्ठा यूक्रेन की राजधानी कीव में रहकर एमबीबीएस कर रही थीं। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने पर वहां की स्थिति खराब हो गई। सोमवार को कीव में कर्फ्यू में ढील मिलने पर प्रतिष्ठा लबीब पहुंचने के बाद स्लोवाकिया पहुंची। वहां से वायुसेना के विमान से उन्हें लाया गया। शनिवार सुबह वह कस्बे में पहुंची। उसके घर आते ही परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। मां उसे सीने से लगाकर भावुक हो गईं। दादा चंदकिशोर शिवहरे, मामा, मामी, चाचा, चाची ने बेटी को तिलक लगाकर पुष्पमाला पहनाकर स्वागत कर उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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वहीं कस्बे के पूर्व चेयरमैन शिवनारायण सोनकर, नवल शुक्ला, व्यापार मंडल अध्यक्ष महेश गुप्ता दीपू उनके घर पहुंचे और देश वापसी आने पर ढेर सारी बधाइयां दीं। बेटी के वापस आने पर जिलाधिकारी डॉ चंद्रभूषण त्रिपाठी ने तहसीलदार को उसके घर भेज कर बुलाया। यहां बेटी से भेंट कर उसे पुष्प गुच्छ सहित अन्य उपहार देकर स्वागत किया। आगे की पढ़ाई जारी रखने का कोई रास्ता निकलने पर मदद का आश्वासन दिया।
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प्रतिष्ठा ने युद्ध के सात दिनों का हाल बताते हुए कहा कि जिस दिन रूस ने आक्रमण किया तो सबका दिल दहल उठा। उन्हें हॉस्टल के कमरों से हटाकर बेसमेंट में रोकने के लिए मजबूर किया गया। बेटी ने बताया कि मिसाइल, गोली, बम की आवाज से दिल की धड़कनें तेज हो जाती थीं और डर के साथ जीवन बीत रहा था। युद्ध के शुरू होने के तीसरे दिन चार यूक्रेनी युवक लूट के इरादे से उनके हॉस्टल में घुस आए। एक के हाथ में गन और तीन लोगों के हाथ में चाकू थे। उनको देखकर बहुत ही भयभीत हो गए थे। सीनियर्स ने मोर्चा संभाला और उन्हें वापस जाने पर मजबूर किया। सोमवार को कर्फ्यू में ढील देने के बाद उन्हें निकालने में यूक्रेन और रूस की सेना ने पूरा सहयोग दिया और वह लोग रेलवे स्टेशन तक पहुंचे। स्लोवाकिया के केन्यान शहर पहुंचने पर वहां के वालिंटियर व भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने भरपूर सहयोग दिया।