{"_id":"61fd786957edfb43d343fb34","slug":"semela-farmer-daughter-became-nursing-officer-hamirpur-news-sml398616851","type":"story","status":"publish","title_hn":"समैला के किसान की बेटी बनी नर्सिंग ऑफिसर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समैला के किसान की बेटी बनी नर्सिंग ऑफिसर
विज्ञापन
नर्सिंग ऑफिसर बनी समैला गांव की कल्पना।
- फोटो : Hamirpur-HP
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिझड़ी (हमीरपुर)। उपमंडल बड़सर की ग्राम पंचायत समैला के किसान की बेटी बतौर नर्सिंग ऑफिसर चयनित हुई है। ढटवाल की गरीब परिवार की बेटी अब बिहार के पटना के एम्स में सेवाएं देंगी। बेटी की इस उपलब्धि से माता-पिता और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। कल्पना पटियाल पुत्री विजय पटियाल समैला गांव की रहने वाली है। कल्पना ने अपनी जमा दो तक की पढ़ाई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल महारल से की है। बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से पूरी की।
कल्पना की माता सुनीता देवी गृहिणी हैं और पिता विजय पटियाल पेशे से किसान हैं। कल्पना की दो और बहनें और एक भाई है। कल्पना इनमें सबसे बड़ी है, जो नर्सिंग ऑफिसर बनी है। इसके साथ ही दो बहने सीमा जीएनएम और सबसे छोटी बहन रीमा बीफार्मा कि पढ़ाई कर रही है।
कल्पना ने बताया कि वे बहुत ही गरीब परिवार से संबंध रखती है, लेकिन उनके माता-पिता ने दिन-रात मेहनत कर उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। माता-पिता ने आर्थिक तंगी को कभी उनकी पढ़ाई के सामने आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र के समाजसेवी और उप्रधान वचित्र सिंह ढटवालिया को भी दिया है। वचित्र सिंह और माता-पिता ने बेटी की इस उपलब्धि को उसकी कड़ी मेहनत का परिणाम बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कल्पना की माता सुनीता देवी गृहिणी हैं और पिता विजय पटियाल पेशे से किसान हैं। कल्पना की दो और बहनें और एक भाई है। कल्पना इनमें सबसे बड़ी है, जो नर्सिंग ऑफिसर बनी है। इसके साथ ही दो बहने सीमा जीएनएम और सबसे छोटी बहन रीमा बीफार्मा कि पढ़ाई कर रही है।
विज्ञापन
कल्पना ने बताया कि वे बहुत ही गरीब परिवार से संबंध रखती है, लेकिन उनके माता-पिता ने दिन-रात मेहनत कर उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। माता-पिता ने आर्थिक तंगी को कभी उनकी पढ़ाई के सामने आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी उपलब्धि का श्रेय क्षेत्र के समाजसेवी और उप्रधान वचित्र सिंह ढटवालिया को भी दिया है। वचित्र सिंह और माता-पिता ने बेटी की इस उपलब्धि को उसकी कड़ी मेहनत का परिणाम बताया।
विज्ञापन