सुहागिनों ने चांद को चलनी से निहार पति की दीर्घायु की कामना
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मुख्यालय के यमुना तटबंध में सुहागिनों ने करवा पूजन कर चलनी से चंद्रमा को निहार कर सुहाग की लंबी उम्र के लिए ईश्वर से कामना की और व्रत तोड़ा। करवा चौथ पर्व क्षेत्र में उत्साह पूर्वक मनाया गया। शाम ढलते ही निर्जला उपवास रखने वाली महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के लिए छतों और खुले मैदान में पहुंच र्गइं। उनकी नजरें आसमान में छिपे चांद के निकलने का इंतजार करने लगी। जैसे ही बादलों में छिपे चांद ने बाहर झांका तो सुहागिनों के चेहरों पर मुस्कान छा गई। महिलाओं ने चंद्रदेव को अर्ध्य देकर पूजा अर्चना कर व्रत तोड़ा।
कार्तिक मास की चतुर्थी को करवाचौथ का व्रत हर सुहागिन महिला के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी धारणा के चलते हिंदू महिलाएं अपनी पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत का परायण करती हैं। बुधवार को करवा चौथ पर व्रत धारण करने वाली सुहागिनों ने चांद निकलने पर टोंटीदार लोटे और सींक से अर्ध्य देकर अटल सुहाग की कामना की।
इससे पहले महिलाओं ने अपने घर आंगन और छतों पर गोबर से लीप चौक पूरा और गौरी गणेश की पूर्ण विधि विधान से पूजा की। सोलह श्रंगार से सुसज्जित सुहागिनों ने चंाद के निकलने पर लोहे की चलनी में दीपक रख चांद को निहारा और फिर अपने पति के चांद जैसे मुखडे़ को निहार उनकी आरती उतार उनकी दीर्घायु की कामना की। पूजन के दौरान पति ने अपनी पत्नी को पानी पिलाकर उनके व्रत का उद्धापन किया।